ADVERTISEMENT

आपका वोट

क्या राहुल गांधी भ्रष्टाचार खत्म करेंगे?

  • सही
  • गलत
  • पता नहीं
और भी

फोटो दीर्घा

Share

महिला आरक्षण विधेयक को मूल प में पेश

swatantravaartha  Fri, 18 Dec 2009, IST

महिला आरक्षण विधेयक को मूल प में पेश करने की सिफारिश

नइ दीि, १७ दिसबर (भाषा)। ससद आर विधानमडलों में महिलाआें को ३३ फीसदी आरक्षण देने सबधी विधेयक पर विचार करने वाली ससद की थायी समिति ने मूल प में इसका पुरजोर समथन करते हए इसे बिना अधिक समय बबाद किए ससद में पारित कराकर अविलब अमली जामा पहनाये जाने की सिफारिश की ह। समिति ने महिलाआें का आरक्षण राजनीतिक दलों पर छोड देने सबधी सुझाव के साथ ही अय पिछडा वग की महिलाआें को आरक्षण में आरक्षण देने की समाजवादी पार्टी की माग को भी नामजूर कर दिया ह। समिति की अयक्ष जयती नटराजन ने आज रायसभा में रिपोट पेश करने के बाद ससद परिसर में उमीद जतायी कि विधेयक को आगामी बजट स में ही पारित कर दिया जाएगा। समिति ने कहा ह ‘गीता मुखर्जी समिति की रिपोट के बाद १२ साल से अधिक का समय बीत चुका ह आर अभी तक भी यह अयावयक आरक्षण देश की ५० फीसदी आबादी अथात महिलाआें तक नहीं पहचा ह। समिति पुरजोर प से यह महसूस करती ह कि इसमें आर अधिक समय नहीं बबाद करना चाहिए, इसके बजाय महिला आरक्षण विधेयक ससद में पारित किया जाना चाहिए आर उसे अविलब कायावित किया जाना चाहिए। नटराजन ने सवाददाताआें से कहा कि समिति ने समाजवादी पार्टी ारा महिलाआें का आरक्षण २० तिशत तक ही सीमित रखने के सुझाव से भी असहमति जतायी ह।

उधर, रायसभा में रिपोट पेश होने के बाद लोकसभा में सपा सदयों ने आसन के सामने आकर रिपोट का जोरदार विरोध किया आर इसे वापस लिए जाने की माग की। समिति ने कहा ह कि अनुसूचित जाति जनजाति की महिलाआें के लिए आरक्षण की जरत इसलिए ह, ताकि वे अगडे वगा] की महिलाआें के साथ उचित तिपधा करने में समथ बन सकें। समिति का ыढ विचार ह कि विधेयक में दिया गया आरक्षण उनके राजनीतिक, आथिक आर सामाजिक विकास के लिए आवयक ह। हालाकि समिति के सपा सदयों ने अपने असहमतिप में अनुसूचित जाति जनजाति के साथ ही पिछडे आर अपसयक वग की महिलाआें को भी आरक्षण देने की माग की ह।

समिति ने महिला आरक्षण लागू होने की तिथि से १५ वषा] की अवधि की समाति के बाद इसके भावी नहीं रहने की भी सिफारिश की ह। महिला आरक्षण को चकानुकम (रोटेशन) रखने की सिफारिश के बारे में नटराजन ने कहा कि समिति की राय ह कि इसका चकानुकम होना लोकत के हित में होगा। महिला आरक्षण विधेयक पर सपा के अलावा किसी आर राजनीतिक दल की ओर से विरोध के बारे में पूछे जाने पर नटराजन ने कहा, ‘राजद, पीएमके आर एकदो छोटे राजनीतिक दलों की ओर से सुझाव सामने आये, लेकिन विरोधप नहीं आया।’ उहोंने कहा, ‘लेकिन थायी समिति ने महिला आरक्षण विधेयक को वतमान वप में पारित करने की सिफारिश की ह, योंकि समिति का प मत ह कि महिला आरक्षण का निधारण राजनीतिक दलों की ओर से नहीं, सवधानिक तरीके से हो।’ नटराजन ने कहा, ‘मुझे इस बात का पूरा विवास ह कि ससद के बजट स में इस विधेयक को पारित कर दिया जायेगा।’ समिति ने चुनाव आयोग के ‘गिल फामूला’ को नामजूर कर दिया ह, जिसमें कहा गया था कि राजनीतिक दलों के लिए महिलाआें को आरक्षण देना आवयक कर दिया जाए। रिपोट में कहा गया ह कि इस बारे में समिति को मिले अधिकाश ज्ञापनों में कहा गया ह कि इससे राजनीतिक दल महिलाआें को ऐसी सीटें देंगे, जिन पर वे विजयी नहीं हो सकतीं आर इससे निवाचित सदनों में वातविकता में महिलाआें को आरक्षण देने का उेय समात हो जाएगा।

समिति का यह सुविचारित मत ह कि राय विधानसभाआें आर लोकसभा में सीटों का एकतिहाइ आरक्षण महिलाआें की एक तर तक उपथिति सुनिचित करेगा, जिसे राजनीतिक दलों ारा नजरअदाज नहीं किया जा सकता ह। इसलिए समिति की राय ह कि महिलाआें के लिए एक तिहाइ आरक्षण को कम करने की आवयकता नहीं ह।

आपकी राय