तेलंगाना मुद्दे पर गठित समिति व्यर्थ व दिशाहीन नहीं : श्रीकृष्णा
हैदराबाद। पृथक तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर परामर्श के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित श्रीकृष्णा समिति के चेयरमैन न्यायमूर्ति बीएन श्रीकृष्णा ने आज कहा कि समिति उसके हवाले किये गये मुद्दों पर केंद्र सरकार को उचित दिशा दिखाएगी।
बीएनश्रीकृष्णा आज यहां मीडिया को संबोधित कर रहे थे। कुछ राजनीतिक दलों द्वारा की गयी इस टिप्पणी कि समिति व्यर्थ और दिशाहीन है, पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति ने तेलुगु भाषा में कहा, ‘मा कमिटी पनिकीमालीनदी कादु दिशा लेनिदी कादु।
इदी केंद्र प्रभुत्वानिकी दिशानु चुपिस्तुंदी’ (समिति व्यर्थ तथा दिशाहीन नहीं है, इसके पास स्पष्ट दिशा है और यह केंद्र को उचित दिशा दिखायेगी)।’समिति के सदस्य सचिव वीके दुग्गल ने कहा कि उनके द्वारा प्राप्त १२ लाख ज्ञापनों में से ३,००० का विश्लेषण किया गया है। तेलुगु तथा उर्दू में दिये गये ज्ञापनों का अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है। समिति ने बातचीत, फील्ड दौरे, ज्ञापन प्राप्त करना तथा प्रदेश में व्याप्त स्थिति के अध्ययन के लिए तकनीकी मुद्दों की जांच करने जैसी चार स्तरीय रणनीति अपनायी है। समिति ने ३०० चर्चा सभाआें का आयोजन भी किया था और विभिन्न वगा] के एक हजार लोगों से चर्चा की थी। उन्होंने बताया कि फील्ड दौरों का काम ९० से ९५ प्रतिशत तक पूरा हो चुका है और दो अन्य जिलों के दौरे भी शीघ्र ही पूरे कर लिये जायेंगे।
उन्होंने बताया कि विद्युत क्षेत्र में उच्च तकनीकी मुद्दों, रोजगार, सिंचाई, हैदराबाद का विकास तथा प्रदेश पर प़डे इसके प्रभाव के अध्ययन के लिये चार विशेषज्ञों की नियुक्ति की गयी है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये विशेषज्ञ भी अपनी रिपोर्ट इस माह के अंत तक उन्हें सौंप देंगे। उन्होंने बताया कि आगामी तीन महीनों में इन सभी को ज़ोडते हुए निर्धारित समय से पहले समिति केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंप देगी। दुग्गल ने बताया कि समिति के लिए दिसंबर, २०१० तक रिपोर्ट सौंप देना अनिवार्य है। कामकाज की शता] (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) को ध्यान में रखते हुए समिति केंद्र सरकार को इस मुद्दे का सबसे उचित हल सुझायेगी। उन्होंने कहा, ‘मैंने यह कभी नहीं कहा कि समिति (मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार) कई विकल्प सुझायेगी। उन्होंने कहा कि समिति के सदस्यों के ६० प्रतिशत वक्तव्यों के आधार पर ही मीडिया खबरें बनाता है, जबकि ४० प्रतिशत छ़ोड देता है।
उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश की पूरी जनता समिति की रिपोर्ट को सर्वाधिक विश्वसनीय दस्तावेज के रूप में पायेगी। उन्होंने कहा कि वे प्रदेश के हर नागरिक के हितों तथा राष्ट्रीय भविष्य को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ग इसका विरोध कर सकते हैं और सरकार को इससे जनित स्थिति से निपटना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करेगी और यह अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को वर्ष खत्म होने के पूर्व ही सौंप देगी। दुग्गल ने कहा कि समिति सभी पहलुआें पर गौर करेगी। समिति ने तेलंगाना क्षेत्र में हुए उपचुनाव तथा हाल ही में आयोजित ग्रुप१ परीक्षा के विरोध को भी संज्ञान में लिया है। इसी प्रकार किसी व्यक्ति द्वारा मांग करने पर समिति हैदराबाद को केंद्र शासित राज्य का दर्जा देने के नजरिये पर भी गौर करेगी। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में मीडिया के साथ अंतिम बैठ
