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अब सबके िनशाने पर िचदबरम

swatanvartha  Tue, 5 Jan 2010, IST

अब सबके िनशाने पर िचदबरम

तेलगाना के मामले में केीय गहमी िचदबरम साहब अब आध देश के राजनीतिक नेताआें के सीधे निशाने पर ह। कागेस हाइकमान ने भी अपने को पर्दे के पीछे रखकर चिदबरम को मोर्चे पर खडा कर िदया । विडबना यह ह कि वह मामले को जितना ही सुलझाने का यास कर रहे ह, उतना ही वह उलझता जा रहा ह। तेलगाना रा समिति के अयक्ष के चशेखर राव के अनशन से उप िथति को काबू में लाने के लिए उहोंने पथक तेलगाना राय के निमाण की किया शु किये जाने की घोषणा कर दी। यपि उनका कहना था कि यह निणय कोइ उनका नहीं था, यह तो कागेस पार्टी व सरकार का सर्वो तर पर लिया गया निणय था, उहोने तो केवल उसकी घोषणा की, लेकिन यह कहकर वह अपनी जान नहीं बचा सके। इसकी तिकिया आध देश में भडके वाेिह को शात करने के लिए फिर उहें ही दूसरी घोषणा के लिए तनात किया गया। इस बार उहोंने कहा कि चूकि पिछली घोषणा के बाद से राय की राजनीतिक थिति बदल गइ ह, इसलिए अब नये सिरे से यापक विचारविमश की जरत ह। इस विचारविमश के बाद होने वाली सामूहिक सहमति के आधार पर अगला कदम उठाया जाएगा। इस पर फिर तेलगाना भडक उठा। इस घोषणा के वि तेलगाना क्षे के कागेस सहित सभी दलों के विधायकों, सासदों के साथ राय के मयाेिं ने भी सामूहिक इतीफा दे दिया। अब इस थिति से निपटने के लिए फिर चिदबरम साहब सामने आए आर उहोंने राय के सभी मुख ८ राजनीतिक दलों के तिनिधियों की दीि में बठक आहत की। अब लगता ह कि यह बठक सघष का नया अखाडा बनेगी। विपक्षी दल इस बठक में सहमति का कोइ फामूला ढूढने के बजाए कागेस को आडे हाथों लेने की तयारी में अधिक लगे ह। वय कागेस के लोग भारी ऊहापोह में ह। हाइकमान की धमकी के बाद तेलगाना क्षे के १३ में से १२ मयाेिं ने अपना इतीफा वापस जर ले लिया ह, लेकिन वे यह दबाव अभी भी बनाए हए ह कि के सरकार पथक तेलगाना राय के निमाण का एक बार निचय करके फिर अपना कदम पीछे न हटाए।

थिति दिनोदिन आर बिगडती जा रही ह। के सरकार ने पार्टी में अनुशासन कायम करने के लिए जो कठोरता बरतनी शु की उसकी आर तीव तिकिया हो रही ह। राय का ाय: हर राजनेता इस थिति के लिए चिदबरम को ही जिमेदार ठहरा रहा ह। राय के वफ मामलों के मी जीवेंकट रेडडी ने तो साफ कहा ह कि वह कान होते ह तेलगाना के बारे में निणय लेने वाले। गहमी का काम कानून आर यवथा की देखरेख करना ह, तो वह उसे देखे। राय सरकार यदि उसमें नाकाम होती ह, तो आर जो कदम आवयक हो उसे उठाए। उहें राय के विभाजन जसे अयत गभीर मामले में इस तरह का निणय लेने का अधिकार कहा से मिल गया। राय के दो मुख विपक्षी दलों तेलुगु देशम तथा जा रायम का तो सीधा आरोप ह कि चिदबरम तेलगाना मामले की आग को केवल आर भडकाने का काम कम रहे ह। भाजपा का भी आरोप ह कि गहमी अपने बयानों से नाहक एक भम की थिति पदा कर रहे ह। तेदेपा के विधायकों का तो यहा तक आरोप ह कि चिदबरम आध के ति इया रखते ह, इसलिए इसे तोडना चाहते ह। उनका हर बयान राय को आर गहरे सकट में धकेल रहा ह।

अब इस थिति को देखते हए यही कहा जा सकता ह कि ५ जनवरी को दीि की बठक में सहमति के बजाए असहमति का झडा ही अधिक बुलद रहेगी आर निशाने पर रहेंगे गहमी चिदबरम। केवल आध देश ही नहीं, ाय: पूरा देश इस बठक पर अपनी नजर गडाए ह। गहमी अपने ही बनाए दलदल से कसे निकल पाते ह, यह देखना भी अपने आप में एक अनोखा अनुभव होगा।

