बंद पर परितबध लगे
बद काल से सभी को िकतनी परेशानी होती है व करोडों रुपये की हािन होती है , इस बात को हम सभी भलीभाित जानते है । तोडफोड, बसों आिद को जला देना, यह कहा तक तकसगत, यायसगत व उचित है , इस बात पर गभीरता से वदिचार करने की आवयकता है । रोज कुआ खोदना व रोज पानी पीने वालों के बाबत सोचता है , तो मन यथित हो उठता है । निजी सपा का जो भी नुकसान करे, उसे ही भरपाइ करने का कानून होना चाहिए। एक दिन के बद में करोडों की हानि हो जाती है ।
मेरी यतिगत राय में बद काल करने वालों को देशोही मानता है । आज के नेतागण गाधीजी का नाम ले लेकर जी रहे ह, लेकिन उनके बताये माग सयअहिंसासयागह पर चल नहीं रहे है । आज भी उनके बताये माग पर चलकर रामराय थापित किया जा सकता ह। इन सब बातों को यान में रखकर साा पक्ष व विपक्ष सभी राजनतिक दलों से सानुरोध नम निवेदन ह कि सवसमति से यह निणय लिया जाए कि कभी भी बद का आान नहीं किया जाएगा। धरना दिया जा सकता ह, सयागह व भूख हडताल की जा सकती है , मान जुलूस व मान दशन किया जा सकता है । यह सब भी विरोध दशन आर अपनी बात मनवाने के तरीके है , जिहें अपनाया जाना चािहए।
बजभूषण बजाज, हैदराबाद
पलायनवादी सकित पर अकुश जरी
आखिर कब केगी भारतीय छााें पर हो रही हमले की घटनाए ? यह ऐसा सवाल है , जिसका उार शायद आज भारत का हर आम आदमी सरकार से पूछ रहा है । हमले केवल भारतीय नागरिकों पर ही हो रहे ह, यह बात भी जगजाहिर हो चुकी है । परतु सवाल ह आखिर ये हमले हो यों रहे है ? आज हमारे देश से तिवष लाखों छा शिक्षा गहण करने विदेश जाते ह आर किसी भी तरह वहीं बसने का यास करते है । यह थिति आज शायद इसलिए उप हो रही है , योंकि देश में शिक्षा आर रोजगार के साधन सीमित हो रहे है । सरकार यह बात तो कहती ह कि वह रोजगार का सजन करेगी, परतु उसे अमली जामा नहीं पहनाती। हर बार केवल छााें के पलायन की बात की जाती ह, परतु उनके पलायन को रोकने की बात कहीं नहीं की जाती। यह हमले तो केवल एक तीक मा है । आज हम अपने देश में इस थिति को देख सकते ह। गावकबों से आये दिन लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे ह। कोइ शिक्षा के नाम पर, तो कोइ रोजगार के नाम पर।
आज जितना भी विकास हो रहा ह, वह केवल कुछ शहरों तक सीमित होकर रह जा रहा ह। ऐसे में यह आवयक ह कि आदमी अपने विकास के लिए शहरों की ओर पलायन करेगा आर शहरी जीवन जीने वाले युवक शहरों में रोजगार के साधन सीमित होने पर विदेश की ओर पलायन करेंगे। सरकार को चाहिए कि वह इस पलायनवादी सकति पर अकुश लगाये। चाहे वह गाव/कबों से हो या देशसे। इसी पलायनवादी सकति का नतीजा आज हम क्षेवाद के प में भी देख सकते ह। योंकि आज जितने भी नेतागण ह, वे क्षेवाद की राजनीति करने पर मजबूर ह, याेेंकि लगभग सभी शहरों में वहा के मूल निवासियों के साथसाथ बाहर से आये लोगों की तादाद भी अधिक सया में ह। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह पहले इस पलायनवादी सकति पर अकुश लगाने के लिए ठोस काययोजना बनाए, जिससे लोगों को आसानी से रोजगार आर शिक्षा मुहया हो।
नमिता वमा, धूलपेट, हदराबाद
