डाटरों पर अनकुश
बडे अपतालों के भी कइ डाटर कपनियों के लोभन में एक मरीज पर कइ दवाओंसे इलाज करते है । इसके लिए कुछ डाटर तो अपताल शासन को भी गुमराह करते है । पर अब भारतीय चिकिसा परिषद ने एक नइ आचार सहिता बनाकर दवा कपनियों के पसे पर डाटरों के ऐश करने पर रोक लगा दी है । दवाओं के असर पर निजी अययन में भाग लेना या उनका समथन करना अथवा फिर किसी तरह की सेवाआ को सवीकार करना अब डाटरों के लिए मुकिल होगा।
कुछ हते पहले दवा कपनियों ने डाटरों को महगे तोहफे देने के मामले मे एक आचार सहिता बनायी थी। पर इस सहिता में डाटरों को रिवत देकर दवाइया लिखवाने की अनतिक कारगुजारी को लेकर साफ ख लेने से बचा गया था। साथ ही इसके ावधानो की कोइ बायता नहीं थी। भारत में दवा निमाताआें के छह सघ काम करते है । उनमें से दो सघों ने इस सहिता से सहमति जाहिर नहीं की। छोटी आर मझोली कपनियों के सघ की इस माग में दम ह कि उघन करने वाली कपनियों पर कानूनी कारवाइ के साफ ावधान के बिना सूरत बदलने वाली नही है ।
पिछले साल की शुआत में सरकार ने दवा कपनियों के सघ से वय एक आचार सहिता बनाने आर उसे कडाइ से लागू करने को कहा था। सरकार ने चेतावनी दी थी कि अगर ऐसी कोइ सहिता लागू नहीं हो पाती ह, तो वह कानून बनाने के लिए बाय होगी। मगर जब रायसभा में इस बाबत पूछा गया तो सरकार ने पहले वाली बात दोहरा दी, यानी कपनिया खुद अपने लिए आचार सहिता बनायें। एक साल पहले जब सरकार ने दवा कपनियों के सघ के विवेक पर सारा मसला छोड दिया था, तब कहा जा सकता था कि उहें अपने नइ यावसायिक नतिकता को अपनाने का एक माका दिया गया है । मगर इस बीच यह साफ हो चला ह कि दवा कपनिया गभीर नही ह। नइ सहिता की बात तो दूर, पहले की आचार सहिता पर भी अमल नहीं किया।
हाल ही में यह चाकाने वाला तय सामने आया ह कि भारत में काम कर रही बहराीय दवा कपनियों में से करीब पीस फीसदी ऐसी ह, जिन पर पिछले दिनों अमेरिका में इसी तरह के मामलों में भारी जुमाना लगाया गया। याद रहे भारत के दवा बाजार में बहराीय कपनियों की सार फीसदी से यादा की हिसेदारी है । इससे यह साफ हो जाना चाहिए कि इस मामले की दवा कपनियों के विवेक के हवाले नहीं किया जा सकता, योंकि यावसायिक नतिकता के तकाजे पर मुनाफे का गणित हावी हो गया ह।
एक जमाना था, जब भारत में चिकिसक को भगवान की सज्ञा दी जाती थी। व के साथ यावसायिकता के नाम पर धीरेधीरे कइ तरह की अनतिक थाआें ने इस क्षे में जडे जमा ली ह। कइ छोटी कपनियों का मानना ह कि दवाआें के दामों में पचास फीसदी की कमी आसानी से की जा सकती ह, अगर चिकिसकों को तोहफे देना बद कर दिया जाए। कपनियों के बीच डाटरों से अपनी दवाइया यादा लिखवाने की होड मची रहती ह। कपनियों की तरफ से लुटाया जा रहा यह पसा आखिरकार मरीज की जेब से ही निकाला जाता ह। मामला टीवी सेट, फिज, लपटाप जसे तोहफे देेने तक सीमित नहीं ह। दवा कपनिया चिकिसकों को मुत में देशविदेश की सर कराती ह, उहें महगे होटलों में ठहरने का लोभन दिया जाता ह। बहत से विदेश यााए सेमिनारों आर अतराीय समेलनों में हिसा लेने की आड में करवाइ जाती ह। यहा तक कि डाटरों के परिवारजनों को भी विदेश ले जाने का चलन हो गया। दवा कपनियों आर चिकिसकों की मिलीभगत के जरिए अगर मरीजो की सेहत से खिलवाड हो रहा ह, तो सरकार को चुप यों बठे रहना चाहिए ? अमेरिका समेत दुनिया के यादातर मुकों में इस बारे में कडे कानून बनाये गये ह। भारत में इस बाबत कोइ कानून न होने की वजह से यह अनतिक कारोबार खुलेआम चल रहा ह। दवा उाेग जीवन रक्षा से ताक रखता ह, इसलिए इस क्षे में बेलगाम मुनाफे के राज को बदात नहीं किया जाना चाहिए।
दवा कपनियों ने आचार सहिता का जो मसादा जारी किया था, उससे साफ जाहिर था कि इस मामले को कपनियों के विवेक पर नहीं छोडा जा सकता। दरअसल, यापारिक नतिकता पर मुनाफे की हवस के हावी होने के कारण ही यह पूरा मसला उठा ह। भारत के दो दवा निमाता सघ एक ऐसी सहिता को पहले ही वीकार कर चुके ह। पर उस पर कहीं अमल नहीं हआ। इस सहिता में दवा निमाताआें से अपेक्षा की गयी थी कि वे चिकिसकों को नगद रकम, सगीत की सीडी, डीवीडी आर अय इलेटानिक चीजें देने आर विदेश या मनोरजन यााआें का इतजाम करने से बचेंगे। मगर मसादे में इस बात की पूरी गुजाइश रखी गयी ह कि किसी दूसरे नाम पर ये चीजें बदतूर चलती रह सके। मसलन, वज्ञानिक समेलन के नाम पर दवा निमाता डाटरों की विदेश यााए पहले की तरह ायोजित कर सकेंगे। वज्ञानिक समेलन में दवाआें के बारे में नइ जानकारी को भी शामिल किया गया ह। इसी तरह डाटरों के पेशे से किसी न किसी तरह से जुडी चीजों को तोहफे के प में देने की छूट दी गयी ह। एक तरह से इस सहिता के जरिए डाटरों को दवा कपनियों के खच पर विदेश भेजने की था को नतिक जामा पहनाने की कोशिश की गयी थी।
पर अब भारतीय चिकिसा परिषद (एसीआइ) ने चिकिसा पेशेवरों की आचार सहिता शािचार आर आचार नीति अधिनियम २००२ में सशोधन किया ह आर एक नइ आचार सहिता बनाइ ह। इसके तहत कोइ भी चिकिसक दवा बनाने वाली कपनियों या वाय देखभाल से जुडे उाेगों से उपहार या याा सुविधाए उपलध नहीं कर सकेगा। कोइ भी चिकिसक दवा बनाने वाली कपनियों या वाय देखभाल से जुडे उाेगों ारा पायोजित विशेष अनुसधान काय में भाग ले सकता ह, लेकिन इसके लिए उसे उपयु योय पदाधिकारी से मजूरी सुनिचित करानी होगी। लेकिन आचार सहिता का उघन करने वाले डाटरों को या सजा मिलेगी, इसका कोइ उेख नहीं ह। कडे ावधानों के बिना इस पर रोक नही लगायी जा सकती है ।
सपक : ०९४५१९१०६१५
