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हसीना का हसीन सफर

Swatantra Vaartha  Thu, 21 Jan 2010, IST

हसीना का हसीन सफर

बगलादेश की धानमी शेख हसीना की यह भारतयाा ऐतिहािसक होगी, इसमें जरा भी शक नहीं है । यह भारतबाला वणयुग का ारभ ह। बगलादेश का जम १९७१ मे हआ, लेकिन पिछले ३९ सालों में से ३० से भी यादा साल तक ढाका में ऐसी सरकारें बनीं, जिनका एक ही मूलम̲ रहा, भारतिवरोध। भारतविरोध के नाम पर या तो वे चुनाव जीतती थीं या फाजी ततापलट के बाद वे भारतविरोध के दम पर अपना आचिय सि करती थीं। उन सरकारों ने भारत के साथ सहज सबध बनाने की बजाय ऐसे कदम उठाए, जिससे भारत का नुकसान हआ, भारत की छवि बिगडी, भारत के दुमनों को मदद मिली आर बगलादेश को कोइ फायदा नहीं हआ। कुछ बगलादेशी सरकारों ने ऐसे रााें के साथ भी अपनी साठगाठ बढा ली, जो भारत को तबाह करने पर तुले हए थे।

शेख हसीना आर उनके पिता शेख मुजीब तो भारत के अभि मि रहे ह, लेकिन शेख हसीना के पिछले शासनकाल के दारान भी अनेक अडचने बनी रहीं। फरा जलविवाद जर सुलझा, लेकिन हसीना सरकार तब इतनी मजबूत नहीं थी कि यह कोइ जबदत कदम उठा पाती आर इधर भारत में उस समय कइ अपकालिक सरकारें बनीं, जिनका यान आतरिक उठापटक पर अधिक केति रहा। इस बार शेख हसीना चड एव अपूव बहुमत से जीती ह आर यह सयोग ह कि समत भारतविरोधी ताकतों की पोल खुल चुकी ह। भारतविरोधी ताकतें आजकल इतनी पत ह कि शेख हसीना की इस भारतयाा का उहें वागत करना पडा ह। शेखहसीना की इस याा के दारान भारत आर बगलादेश के बीच जो समझाते हए ह, वे सिफ इन दो देशों ही नहीं, बकि नेपाल, भूटान आर यामार पर भी गहरा असर डालेंगे।

भारत ने बगलादेश को एक बिलियन डालर याने लगभग ४५०० करोड का अनुदान दिया ह। किसी भी विकासमान रा के लिए यह बहत बडी राशि ह। इतनी बडी राशि भारत ने अब से पहले किसी भी रा को एकमुत नहीं दी ह। भारत ने अफगानितान को लगभग सवा बिलियन डालर दिए ह, लेकिन वे उसे पिछले ७८ वषा] में मिले ह। इस घोषणा से दो बातें सि होती ह। एक तो यह पता चलता ह कि भारत वय समथ रा ह आर दूसरा यह कि वह अपने पडोसी रााें के ति उदार ह। भारत की इस घोषणा का सीधा लाभ शेख हसीना को मिलेगा। बगलादेश में कहा जाएगा कि शेख हसीना की जगह यदि बेगम खालिदा या िजया या इरशाद होते तो या भारत इतनी बडी राशि दे देता ? अब हसीना के विरोधियों की बोलती बद हो जाएगी। भारत की इस उदारता का असर अय पडोसी रााें पर भी पडेगा।

भारत की इस उदारता का माग हसीना ने पहले ही शत कर दिया था। असम के आतकवादी नेता राजखोवा को भारत के हवाले करके ढाका सरकार ने यह प सकेत दे दिया था कि अपनी जमीन पर वह कोइ भी भारतविरोधी गतिविधि बदात नहीं करेगी। साइ तो यह ह कि ढाका की पिछली कुछ सरकारों ने न केवल भारतविरोधी आतकवादियों को श्रय दिया, बकि उहें पाकितान के शीष नेताआें से भी मिलवाया था। अब जो तीन सुरक्षा समझाते हए ह, उनके तहत दोनों देश आपराधिक मामलों में पारपरिक कानूनी सहायता करेंगे, सजायाता लोगों को लाटाएगे, आतकवादियों, गिरोहों आर तकरों के वि सयु कारवाइ करेंगे। इन समझातों के कारण भारत को समत पूवाचल में शाति थापित करने में सुविधा होगी। उन समाजविरोधी तवों को भी वह अपनी गिरत में ले सकेगी, जो बगलादेश में छुपकर पाकितान, श्रीलकाइ आर बमी आतकवादियों से साठगाठ करते रहते ।

