सरकार के कदमों से आंध्र में नक्सल समस्या काबू में: रोशय्या
नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रोशय्या ने आज माओवादी उग्रवाद और आईएसआई प्रायोजित आतंकवाद को दो प्रमुख खतरा बताया और कहा कि राज्य सरकार आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे और कानून एवं व्यवस्था की समस्या से निपटने के लिये व्यापक रणनीति तैयार कर रही है और सर्वोच्च प्राथमिकता दिये जाने से इन समस्याआें पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है।
उन्होंने कहा कि एक विशेष बल ग्रेहाउंड राज्य और जिला स्तर तैनात है। इसके अलावा खुफिया विभाग की एक विशेष शाखा भूमिगत उग्रवादियों पर नजर रखे हुए हैं और उसकी सतर्कता के कारण हाल में काफी ब़डी संख्या में इसके प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। छत्तीसग़ढ और उ़डीसा राज्यों की सीमा से ज़ुडे आदिवासी क्षेत्रों में माओवादियों का प्रभाव होने की बात करते हुए रोशय्या ने कहा कि माओवादी समझते हैं कि सरकार के द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी और विकासात्मक गतिविधियों से उनके अस्तित्व को खतरा है। उन्होंने कहा कि अधिकांश असंतोष गरीबी और भूख तथा बेहतर रोजगार के अभाव में उग्रवादी गतिविधियों को ब़ढावा देती है। राज्य सरकार ने आदिवासियों और अन्य परंपरागत निवासी कानून (आरओएफआर) २००६ को क्रियान्वनित कर अभी तक १८२ लाख आदिवासी परिवारों को १२७२ लाख एक़ड भूमि पर अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद पर काबू पाने के लिए सबसे ब़ढया हथियार यह है कि विकास के जरिये लोगों का दिल जीता जाये। इसलिए राज्य सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम (एनआरईजीपी) के तहत आदिवासियों को आरओएफआर के अधीन दी गयी भूपिर १२०० कऱोड रुपये की लागत से व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम प्रारंभ किया है। प्रदेश सरकार ने बागवानी कार्यक्रम के अलावा १५० कऱोड रुपये व्यय करके ३१,००० एक़ड भूमि पर रबर बागवानी का काम शुरू किया, जिससे १५,००० आदिवासी परिवारों को लाभ मिलेगा। करीब एक लाख एक़ड भूमि पर काफी बागवानी की गयी और इससे एक लाख आदिवासी परिवार लाभांवित हुए।
मुख्यमंत्री ने यहां आंतरिक सुरक्षा पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि पुलिस अभियान के दौरान किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाये। कुछ हजार अगंभीर अपराधों के मामलों को वापस ले लिया गया है, खासतौर से आदिवासियों के खिलाफ। इस प्रकार से आंध्र प्रदेश में कानून एवं व्यवस्था और सामाजिकआर्थिक के संयुक्त उपायों से आंध्र प्रदेश में नक्सलवादी समस्या काफी कम हो गयी।उन्होंने कहा कि प्रदेश में आईएसआई प्रायोजित आतंकवादी गतिविधियों पर क़डी नजर रखी जा रही है और आतंकवाद की पिछली घटना हैदराबाद में अगस्त, २००७ के दौरान हुई थी। उस समय दोहरे बम विस्फोट में ४२ व्यक्ति मारे गये थे। राज्य सरकार ने अप्रत्याशित ढंग से कार्रवाई करते हुए पुलिस विभाग की फाइटिंग इकाई को मजबूत करने के लिये ३७,५०० अतिरिक्त पुलिसकर्मियों के पद स्वीकृत किये। इसमें से एकतिहाई को शामिल किया जा चुका है और एकतिहाई की भरती जारी है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने पिछले साल जुलाई में हैदराबाद में एक एनएसजी केंद्र स्थापित किया है। हैदराबाद में एनएसजी का क्षेत्रीय मुख्यालय स्थापित करने के फैसले के अनुरूप ६०० एक़ड भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है और यह अधिग्रहण अगले दो महीने में पूरा हो जाने की संभावना है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार राज्य का जिला स्तर पर निगरानी और खुफिया सूचनाआें के संग्रहण के लिये पर्याप्त संख्या में लोगों को लगाया गया है।रोशय्या ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा के वास्ते एक विधेयक लाया जायेगा और इसमें सभी निगमित समूहों, मॉल्स, सिनेमाघरों आदि में उनकी मूल सुरक्षाव्यवस्था और तंत्र में वृद्धि करने का प्रावधान है। सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों का नियमित सुरक्षा अंकेक्षण किया जा रहा है। खुफिया सुरक्षा विंग लगातार सरकारी एजेंसियों को प्रशिक्षित कर रहा है, जिसमें मंदिर सुरक्षा, परिवहन सुरक्षा, रेलवे सुरक्षा के लिये अत्याधुनिक विस्फोटक उपकरण की पहचान, लोगों की तलाशी आदि शामिल है। सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग की सुरक्षा के लिये हमने पुलिस महानिरीक्षक के अंतर्गत आईटी टास्क फोर्स का गठन किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश के ९ जिलों से लगता हुए ९७४ किमी लंबा समुद्री तट है। राज्य सरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय की सिफारिशों के अनुसार तटीय सुरक्षा योजना को लागू कर रही है। इसके तहत प्रथम चरण में ६ मरीन पुलिस स्टेशन बनाये गये हैं। इस लंबे तट पर द्वितीय चरण में १५ और मरीन पुलिस स्टेशन बनाये जाने का प्रस्ताव है। इस प्रकार से कुल २१ मरीन पुलिस स्टेशन हो जायेंगे।
उन्होंने बताया कि समुद्र में गश्त लगाने के लिये नावों की केंद्र से मंजूरी मिल गई और इसने परिचालन के लिये पूर्व सैनिक, पूर्व केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल से अनुबंध के आधार पर भर्ती की जा रही है। हमारी मरीन पुलिस नौसेना और तटरक्षकों के साथ संपर्क में है। मरीन पुलिस और तटरक्षकों द्वारा संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त नौसेना और तटरक्षकों के साथ समय पर विचारों का आदानप्रदान करने के लिये एक डीआईजी रैंक के अधिकारी को मुख्यालय के साथ विशाखपट्टणम में तैनात किया गया है।
