हसना मना है
‘इस बार सभलकर निशाना लगाना। अभीअभी तुहारा फेंका हआ पथर मेरे सिर में लगतेलगते बचा।’
ओह ! म बहत शरिमदा है । इस बार ऐसे भूल हरगिज नहीं होगी।’
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किरायेदार ‘भइ यह कसा मकान ह, सारी छत टपक रही ह। मेरा कमरा तो तालाब बनता जा रहा ह।’
मकान मालिक ‘साहब ! हमने तो पहले ही कह दिया था हर कमरे में पानी होगा।’
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‘पिताजी ! आप रात को चमा लगाकर यों सोते है ?’
‘बेटा ! मुझे वन में कुछ भी दिखाइ नहीं देता।’
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सिपाही (देहाती से) ‘अरे ! तुम बीच सडक पर यों चल रहे हो ? सडक के किनारेकिनारे चलो! ’
देहाती‘खुद तो बीच सडक में खडे हो आर दूसरों को किनारे पर चलने की सलाह दे रहे हो।’
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नाइ मने एक बार पहले भी आपको शेव बनाया था शायद।’
गाहक ‘नहीं, मेरे गाल पर यह घाव का निशान एक मोटर दुघटना का ह।’
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एक लखपति से किसी ने पूछा ‘आपने इतनी बडी दालत कहा से पदा कर ली ?’
‘अपनी पनी की सहायता से।’
‘आपकी पनी ने इसमें किस कार आपकी सहायता की ?’ उहोंने न किया।
‘बडी सेबडी कमाइ से असतु रहकर।’
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‘यार ! कल मजा आ गया। मने एक मजेदार सपना देखा।’
‘कसा सपना देखा?’
‘मने एकसेएक खूबसूरत लडकिया देखीं।’
‘आर?’
‘उनके साथ खूब मजा लिया।’
‘वाह यार ! तुम तो तकदीर के सिकदर हो।’
‘या सिकदर ह यार ! उस समय म भी एक लडकी था, सपना देखकर नींद खुली तो घबरा गया आर अपने को सही सलामत पाने के बाद ही यकीन आया कि म लडका हीहै ।