भारत ने बगलादेश को नेपाल आर भूटान तक आनेजाने के लिए रेल आर सडक की सुविधा देने की भी घोषणा की ह। बगलादेश ने अखाराअगरतला रेललिंक बनाने पर सहमति दी ह। यह शुआत ह आर बहत अछी ह। यदि भारत आर बगलादेश अपनीअपनी सीमा में से दोनों के माल आर लोगों के लिए राता खोल दे, तो यह सपूण पूवाचल के लिए युगातरकारी कदम होगा। यदि कलकाा आर अगरतला के बीच बगलादेश होकर रेल आर सडके दाडने लगें तो १७०० किमी का फासला सिफ ५०० किमी रह जाएगा। बगलादेशी रातों के खुल जाने से भारत, नेपाल, भूटान, बगलादेश आर यामार का आपसी यापार कइ गुना बढ जाएगा। बगलादेश के फायदों को देखकर कोइ आचय नहीं कि किसी दिन पाकितान भी अपने थलमाग भारत के लिए खोल देगा। उस दिन सपूण मय एशिया आर दक्षिण एशिया के बीच आथिक आर साकतिक सहकार के नए युग का सूपात होगा। पडोसी देशों का भय आर सशय दूर करने के लिए भारत को एकतरफा उदारता भी दिखानी पडे तो दिखानी चाहिए।

यह उदारता डामनमोहन सिंह सरकार चुर माा में दिखा रही ह। बगलादेश के साथ भारत का यापार बढे आर भारत में बगला माल यादा खपे, इस से कइ रियायतें दी जा रही ह। अभी बगलादेश भारत से लगभग २५०० मिलियन डालर का आयात करता ह, लेकिन भारत को उसका नियात ५०० मिलियन डालर भी नहीं ह। भारत ने बगला वतुआें पर तटकर घटाया ह आर ७०० वतुआें की निषेध सूची को घटाकर ४०० वतुआें की कर दिया ह। यदि पडोसी देशों के माल को कर मु कर दिया जाए तो आखिर भारत का कितना नुकसान हो जाएगा? भारत थोडी पहल करे तो अगले पाच वषा] में ही दक्षिण एशिया में मुबाजार की थापना हो सकती ह।

भारत ने बगलादेश को २५० मेगावाट बिजली देने का वायदा भी किया ह। दोनों देशों का जलआयोग भी अब अधिक सकिय किया जाएगा ताकि बगलादेश को बाढ से बचाया जा सके आर दोनों देशों के जलोतों का बहविध उपयोग किया जा सके। इसके अलावा बगलादेश के आशुगज आर भारत के सिलीघाट बदरगाहों को भी एकदूसरे के लिए खोला जाएगा। अब चिटगाव आर मगला के बारे में भी थोडी उदारता बरती जाएगी। ३०० बगला युवकों को भारत छावा देगा आर अगले साल दोनों देश मिलकर रवी डेढ शतक भी मनाएगे। पिछले ३९ साल में कुल मिलाकर जितनी गहरी समझ दोनों देशों में पदा नहीं हइ, उससे कहीं यादा याा के दारान दिखाइ पड रही ह। सोनिया गाधी आर तिभा पाटील के साथ छपे हसीना के आमीय चि अपनी कहानी खुद कहते ह। इसमे सदेह नहीं कि ‘भारतपलट हसीना’, अब दूसरी हसीना होंगी। बगलादेश में अब उनका जलवा कुछ आर ही होगा। भारत से जुडा उनका तार अब उहें अधिक वुितमय बना देगा। उनकी यह याा उहें शेख मुजीब के सपनों का बगलादेश बनाने में काफी मदद करेगी। धानमी के तार पर शेख हसीना कइ अय देशों का सफर करेंगी, लेकिन या इस सफर से यादा हसीन कोइ अय सफर होगा?

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