जाति आधारित जनगणना को केंद्र की हरी झंडी
नई दिल्ली। अनेक राजनीतिक दलों की मांग पर सरकार आज जाति आधारित जनगणना कराने पर राजी हो गई। यह प्रक्रिया अगले साल से शुरू होगी। प्रधानमंत्री डॉमनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में जाति आधारित जनगणना कराने को मंजूरी दी गई।
गृह मंत्री पीचिदंबरम ने इस फैसले की जानकारी देते हुए संवाददाताआें को बताया कि जाति आधारित जनगणना वर्तमान में चल रही सामान्य जनगणना की प्रक्रिया से स्वतंत्र होगी, जो अगले साल जून से शुरू होकर सितंबर तक चलेगी। चिदंबरम ने उम्मीद जताई कि कैबिनेट के इस फैसले से सभी पक्ष संतुष्ट होंगे। गौरतलब है कि सपा, बसपा, और जदयू जाति आधारित जनगणना के लिए सरकार पर दबाव बनाए हुए थे। उधर, मुख्य सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भाजपा में इस बारे में नेताआें के बीच एकराय नहीं थी। उन्होंने बताया कि सरकार के इस फैसले से सामान्य जनगणना और बायोमीट्रिक प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। चिदंबरम ने कहा कि आबादी की गणना के बाद जाति आधारित जनगणना चरणबद्ध ढंग से संचालित होगी। यह प्रक्रिया अगले साल मार्च तक पूरी कर ली जाएगी। इससे पहले जाति आधारित जनगणना, १९३१ में हुई थी। आजादी के बाद इस तरह की जनगणना नहीं कराने का नीतिगत फैसला लिया गया था। यह पूछने पर कि क्या जाति आधारित जनगणना को आबादी की गणना के साथ मिला दिया जाएगा, उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इस मुद्दे पर गठित मंत्रिसमूह के सुझावों पर विचार के बाद यह फैसला किया गया। इस बारे में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताआें से भी सलाहमशविरा किया। जाति आधारित जनगणना की मांग कर रहे राजनीतिक दलों के संदर्भ में गृह मंत्री ने कहा, ‘हर नजरिये को शामिल किया गया है और समयसारिणी तैयार की गयी है। हमें उम्मीद है कि यह संतोषजनक व्यवस्था होगी।’ राजद, सपा और जदयू जैसी पार्टियों ने इस मुद्दे पर संसद के बजट सत्र और मानसून सत्र के दौरान कार्यवाही बाधित की थी। ये पार्टियां जाति आधारित जनगणना की मांग कर रही थीं।
मुखर्जी ने हाल ही में लोकसभा को बताया था कि सभी राजनीतिक दलों ने जनगणना में जाति को शामिल करने के मुद्दे पर सहमति दे दी है और अब इस मुद्दे पर कोई आशंका पालने की आवश्यकता नहीं है। चिदंबरम ने कहा कि जाति आधारित आंक़डे एकत्र करने के लिए कानून मंत्रालय के साथ सलाहमशविरा कर एक उचित कानूनी ढांचा तैयार किया जाएगा। इस प्रक्रिया में अतिरिक्त लागत आएगी, जिसका आकलन अलग बैठक में किया जाएगा। भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त जाति आधारित जनगणना का कामकाज देखेंगे। केंद्र सरकार एक विशेषज्ञ समूह का गठन करेगी। महापंजीयक और जनगणना आयुक्त जाति और जनजातियों का ब्यौरा विशेषज्ञ समूह को सौंपेंगे। एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के अलावा २०११ की जनगणना में जाति को भी शामिल करने की संसद के भीतर और बाहर उठी मांग के आलोक में गृह मंत्रालय ने मई, २०१० में केंद्रीय मंत्रिमंडल को इस संबंध में एक नोट सौंपा था।
