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उविवि परिसर में बने रहेंगे अर्द्धसैनिक बल

Swatantra Vaartha  Sat, 20 Feb 2010, IST

उविवि परिसर में बने रहेंगे अर्द्धसैनिक बल

नई दिल्ली,। आंध्र प्रदेश सरकार ने आज दावा किया कि माओवादियों ने पृथक तेलंगाना राज्य बनाने के लिए चलाए जा रहे आंदोलन में घुसपैठ कर ली है, जबकि उच्चतम न्यायालय ने आंदोलन की गतिविधियों के केंद्र बिन्दु बने उस्मानिया विश्वविद्यालय से अर्द्धसैनिक बल हटाने के राज्य उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक लगा दी। गौरतलब है कि उस्मानिया विश्वविद्यालय इन दिनों तेलंगाना आंदोलन का अड्डा बना हुआ है।

बहरहाल शीर्ष अदालत की दो सदस्यीय पीठ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि विश्वविद्यालय में कोई नक्सली है।’

पीठ ने २३ फरवरी तक उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक लगा दी। पीठ ने राज्य गृह सचिव को अर्द्धसैनिक बलों पर निगरानी रखने और यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि वे किसी प्रकार से छात्रों के साथ दुर्व्यवहार नहीं करें। पीठ ने कहा कि अर्द्धसैनिक बलों को गृह सचिव की निजी निगरानी में काम करना चाहिए।

बहरहाल शीर्ष अदालत ने राज्य की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे और छात्रों की तरफ से पेश हुए प्रशांत भूषण के इस अनुरोध को अस्वीकार किया कि दुर्व्यवहार के खिलाफ दिये गये निर्देश के दायरे में पत्रकारों को भी लाया जाना चाहिए, जिनपर अर्द्धसैनिक बलों ने बर्बरतापूर्वक हमला किया। पत्रकारों के संरक्षण के लिए कोई निर्देश नहीं देते हुए न्यायमूर्ति सिंघवी ने कहा, ‘फिलहाल हम छात्रों के लिए चिंतित हैं।

’इससे पूर्व, साल्वे ने उच्च न्यायालय के १६ फरवरी को दिये गये आदेश का समर्थन करते हुए कहा, ‘हमारी मजबूत अवधारणा है कि माओवादियों ने विश्वविद्यालय में घुसपैठ कर ली है और वे समस्या उत्पन्न कर रहे हैं।’

साल्वे ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हाल में पुलिसकर्मियों की हत्या और छत्तीसग़ढ एवं अन्य स्थलों में नक्सली हिंसा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पृथक तेलंगाना राज्य को लेकर आंध्र प्रदेश में व्यापक स्तर पर हो रहीहिंसा के पीछे माओवादी हैं।न्यायालय ने उक्त आदेश आंध्र प्रदेश सरकार की एक अपील पर दिया। अपील में उच्च न्यायालय के परिसर से अर्द्धसैनिक बलों को वापस बुलाने संबंधी आदेश को चुनौती दी गई थी। प्रदेश सरकार ने कल उच्चतम न्यायालय में अपील की थी। राज्य सरकार ने १६ फरवरी को दिए गए उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि उच्च न्यायालय पृथक तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन की गतिविधियों का अड्डा बने विश्वविद्यालय परिसर से अर्द्धसैनिक बलों को हटाने का आदेश नहीं दे सकता। उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने विश्वविद्यालय परिसर से विशेष बलों को हटाने संबंधी एकल जज के आदेश को १६ फरवरी को बरकरार रखा था। खंडपीठ ने यह भी कहा था कि पुलिस को विश्वविद्यालय के प्रशासन में तभी हस्तक्षेप करना चाहिए, जब इसके लिए विश्वविद्यालय के अधिकारी उनसे अनुरोध करें। पीठ ने कहा था कि एकल जज का यह विश्लेषण सही था कि विश्वविद्यालय परिसर में हालात का अध्ययन किए बिना ही त्वरित कार्यबल को तैनात कर दिया गया है।

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