यमन : िजहािदयों का दूसरा बडा अखाडा

अरब ायीप का तटवर्ती देश यमन, जिहादियों का नया अखाडा बन रहा ह। यह खबर मिलते ही कि अमेरिका, यमन थिति अलकायदा के अडडों पर हमला कर सकता ह। कइ अय देशों के शिक्षित जिहादी वहा पहचने की तयारी करने लगे ह। इनमें सोमालिया, नाइजीरिया तथा सूडान के जिहादी सबसे आगे ह। वातव में अफगानितान में यूरोपीय व अमेरिकी फाजों का बढता दबाव देखकर अलकायदा ने पहले ही अपने अफीकी अडडों को मजबूत करना शु कर दिया था। यमन यों खाडी क्षे में पडता ह तथा एशिया का भाग ह, फिर भी इसकी घनिता अफीकी इलामी देशों से अधिक ह। उसका निकट पडोसी सऊदी अरबिया यपि जिहादी सगठनों का सबसे बडा सहायक ह, लेकिन अलकायदा को अपना शु मानता ह। योंकि अलकायदा के सथापक ओसामा बिन लादेन सऊदी अरबिया के शाह का तता पलटने की कोशिश की थी। यमन, लादेन के पूवजों का गह देश ह, इसलिए वहा उनकी अछी पठ ह। सऊदी अरबिया की तरह यमन की सरकार भी अमेरिकी भाव में ह, इसलिए वह अलकायदा के अडडों पर हमले के लिए योजना बनाने में वह अमेरिका की मदद कर रही ह। यमनी जिहादी भी अमेरिका का मुकाबला करने की तयारी में लग गये ह। खबर ह कि उनकी मदद के लिए सोमालिया के जिहादी जथों का आना शु हो गया ह।

सोमालिया के कटटरपथी शेहाब वाेिहियों का कहना ह कि यमनी सरकार की सेनाआें का मुकाबला करने में उनका सगठन अपने जिहादी भाइयों की पूरी मदद करेगा। शेहाब मिलिसिया के एक वरि अधिकारी शेख मुतार रोबो अबू मसूर ने गत शुकवार की नमाज के बाद मोगादिसू के उार में थित अपने गढ में नव शिक्षित लडाकों को आह के दुमनों के खिलाफ यु में उतारने की घोषणा करते हए कहा कि इस यु में हम पीछे नहीं रहेंगे। उहोंने वहा उपथित जिहादियों को सबोधित करते हए कहा कि आज आप देख रहे ह यमन में या हो रहा ह। आह के दुमन आपके भाइयों को तबाह कर रहे ह। म अरबितान के सारे युवाआें को आहवान करता ह कि वे इस यु मे भाग लें। यमनी सरकार की सेना अलकायदा के लडाकों पर हमला कर रही ह, जिसमें गत माह ६० से अधिक इलामी लडाके मारे गये।

सोमालिया की हालात भी कमोबेस अफगानितान व यमन जसी ह। यहा के जिहादी सगठनों ने देश के बडे हिसे में अपना अधिकार जमा रखा ह आर सरकारी तथा अफीकी यूनियन की सेना को नाको चने चबा रखा ह। सोमालिया की कमजोर सरकार अमेरिका तथा अफीकी यूनियन की मदद के बावजूद जिहादियों पर काबू नहीं कर पा रही ।

वातव में खाडी के अरब देशों की अजीब थिति ह। यहा की ाय: सभी सरकारें अमेरिका समथक ह, कितु जनता अमेरिका विरोधी। जहा तक इलाम की बात ह, तो इन इलामी देशों की सरकारें भी उतनी ही कटटरपथी ह, जितनी की आम जनता। फिर भी वे अमेरिका की समथक केवल इसलिए ह कि उनकी सरकारें अमेरिका की बदालत ही टिकी हइ ह। यदि अमेरिकी छछाया उनके सिर से उठ जाए तो जिहादी एक दिन में उनका तता पलट दें। तो एक तरफ तो वे इलामी जनता को सतु रखने के लिए जिहादी सगठनों की आथिक सहायता भी करती रहती ह, तो दूसरी तरफ अपनी सरकार बचाए रखने के लिए अमेरिका का भी साथ देती रहती ।

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