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अग्नि३ का सफल परीक्षण

Swatantra Vaartha  Mon, 8 Feb 2010, IST

अग्नि३ का सफल परीक्षण

नई दिल्ली/बालेश्वर। भारत ने आज उ़डीसा तट पर स्थित व्हीलर द्वीप से परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम अग्नि३ मिसाइल का ‘सफल’ परीक्षण किया, जो ३,५०० किलोमीटर से अधिक की दूरी तक मार कर सकती है।

यह मिसाइल सेना में शामिल होने के लिए तैयार है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सितांशू धर ने कहा देश में ही विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल अग्नि३ का परीक्षण धामरा के पास सुबह करीब १० बजकर ५० मिनट पर किया गया और इसने अपने लक्ष्य को पूरी सटीकता से भेदा। उन्होंने कहा कि परीक्षण सफल रहा और मिशन के सभी मानक और उद्देश्य हासिल हो गये।

उन्होंने कहा कि लक्ष्य के पास स्थित नौसेना के दो जहाज इस पर नजर रखे हुए थे और उन्होंने मिसाइल को सटीक निशाना लगाते हुए देखा।

सूत्रों ने बताया कि अग्नि३ मिसाइल का आज का परीक्षण मोबाइल रेल लांचर से दागा गया। मिसाइल के सफल परीक्षण पर रक्षा मंत्री एकेएंटनी ने डीआरडीओ के प्रमुख वीकेसारस्वत और अग्नि३ परियोजना में शामिल अन्य वैज्ञानिकों को बधाई दी।

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मिसाइल का प्रक्षेपण इसे शामिल किये जाने से पहले का परीक्षण था और अब यह सेना में शामिल होने के लिए तैयार है। अग्नि३ श्रृंखला का यह चौथा परीक्षण है। सूत्रों ने कहा कि ब्यौरे के अध्ययन के लिए मिसाइल के समूचे प्रक्षेपण पथ पर विभिन्न टेलीमेट्री केंद्रों इलेक्ट्रोऑप्टिक व्यवस्था और पोर्ट ब्लेयर में तट पर लगे आधुनिक राडारों तथा प्रभाव बिंदु के नजदीक ख़डे नौसेना के जहाजों के जरिये नजर रखी गई। मिसाइल दो चरणीय ठोस प्रक्षेपण व्यवस्था से संचालित होती है। इसकी लंबाई १७ मीटर और व्यास दो मीटर है। प्रक्षेपण वजन ५० टन है। यह अपने साथ ड़ेढ टन सामग्री ले जा सकती है, जो गर्मी से बचाव के लिए पूरी तरह काबर्नकार्बन नाम के कवच से ढकी होती है।

यह चमकीली मिसाइल आधुनिक कंप्यूटर व्यवस्था के साथ आधुनिक नैविगेशन दिशानिर्देशन और नियंत्रण व्यवस्था से लैस है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के एक अधिकारी ने बताया कि उच्च कंपनी तापीय और ध्वनि प्रभावों के लिए इसमें जबर्दस्त इलेक्ट्रानिक व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया है। अग्नि३ का पहला परीक्षण नौ जुलाई, २००६ को किया गया था, जो विफल रहा था, लेकिन १२ अप्रैल, २००७ और ७ मई, २००८ को किए गए दोनों परीक्षण सफल रहे थे।

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