लाखों लोगों ने िकया सूर्यग्रहण का दीदार
धनुषकोडी (तिमलनाडु))। सहादी का सबसे लबा वलयाकार सूयगहण आज जसे ही शुरु हआ, यहा आर भारत के दक्िषणी छोर के अय हिसों में दोपहर बाद गोधूिल जसा समय हो गया आर आकाश में आग के सुनहरे छले का नजारा िदखा।
शेष भारत में आशिक सूयगहण दिखा। रामेवरम आर कयाकुमारी के सागर में तथा गगा आर अय नदियों में लोगों ने सूयगहण के बुरे भावों के दूर होने की मायता के साथ पवि नान किया।
भारत के दक्षिणी छोर के कइ हिसों में सूयगहण पूवा सवा ११ बजे करीब शु हआ आर शाम तीन बजे समात हो गया। सूयगहण जब चरम पर था, तो लोगों को करीब १० मिनट आठ सेकेंड तक आग के छले का दीदार हआ। यह अदभुत दशनीय नजारा था, जब सूय की आभा चाद से ढक गयी आर १० मिनट से अधिक समय तक आग का छला आसमान में दिखा। इतनी लबी अवधि का सूयगहण अब ३०१४ में दिखेगा।एमपीताराघर के बीदासगुता ने कहा, ‘यह अधकार से कम आर गोधूलि से कुछ अधिक जसा था।’ दासगुता यहा खगोलविज्ञानियों के दल का नेतव करने आये थे। इस कार का सूयगहण २०१९ में भी दिखने की सभावना ह, लेकिन इसकी अवधि इतनी लबी नहीं होगी।
छलेदार सूयगहण के दारान सूय बहत चमकीले छले के प में तीत होता ह। देखने में यह आग के छले के जसा लगता ह। केरल के पास थित वकला शहर में खगोलविदों के एक दल ने तीन दूरबीनों का उपयोग करते हए इस खगोलीय घटना की तवीरें ली। वज्ञानिक काेिण के बावजूद लोगों ने पुरातनपथी विवासों को छोडा नहीं। अधविवास के कारण देश में कइ मुख मदिरों के कपाट बद रहे आर सूयगहण के बाद लोगों ने अपने पाप धोने के विवास के साथ लाखों की सया में नदियों में पारपरिक नान किया। जसेजसे चाद ने सूय को ढकना शु किया, खगोल विज्ञानियों ने वकला में सूयगहण के दारान एक दुलभ नजारे की तवीर उतारने का यास किया, जिसे ‘बेली का मनका’ कहते ह। जहा इस दुलभ घटना का दक्षिणी केरल के लोगों ने अछी तरह लुफ उठाया, विकम साराभाइ अतरिक्ष कें थित वज्ञानिकों ने आकडे एक करने के लिए थुबा से सिलसिलेवार कइ राकेट क्षेपित किये। इस अभियान के तहत थुबा आर श्रीहरिकोटा से सूयगहण के अययन के लिए ना अनुसधान राकेटों का क्षेपण किया गया।
दोपहर में घटित आज की यह घटना अपने आप में दुलभ ह, योंकि इस समय सार विकिरण अधिकतम था। थुबा से जिस नजारे का दीदार हआ, उसमें सूय ९१ फीसदी ढक गया था। वहीं श्रीहरिकोटा से ८५ फीसदी ढका हआ सूय का दीदार हआ।
अधिकारियों ने कहा कि आज की खगोलीय घटना में ऐतिहासिक १० मिनट आठ सेकेंड तक सूय ढका रहा आर पहली बार सूयगहण का भाव विषुवतीय क्षे में दोपहर में पडा। कयाकुमारी में इडियन इटीटयूट आफ एटोफिजिस (आइआइए) के छह वज्ञानिकों के एक दल ने सूयगहण को देखा आर अययन किया।
दीि आर उार भारत के अधिकतर हिसों में आशिक सूयगहण देखने को मिला। बदली छाये रहने के कारण इस आकाशीय नजारे को देखने के इछुक लोगों को निराशा हाथ लगी। सूयगहण जब अपने चरम पर था, तो दोपहर १५३ बजे काजू के आकार का सूय आकाश में देखने को मिला।
हरािर में कल से तीन महीने तक चलने वाला महाकुभ शु हआ आर श्रालुआें ने सूयगहण के बुरे भावों को दूर करने के लिए साधना की। जसे ही सूयगहण समात हआ, नान घाटों पर लोगों ने नान किया।
हरियाणा के कुक्षे में बडी सया में श्रालुआें ने ब सरोवर आर सहिित सरोवर में पवि नान किया। कोलकाता में केवल आशिक सूयगहण का दीदार हआ आर वह भी करीब दो मिनट के लिए। पोजिशनल एटोनोमी सेंटर के निदेशक एससेन ने सवाददाताआें से कहा, ‘चाद से सूय ६७ फीसदी ढका हआ था आर १५७ मिनट के लिए सूयगहण दिखा, जसे ही सूय की किरणें मद हइ, तापमान भी गिर गया।’ तमिलनाडु में हजारों लोगों ने आज इस दुलभ खगोलीय घटना का दीदार किया। देश के दक्षिणी छोर में थित कयाकुमारी आर धनुषकोडी में भरी दोपहरी में गोधूलि की बेला हो गयी। जब चाद ने सूय को ढक लिया, तो यहा आग के छले का नजारा हो गया। ११० वषा] के बाद हए इस सहादि के सबसे लबे सूयगहण के अययन के लिए देश के विभि भागों से वज्ञानिक सुमदाय इन दोनों थानों पर आज जुटे थे। बिहार के कइ भागों में ढके बादलों आर कोहरे भरे मासम के बीच केवल आशिक सूयगहण का नजारा देखने को मिला। राय में आशिक सूयगहण दोपहर १२०७ शु हआ आर अपरा ३२९ बजे समात हआ। राजधानी पटना में हजारों खगोलेमी विज्ञान कें में इस खगोलीय घटना को देखने के लिए जुटे थे। लोगों को अपनी इमारतों आर अपाटमेंट की छतों पर चढकर सूयगहण का दीदार करते देखा गया।
कोलकाता में आसमान साफ रहा आर ७६ फीसदी ढका हआ सूय देखा गया। यह आशिक सूयगहण दोपहर १२०७ बजे शु हआ आर अपरा ३२९ बजे समात हआ। यहा आशिक सूयगहण देखने के लिए लोगों ने अपनेअपने तरीके से साधन बनाये थे। उसाही लोगों में किसी के पास वेडर चमे, किसी के पास माइलर फिटर थे। ने विशेषज्ञों ने इस सूयगहण को नगी आखों या एसरे फिम से देखने की मनाही कर रखी थी।
