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फायदेमद साबित हो रहा है परिसर साक्षाकार

swatantravarth  Mon, 21 Dec 2009, IST

फायदेमद साबित हो रहा है परिसर साक्षाकार

साक्षाकार का एक अय कार पिछले कुछ वषा] से चलन में आया । इसे कपस इटरयू या परिसर साक्षाकार कहा जाता ह। इस साक्षाकार में नियाेा पूव सूचना देकर किसी निचित तिथि को जहा वादिर्थी पढ रहे होते ह या शिक्षण ले रहे होते ह, वहीं जाकर उनका साक्षाकार ले लेते है। निकूत्थ को किस पकार के कमचारी या अधिकारी चाहिए, वे यवि के किन लक्षणों वाले हो, उनमें किनकिन गुणों, काशलों एव योयताआें की वे आशा करते ? वे किस दिनाक को भर्ती का ताव करते ह ? इस कार के सूचना परिप बहत पहले ही सथा धान को भिजवा दिया जाता ह जिसे वे सूचनापटट पर लगवा देते ह, उसकी ति वाचनालय में भी रखवा देते ह जहा सभी वािर्थी उसे देख सके।

वे अय कार से भी वािथियों को जानकारी देने का यन करते ह यथा ाथना सभा में घोषणा आदि। इस कार के साक्षाकार से कुछ विशेष लाभ होते ह। नियाेा एक ही पकार के पाठयकम का अययन कर रहे एक से अधिक आशाथियों का एक ही थान पर साक्षाकार ले लेते ह। अपनी अपेक्षाआ को यान में रखते हए वे सवाधिक योय आशार्थी का चयन कर लेते ह। विज्ञापन देने, आवेदन पों का मागना, उसकी छटनी करना या उनका चयन करना, फिर पाचार, फिर साक्षाकार की तिथि तय करना, फिर साक्षाकार सप करनाइन सब झझटों से पा जाते ह। इन सामाय लाभो की अपेक्षा समय की बचत का सबसे बडा लाभ होता ह। सथान के धान के मायम से काफी समय पूव परिसर साक्षाकार की सूचना मिल जाने से सभी नाकरी पाने के उमीदवार वािर्थीआशार्थी उस दिन इटरयू देने के लिये तयार रहते है ।

साक्षाकार देने वालों को नइ जगह इटरयू नहीं देना होता ह। जहा वे लबे समय से पढ रहे ह, वहीं जानी पहचानी जगह इटरयू होता ह। नये थान पर नियाेा के समुख इटरयू देने के मानसिक तनाव से आशार्थी मु हो जाते ह। अपनी परिचित जगह पर अपने ही धानाचाय के समुख साक्षाकार देने में उनमें विवास, साहस तथा उसाह बना रहता ह।

साक्षाकार के बाद कइ बातें आचरण, यवहार, सहयोगियों से काम ले सकना आदि के सबध में सथान के धान से विचार विमश करना होता ह इसमें नियाेा को उनके उार की तीक्षा नहीं करनी पडती, वे तकाल सपक कर धानाचाय से जानकारी ा कर लेते ह, वे उनसे मिलकर निणय पर पहच जाते है।

इस साक्षाकार से आशाथियों को भी सुविधा रहती ह। न तो आवेदन करना, न इटरयू के लिये बुलाने का इतजार, न परिणाम की तीक्षा आदि सब झझटों से आशार्थी बचे रहते ह। जिसका चयन किया गया ह केवल उसीसे आवेदन प भरवा लिया जाता ह। आशार्थी को नियाेा के थान तक नहीं जाना पडता, इससे वे यय भार से भी बच जाते ह। आशार्थी को भी जो कुछ पूछताछ करनी हो, सदेह निवारण करना हो, बिना किसी भय या सकोच के तकाल हो जाता ह, न प से पूछना, न तीक्षा करना, इससे वे मानसिक परेशानी से भी बचते ह।

आशार्थी किस सदभ में या पूछ रहा ह सभव उस अथ में उसे न ले, ऐसी थिति में भम होना वाभाविक ह। परिसर साक्षाकार में इन सब झझटों से छुटकारा मिल जाता है ।

