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आरक्षण विधेयक (क हंगामे ने लगाया ब्रेक

Swatantra Vaartha  Tue, 9 Mar 2010, IST

reservation parliments breakआरक्षण विधेयक (क हंगामे ने लगाया ब्रेक

नई दिल्ली। कांग्रेस की लाख कोशिशों के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाआें को आरक्षण का तोहफा नहीं मिल सका। समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, बहुजन समाज पार्टी और जनता दल (यू) के महिला आरक्षण विधेयक के मौजूदा स्वरूप का प्रबल विरोध किये जाने पर इस विधेयक को आज राज्यसभा की मंजूरी नहीं मिली। राज्यसभा में विधि एवं न्यायमंत्री वीरप्पा मोइली ने हालांकि विधेयक को रखते हुये चर्चा कराने की पेशकश की, पर सपा, राजद, बसपा और जदयू ने संसद के दोनों सदनों में जबरदस्त हंगामा किया, जो संभवतः संसदीय इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ होगा। राज्यसभा में विधेयक विरोधियों ने सभापति हामिद अंसारी की मेज पर रखा कलमदान फेंक दिया और उनसे विधेयक की प्रति छीनने की कोशिश की। इसके बाद उन्होंने विधेयक की प्रतियां फ़ाडीं और प्रधान महासचिव की मेज पर लगा स्पीकर त़ोड दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिये मार्शल बुलाये गये।

लोकसभा में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव विधेयक विरोधी सांसदों की अगुवाई कर रहे थे। दोनों सदनों में आज कोई कामकाज नहीं हुआ और लोकसभा की कार्यवाही चार बार व राज्यसभा की कार्यवाही छह बार स्थगित करनी प़डी। राज्यसभा में विधेयक पर शाम छह बजे मतदान होना था और भाजपा व वामदलों के विधेयक को समर्थन देने की घोषणा करने से सरकार आश्वस्त थी कि विधेयक पारित हो जायेगा, पर इन दोनों दलों ने भी पलटी खाते हुए सरकार पर पहले चर्चा कराने का दवाब डाला। प्रधानमंत्री डॉमनमोहन सिंह से भी विभिन्न दलों के नेताआें ने मिलकर विधेयक पर चर्चा कराने की मांग की। समाजवादी पार्टी ने संसद के दोनों सदनों में और बाहर जंतरमंतर पर प्रदर्शन कर महिला आरक्षण विधेयक का जबरदस्त विरोध किया। राष्ट्रीय जनता दल भी इस विरोध में पीछे नहीं रहा। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने तो सदन को यहां तक धमकी दे डाली कि अगर यह विधेयक मौजूदा स्वरूप में संसद में पारित हुआ, तो वह सरकार से समर्थन वापस ले लेंगे। कांग्रेस ने विधेयक को लेकर राज्यसभा में विधेयक की प्रतियां फ़ाडे जाने तथा सभापति हामिद अंसारी की मेज पर त़ोडफ़ोड किये जाने की निन्दा करते हुये कहा कि इस तरह के अ़डंगों से अब यह कदम रुकने वाला नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि विधेयक पारित होने में थ़ोडा समय भले ही लग जाये, लेकिन अब यह सपना साकार होने ही वाला है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक विधेयक को पारित कर जहां आज का दिन हमारे संसदीय इतिहास का गर्व का दिन बन सकता था, जिसे कुछ मुट्ठी भर लोगों ने शर्म का दिन बना दिया। सिंघवी ने दावा किया कि सपाराजद के समर्थन वापस लेने पर भी मनमोहन सरकार पर कोई असर प़डने वाला नहीं है, क्योंकि सरकार उनके समर्थन पर नहीं टिकी है। उन्होंने कहा कि यदि हम उनके समर्थन पर निर्भर होते, तो भी इतने ब़डे जनहित का यह कदम उठाने से नहीं झिझकते।

भाजपा, वामदलों और तेलुगु देशम पार्टी ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि वह राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर मतदान से पूर्व चर्चा कराये।

इन दलों के नेताआें ने संसद परिसर में प्रधानमंत्री से आधा घंटा बातचीत की। बाद में माकपा महासचिव और राज्यसभा सदस्य सीताराम येचुरी और माकपा के लोकसभा सांसद गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि वे राज्यसभा में अनुचित रवैया अपनाने वाले सदस्यों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के पक्ष में हैं और चाहते हैं कि यह संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने में सभी संसदीय प्रक्रियाआें का पालन हो। राज्यसभा में आज कार्यवाही समाप्त हो जाने के बाद विधि एवं कानून मंत्री वीरप्पा मोइली और सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि यह विधेयक कल के एजेंडे में भी है और सरकार इसे सदन की मंजूरी दिलाने की कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार बहुमत के बल पर इस संविधान संशोधन विधेयक को पारित नहीं कराना चाहती है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने विधेयक को पारित नहीं किये जाने पर सरकार की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि फिलहाल यह टल ही गया है।

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