कोपेनहेगन समझाते से भारत की सभुता पर असर नहीं
नइ दीली जलवायु परिवतन पर कोपेनहेगेन समेलन में भारत के िहतों से समझाता करने के विपक्ष के आरोपों के बीच सरकार ने पूव के आवासन से भटकने की बात वीकारी, लेकिन कहा कि समेलन में पेश समझाता भारत की सभुता पर कोइ असर नहीं डालेगा। पयावरण मी जयराम रमेश ने रायसभा को समेलन के नतीजों से अवगत कराते हए वीकार किया कि एक पहलू को लेकर सरकार समेलन से पूव दिये गये अपने आवासन से कुछ भटकी आर वह है अतराटीय सलाहमशविरे एव विलेषण के ावधान की अनुमति दिया जाना। सरकार ने पूव में आवासन दिया था कि इस बारे में केवल समुदाय को सूचित ही किया जाएगा। सदन में धानमी डामनमोहन सिंह की माजूदगी के बीच रमेश ने कहा, ‘म माफी चाहता ह। म सूचना से सलाहमशविरे पर चला गया। हा, कुछ बदलावतो ह।’ बाद में सवाददाताओ से बातचीत में रमेश ने प किया कि उहोंने यह बात इसलिये कही, योंकि नेता तिपक्ष अण जेटली उनसे वकीलों की तरह जिरह कर रहे थे। विपक्ष ारा सरकार पर अपने आवासन से पलटने का आरोप लगाये जाने पर रमेश ने उ सदन में कहा, ‘म माफी चाहता ह। म सूचना से सलाहमशविरे पर चला गया। हा, कुछ बदलाव तो ह।’ सवाददाता समेलन में जब रमेश से उनकी ‘माफी’ के बारे में पूछा गया, तो उहोंने कहा, ‘जेटली देश के वरि वकील ह आर वह मुझसे रायसभा में वकीलों की तरह ही जिरह कर रहे थे। लिहाजा, मने भी आरोपियों की तरह जवाब दिया आर ‘आय लीडेड गिटी’ कहा।’ कोपेनहेगेन समेलन की तुलना शम अल शेख में भारतपाक सयु बयान से करते हए विपक्ष के नेता अण जेटली ने कहा कि सरकार तयों को बदलकर पेश करने की कोशिश कर रही ह। इस पर रमेश ने कहा कि भारत को लचीला ख अपनाना होगा, योंकि वय भारत तथा चीन, बाजील आर दक्षिण अफीका समेलन की विफलता के लिए जिमेदार नहीं बनना चाहते। उहोंने कहा कि अतराटीय सलाहमशविरे आर विलेषण की किया से भारत की सभुता पर असर नहीं पडेगा, योंकि इसके दिशानिर्देश अभी तय होने ह। ये प दिशानिर्देश ही तय करेंगे कि राीय सभुता का समान हो। भारत सुनिचित करेगा कि सलाहमशविरे की किया हतक्षेप करने वाली न हो। मशविरे आर विलेषण के ावधान को लेकर सदयों की आशकाआें पर रमेश ने कहा कि भारत के पास अतराीय मुा कोष आर डयूटीओ में इस तरह की चचाआें का दशकों का अनुभव ह आर सभुता का ास नहीं हआ ह। उहोंने कहा, ‘हमें सलाहमशविरा शद से डरना नहीं चाहिए, मशविरे के दिशानिर्देश १९४ देश तय करेंगे।’ पीकरण मागते हए भाजपा, माकपा आर भाकपा के सदयों ने कोपेनहेगेन समझाते को निराशाजनक बताते हए कहा कि यह योटो सधि आर बाली काययोजना में सेंध लगाने का यास ह। जेटली ने समझाते में उसजन कटाती के पीकिंग इयर आर सूचना देने के ावधान पर सवाल उठाते हए कहा कि इसके परिणाम अछे नहीं होंगे। माकपा के सीताराम येचुरी आर कयुनिट डीराजा ने भी समझाते में की गयी कुछ नइ यवथाऔ पर सवाल उठाये। उसजन कटाती के पीकिंग इयर के बारे में रमेश ने कहा कि समझाते में किसी वष विशेष का उलेख नहीं है उहोंने कहा कि उसजन कटाती का पीकिग इयर हालाकि २१वीं सदी में ही होना चाहिए।
