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दुष्कर कार्य है दुख से बाहर निकलना

Swatantra Vaartha  Wed, 20 Jan 2010, IST

good work only out of sadदुष्कर कार्य है दुख से बाहर निकलना

किसी ने ओशो से पूछा कि ‘जिस दुख में म जी रहा ह उससे बाहर यों नहीं निकल सकता?’ जवाब में ओशो ने कहा कि,‘ दुख से मु होने के लिए बडे साहस की आवयकता है। दुखी होना बहत सरल है, इसके कोइ पसे नहीं लगते। दुखी होने के लिए तुहें किसी साहस की, किसी विवेक की आवयकता नहीं होती। दुखी होना बहत आसान ह, किंतु इससे बाहर निकलना बहत कठिन है,दुकर है। इससे बाहर निकलने के लिए विवेक की आवयकता होती है। अपने दुखों के निमाता तुहीं हो, आर दुख को तुम इसलिए निमित करते हो योंकि तुम बेहोश होते हो। तुम इसकी उपा करना तभी बद कर सकते हो जब तुम सचेत होते हो आर सचेत बनने के लिए बहत यास की आवयकता होती है।

फिर दुख तुहें यत रखता है, ताकि तुम अपने भीतरी खोखलेपन से बचे रहो। यह तुहें उलझाए रखता है।

यदि तुम दुखी नहीं हो तो तुहें भीतर जाना पडेगा आर तुम भयभीत होते हो योंकि वहा बहत खालीपन होता ह। यह एक तरह की मयु ह। रहयवादियों ने इसे महामयु कहा ह जो तथाकथित साधारण मयु से बडी होती है। योंकि साधारण मयु में केवल शरीर मरता है। यदि तुम अदर जाते हो तो तुहारा मन मर जाता हआर य इसी से भयभीत होता है। तुहारा अहकार मर जाता ह आर य अपनी पहचान खोने से डरता है।

एक निचित पहचान बनाने के लिए तुमने कितना यास किया है? कोइ य एक सि अभिनेता है, दूसरा य एक जानामाना राजनीतिज्ञ ह, कोइ बहत धनी ह, कोइ बडा ज्ञानी ह। तुमने काफी यास किया हआर अब म तुमसे इससे बाहर आने की बात कह रहा है। इसका मतलब तो यह हआ कि तुहारा सारा यास एकदम यथ रहा ह। इससे बाहर निकलने के लिए हिमत की आवयकता होगी, किसी पहचान के बिना होने के लिए साहस की जरत होगी।

तुहारा कोइ नाम है यश, परिवार, कुल, सकति, धम आर देश है। इन सबसे तुहें एक निचित विचार मिलता ह कि तुम कान होयपि यह विचार एकदम असय, निरकुश, सयोग होता ह। यह भी तो सायोगिक घटना ह कि तुहारा जम एक इसाइ या हिंदू या मुसलमान के प में हआ ह। इसका कोइ भी महव नहीं ह। यह तो सयोगवशात तुमने एक जमन अथवा भारतीय या चीनी के प में जम लिया ह। तुम इनमें से कोइ भी नहीं हो।

तुहारी चेतना न तो चीनी ह, न कोरियन आर न जापानी। तुहारी चेतना मा एक चेतना ह। इसका कोइ देश नहीं, कोइ कुल नहीं, कोइ वण नहीं, कोइ धम नहीं ह। ये सब सकार होते है। तुहें बताया गया ह कि तुम एक भारतीय हो कि तुम मुसलमान हो। यह समोहन ह। तुहें समोहित किया गया ह आर समोहन इतनी गहराइ में जाता ह कि तुम इसके लिए मरने को भी तयार हो सकते हो। लोग धम के लिए, देश के लिए, वजों के लिए, बहत सी मूखताआें के लिए मरते ह। ऐसा लगता ह कि जसे उनके जीवन का कोइ भी अथ नहीं है, जसे यदि वे किसी भी बहाने से मरने के लिए तयार हकोइ भी बहाना चलेगा।(जारी)


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