पहले ऐसे साक्षाकार बिडला इटीटयूट आफ टेनोलाजी एड साइस (मानद विववािलय) पिलानी तथा इडियन इटीटयूट आफ मनेजमेंट, अहमदाबाद में ही आयोजित होते रहे थे। यदा कदा छोटे तर की नाकरियों के लिये मेयो कालेज, अजमेर में भी ऐसे साक्षाकार होना सुना जाता था। यदा कदा सेना में भर्ती के लिये भी नियाेा अधिकारी सथाआें में पहचकर यह काय सप करते रहे थे, लेकिन अब यह यवथा हर बडे शिक्षा सथान में ारभ हो गयी ह। इस तकनीक को भावी बनाने के लिये नियाेा

कभीकभी श्रय य सामगी का भी उपयोग करते ह, धधे से जुडी जिमेदारियों तथा दायिवों पर भाषण भी दिया जा सकता ह। जब नियाेा की ओर से भाषण दिया जा रहा हो या रोजगार सबधी फिम दिखाइ जा रही हो या दूसरे आशाथियों के नों के उार दिये जा रहे हों तो अय आशाथियों को सजग रहना चाहिए। जहा सदेह हो या कोइ न पूछना हो तो नोट कर लीजिये जिससे अपनी बारी आने पर निवारण किया जा सके या वततापूवक विचार विमश किया जा सके।

आप निणय कीजिये कि नियाेा ारा चाहे गये गुण, योयता तथा कुशलतायें आपमें ह या नहीं, तावित काम में आपकी चि ह या नहीं ? यदि आप अपने आपको इस से अनुपयु पाते ह तो भी आपको साक्षाकार देना चाहिए। इससे आपका ज्ञान तथा अनुभव बढेगा, आपके सोचने विचारने का क्षे वितत होगा जो आगे दिये जाने वाले साक्षाकार में सफलता के लिये मदद करेगा। इस विधि में भी कइ बार नियाेा समय बचाने के लिये आशाथियों से आवेदन प पूति करवा कर मगवा लेते ह तथा उपयु पाये गये कुछ ही आशाथियों से साक्षाकार कर वाछित माा में आशार्थी भर्ती कर लिये जाते ह।

परिसर साक्षाकार की परिसीमायें

समय बचाना, शीघ भर्ती आदि जसे गुण परिसर साक्षाकार के साथ जुडे हए ह। वहीं इसके विपरीत इसके साथ ही इस विधि की कुछ सीमायें भी गिनाइ जा सकती ह। परिसर साक्षाकार में जिस सथान में साक्षाकार होना ह, सभव ह, वहा का धान वचव वाला, दबग रोबदार, अपने सहकमियों पर एकछ शासन करने वाला अधिकारी हो, अपने अधीनथों की बात पर कोइ यान नहीं देता हो या सभी अधीनथ भी सथा धान की चाटुकारिता करने वाले ही हो तो वहा के वािथियों का यवि दमित हो सकता ह, उनमें आलोचनामक या विवेक समत राय देने या निणय लेने का वभाव विकसित न हआ हो तो सभव ह, सही एजीयूटिव या कमचारी, अधिकारी का चयन न हो पाया। कारण कि नियाेा को वहा उपलध आशाथियों में से ही चयन करना ह या यह भी सभव ह कि सथा धान किसी अपने यि पर पद के लिये अयोयअनुपयु वािर्थी के चयन के लिये दबाव डाले।

कभी किसी अययनरत वािर्थी का चयन कर लिया तथा किहीं अयाशित कारणों से वह वािर्थी परीक्षा पास न कर सका या परीक्षा में ही न बठ सका या सफलता का अपेक्षित तर बनाये न रख सका तो नियाेा को भर्ती के लिये आर तरीका ढूढना होगा या पूरी किया फिर से दोहरानी होगी। इससे भी नियाेा का समय तो जायेगा तथा समय पर कमचारी/अधिकारी उपलध नहीं होगा।

पतिति समाचार पों में विज्ञापन देने से नियाेाआें को असय आशाथियों के आवेदन प मिल जाते ह। निचय ही उनमें से सवश्रे आशार्थी का चयन किया जाता ह, नियाेा के सामने अनगिनत अवसर तथा आशार्थी ह। निचयपूवक नहीं कहा जा सकता कि सभी तिभा सप वािर्थी किसी एक ही सथान में पढते होंगे। कइ सावधानियों के साथ, इस तकनीक की सीमाआें का यान रखते हए, इस विधि का योग किया जा सकता। भारत जसे देश में इसकी विपुल सभावनाए ह।

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