इससे पहले अपनी ओर से दिये बयान में पयावरण मी ने कहा, ‘भारत, दक्षिण अफीका, बाजील, चीन आर अय विकासशील देश यह सुनिचित करने में पूरी तरह सफल रहे कि जलवायु परिवतन सबधी राीय फेमवक कवेशन के कायावयन को आगे बढने के सबध में बाली काययोजना की वाताआें की तिबता का उलघन न हो सके।’
उहोंने कहा, ‘निसदेह अनेक विकसित देश योटो को समात होना देखना चाहते ह, लेकिन हम इस तरह के यासों को कुछ समय तक के लिए टालने में समथ रहे।’ रायसभा में विपक्षी हमलों के बाद सरकार के ख को आर प करते हए रमेश ने बाद में सवाददाताआें से कहा कि यह करार भारत के लिये एक सफलता ह, योंकि हम निगरानी, समीक्षा, सयापन तथा आकलन जसे शद शामिल करने के अमेरिकी दबाव में नहीं आये आर न ही हमने कोइ बदिश मजूर की। रमेश ने साफ कर दिया कि कोपेनहेगन समझाते में अमेरिका जिन शदों के इतेमाल पर जोर दे रहा था, उसके विकप के तार पर करार के परा पाच में शामिल शद ‘परामश आर विलेषण’ से राीय सभुता के समक्ष कोइ खतरा उप नहीं होता।
उहोंने रेखाकित किया कि जलवायु परिवतन के असर से निपटने के लिये उठाये जाने वाले कदमों के मामले में अतराीय परामश आर विलेषण सुपरिभाषित दिशानिर्देश के अनुप होगा आर ये दिशानिर्देश अमेरिका या कोइ एक देश तय नहीं करेगा।रमेश ने उ सदन में कहा कि कोपनहेगन में वाताए सप नहीं हो सकी आर समेलन में इन वाताआें को जारी रखने आरा मसिको सिटी में दिसबर २०१० में होने वाली पक्षकारों की १६वीं काफेंस के दारान वष २०१० तक पूरा करने का निणय किया गया। उहोंने कहा कि कोपनहेगन समझाता वविक आर राटीय उसजन लय यथाशीघ करने में सहयोग करने की बात करता ह। तथापि समझाते में प प से इस बात को वीकार किया गया ह कि लय की समय सीमा विकासशील देशों में यादा होगी। पयावरण मी ने कहा, ‘समझाते में इस बात को यान में रखा गया ह कि सामाजिक आर आथिक विकास तथा गरीबी उमूलन विकासशील देशों की सवथम आर महवपूण ाथमिकताए ह। अत: यह समझाता विकासशील देशों के लिए लय ाति हेतु विशि वष निधारित करने की बात नहीं करता जो कि विकसित देशों के एजेंडे में हमेशा शामिल रहा ह।’ उहोंने कहा कि यह हमारे धानमी ारा दो वष पूव प की गयी भारत की उस थिति के अनुप ह, जिसमें कहा गया था कि हमारी ति य उसजन माा विकसित देशों की ति य उसजन की आसत माा से कभी भी अधिक नहीं रही ह।रमेश ने कहा, ‘कोपनहेगन समेलन का मुख निकष यह रहा कि यूएनएफसीसीसी (जलवायु परिवतन पर सयु रा ाप समझाता) के तहत वाता दो दिशा में जारी रहेगी जसा कि बाली रोडमप में तय किया गया ह। इनमें से एक कवेंशन के कायावयन को आगे बढाने हेतु दीघकालिक सहयोगामक कारवाइ से सबधित ह आर दूसरी योटो से सबधित ह।’ उहोंने कहा कि विकासशील देशों के उपशमन कियाकलापों को विकसित देशों ारा यूएनएफसीसीसी के तहत समथन किया जाना ह। विकासशील देशों के उपशमन काय इनकी आतरिक पतियों के अनुसार घरेलू मापन, रिपोटिग आर जाच के अधीन होंगे। इस कार के उपशमन कायो’ की रिपोट जो समथित आर असमथित होगी, सचिवालय को राीय सचार के मायम से दी जायेगी। इसे येक दो वष में दिया जायेगा।
