कांग्रेस अध्यक्ष पद देश के प्रति ब़डी जिम्मेदारी : सोनिया
नई दिल्ली। लगातार चौथी बार कांग्रेस अध्यक्ष बनीं श्रीमती सोनिया गांधी ने पार्टी जनों से देश के हर कोने, हर वर्ग और हर प़ीढी की भावनाआेऔर आकांक्षाआेका पूरा ख्याल रखने को कहा है। श्रीमती गांधी ने आज पुन: अध्यक्ष निर्वाचित घोषित होने के बाद कांग्रेस मुख्यालय में पार्टीजनों को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस देश के हर कोने, समाज के हर वर्ग और हर प़ीढी की इच्छाआें, भावनाआें और आकांक्षाआें का प्रतीक रही है। हम सत्ता में रहें या सत्ता से बाहर, हमें अपनी ब़डी भूमिका का अहसास रहना चाहिये। उन्होंने कांग्रेस को महान और ऐतिहासिक संगठन बताते हुए कहा कि इसके अध्यक्ष पद के कर्तव्य का निर्वहन करते हुए उन्होंने देश और समाज के प्रति जो भी योगदान दिया, वह इसी अहसास की वजह से मुमकिन हुआ है। अध्यक्ष रहते उन्हें यह भी महसूस हुआ कि यह पद देश के प्रति बहुत ब़डी जिम्मेदारी है।
श्रीमती गांधी ने एक बार फिर उन्हें सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुनने के लिये देशभर के कांग्रेसजनों के प्रति आभार जताया और संकल्प लिया कि सब मिलकर अपने महान संगठन का झंडा हमेशा बुलंद रखेंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले चुनाव की तरह इस बार भी अध्यक्ष पद के लिये श्रीमती गांधी के खिलाफ कोई भी प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतरा। इससे पहले पार्टी के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के प्रमुख आस्कर फर्नांडीज ने श्रीमती गांधी को अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया तथा उन्हें प्रमाणपत्र सौंपा। मंच पर मौजूद प्रधानमंत्री डॉमनमोहन सिंह ने उन्हें गुलदस्ता भेंट कर बधाई दी। कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा ने पार्टी की ओर से श्रीमती गांधी को बधाई दी। समारोह से ठीक पहले हुई भारी बरसात के बावजूद ब़डी संख्या में पार्टी के नेता और कार्यकर्ता इस अवसर पर मौजूद थे। इनमें कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य, केंद्रीय मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और सांसद शामिल थे। इस मौके पर कार्यकर्ताआें ने पार्टी मुख्यालय और श्रीमती गांधी के निवास के बाहर पटाखे छ़ोडे और आतिशबाजी की।
तिरसठ वर्षीय श्रीमती गांधी १९९८ से लगातार पार्टी की अध्यक्ष बनी हुई हैं। वह १२५ वर्ष पुरानी पार्टी के अध्यक्ष पद पर सबसे लंबे समय तक रहने का रिकार्ड पहले ही बना चुकी हैं। एक बार को छ़ोडकर श्रीमती गांधी हर बार निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गयी हैं। अध्यक्ष पद के चुनाव में श्रीमती गांधी को एक बार जितेंद्र प्रसाद ने चुनौती दी थी, लेकिन उन्हें भारी पराजय का सामना करना प़डा था।
एक समय राजनीति में आने की अनिच्छुक रहीं श्रीमती गांधी ने पार्टी की कमान संभालने के बाद उसमें नई जान फूंकी तथा उसे फिर से सत्ता में पहुंचाया। उन्होंने द्गएकला चलोद्ध की नीति से हटते हुए पार्टी को गठबंधन की राजनीति से ज़ोडा, जिसके चलते कांग्रेस लंबे समय बाद वर्ष २००४ में केंद्र में फिर से सत्ता में आयी। उस समय श्रीमती गांधी ने प्रधानमंत्री का पद ठुकराकर एक नई मिसाल कायम की। उन्होंने पार्टी को गरीबों और आम आदमी के साथ ज़ोडा और पार्टी का जनाधार ब़ढाने का महत्वपूर्ण काम किया। उनके प्रयासों से वर्ष २००९ के आम चुनाव में पार्टी ने पहले से अधिक सीटें जीतीं तथा सत्ताऱूढ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) में अपनी पक़ड और मजबूत की। इस बार अध्यक्ष पद के चुनाव में नामांकन पत्र भरने के अंतिम दिन कल श्रीमती गांधी के पक्ष में ५६ नामांकन पत्र दाखिल किये गये थे, जिनमें से एक अवैध करार दिया गया। अध्यक्ष पद के लिये श्रीमती गांधी के नाम का प्रस्ताव करने वालों में प्रधानमंत्री डॉमनमोहन सिंह, वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, पार्टी महासचिव राहुल गांधी और कई राज्यों के मुख्यमंत्री तथा अन्य प्रमुख नेता शामिल थे।
