अखंड प्रदेश की मांग पर भी करेगी विचार
नई दिल्ली/हैदराबाद। तेलंगाना के भावनात्मक मुद्दे पर केंद्र की ओर से गठित एक उच्चस्तरीय समिति से अखंड आंध्र प्रदेश के विकल्प पर भी गौर करने को कहा गया है और उसे अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिये इस वर्ष के अंत तक का समय दिया गया है। टीआरएस ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि उसके सांसद और विधायक तत्काल इस्तीफा देंगे।
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बीएन श्रीकृष्णा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समिति के सात सूत्री कार्य क्षेत्रों के मुताबिक समिति राज्य में हाल के दिनों में हुए घटनाक्रमों का महिलाआें, बच्चों, छात्रों, अल्पसंख्यकों, अन्य पिछ़डा वगा], अनुसूचित जातियों और जनजातियों पर प़डे प्रभावों का अध्ययन करेगी। समिति से आंध्र प्रदेश के गठन के बाद से हुए विकास और उनका राज्य के विभिन्न क्षेत्रों की प्रगति और विकास पर प़डे प्रभाव की समीक्षा करने को कहा गया है।
कार्य क्षेत्र के मुताबिक, ‘पृथक तेलंगाना राज्य के गठन की मांग के साथ ही अखंड आंध्र प्रदेश की मौजूदा स्थिति बनाये रखने की मांग के संदर्भ में भी समिति राज्य की स्थिति पर गौर करेगी।’ समिति से इस वर्ष ३१ दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। उधर, पृथक तेलंगाना के मुद्दे पर आंदोलन की अगुवाई कर रही तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव ने हैदराबाद में कहा, ‘केंद्र ने एक बार फिर विश्वासघात किया है।’
राव ने पार्टी के सभी सांसदों, विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों को इस ‘विश्वासघात’ के विरोध में तुरंत इस्तीफा देने के निर्देश दिये हैं।
राव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘सभी १३ जनप्रतिनिधि समिति के कार्य क्षेत्र के खिलाफ तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहे हैं। तेलंगाना राज्य हासिल करने तक यह ल़डाई अथक चलती रहेगी।’ समिति के कार्य क्षेत्र की घोषणा के कुछ ही समय बाद उस्मानिया विश्वविद्यालय की संयुक्त कार्रवाई समिति ने इसके विरोध में कल दिनभर के तेलंगाना बंद का आह्वान किया है। पृथक तेलंगाना राज्य के लिए छात्रों के आंदोलन की अगुवाई कर रही संयुक्त कार्रवाई समिति ने एक वक्तव्य में कहा, ‘कार्यक्षेत्र तेलंगाना के (गठन के) बिल्कुल खिलाफ है।
केंद्र को समिति को तुरंत भंग करना चाहिए और पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के लिए संसद में सीधे एक विधेयक को पेश करना चाहिए।’ तेलंगाना मुद्दे पर विचार के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बीएन श्रीकृष्णा की अध्यक्षता में गठित इस उच्चाधिकार समिति की कल दिल्ली में पहली बैठक होगी।
समिति के अन्य सदस्यों में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय दिल्ली के कुलपति रणवीर सिंह, दिल्ली स्थित इंटरनेशनल फूड पालिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट में सीनियर रिसर्च फेलो अबुसलेह शरीफ, आईआईटी दिल्ली के मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग की प्रोफेसर रवींदर कौर और पूर्व गृह सचिव विनोद के दुग्गल शामिल हैं। कार्य क्षेत्र में कहा गया है कि समिति अहम मुद्दों की पहचान करेगी और मामले पर विचार करने के दौरान इस पर निश्चित तौर पर ध्यान दिया जाना चाहिए। गत तीन फरवरी को गठित यह समिति राज्य में हुएहालिया विकास के महिलाआें, बच्चों, विद्यार्थियों, अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जैसे विभिन्न वर्ग के लोगों पर प़डे असर पर गौर करेगी। सरकार के घोषित किये गये कार्य क्षेत्रों के मुताबिक समिति उन अहम मुद्दों की पहचान करेगी, जिन पर इस मामले में विचार करने के दौरान ध्यान दिये जाने की जरूरत है।
समिति इन मुद्दों पर ‘जनता के सभी वगा] और विशेषकर राजनीतिक दलों से सलाहमशविरा करेगी और मौजूदा कठिन परिस्थिति के समाधान और सभी वर्ग के कल्याण के लिये उनके विचार जानेगी।’
समिति इस मुद्दे के लिये उपयुक्त समाधान तलाशेगी तथा कार्य योजना और रूपरेखा की सिफारिश करेगी। समिति ‘उद्योगों, ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और छात्राआें सहित सभ्य समाज के अन्य संगठनों से विशेषकर राज्य के सर्वांगीण विकास के बारे में सलाहमशविरा करेगी।’ एक समारोह में एक साथ नजर आये आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रोशय्या और तेदेपा प्रमुख एन चंद्रबाबू नायुडू ने कहा कि वे कार्य क्षेत्रों का अध्ययन करने के बाद ही प्रतिक्रिया देंगे।
