खाद्य वस्तुआ की कीमतें ब़ढने का क्रम जारी
नई दिल्ली। आलू और दालों की कीमतों में वृद्धि के कारण खाद्य मुद्रास्फीति की दर में ब़ढोत्तरी का सिलसिला लगातार तीसरे सप्ताह जारी रहा।
३० जनवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान खाद्य मुद्रास्फीति की दर ब़ढकर १८ प्रतिशत के पास (१७ ९४ प्रतिशत) पहुंच गई है, जबकि इससे पिछले सप्ताह यह १७५६ प्रतिशत के स्तर पर थी।
हालांकि खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्धि के बावजूद सरकार को भरोसा है कि आवश्यक वस्तुआें के दाम जल्द नीचे आएंगे। आलोच्य सप्ताह के दौरान खाद्य मुद्रास्फीति में ०३८ प्रतिशत की ब़ढोत्तरी हुई है। इसके बाद अब विश्लेषक यह मानने लगे हैं कि सरकार २६ फरवरी को पेश होने वाले बजट में गेहूं, चावल, दालों, चीनी और खाद्य तेलों के लिए शून्य आयात शुल्क की व्यवस्था को फिलहाल जारी रखेगी। दिसंबर माह में खाद्य मुद्रास्फीति की दर एक दशक के ऊंचे स्तर २० फीसद के करीब पहुंच गई थी।
हालांकि बाद में इसमें गिरावट आनी शुरू हो गई थी। अब खाद्य मुद्रास्फीति में ब़ढोत्तरी की वजह आलू और दालों के दाम हैं।
एक साल पहले की तुलना में आलू के दाम जहां ४०५७ प्रतिशत ब़ढ चुके हैं, वहीं दालों की कीमतों में ४१२४ फीसद का इजाफा हुआ है। इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने कहा है कि खाद्य मुद्रास्फीति में साल के अंत में कमी आना शुरू होगी। हालांकि साथ ही उन्होंने ज़ोडा कि यह मानसून सामान्य रहने पर ही होगा। प्रधानमंत्री डॉमनमोहन सिंह ने पिछले सप्ताह कहा था कि मुद्रास्फीति का बुरा दौर बीत चुका और स्थिति में जल्द सुधार होगा।
कीमतों पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि जहां तक खाद्य मुद्रास्फीति का सवाल है, बुरा दौर बीत चुका है। मुझे विश्वास है कि खाद्य वस्तुआें की कीमतों में जल्द स्थिरता आएगी। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि खाद्य मुद्रास्फीति चिंता का कारण है और ईंधन के साथ यह कुल महंगाई की दर को प्रभावित कर रही है। दिसंबर में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई की दर ७३१ प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। एचडीएफसी बैंक की अर्थशास्त्री ज्योतिंदर कौर ने कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति चिंता का कारण है और इंर्धन के साथ यह कुल मुद्रास्फीति को ब़ढाने में भूमिका निभा रही है। मुझे लगता है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक महंगाई की दर ९५ प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। ईंधन समूह का सूचकांक सप्ताह के दौरान १२ प्रतिशत ब़ढा। यदि सालाना आधार पर देखा जाये, तो सब्जियों की कीमतों में २१ प्रतिशत की ब़ढोत्तरी हुई है, वहीं गेहूं के दाम १५ फीसद ब़ढे हैं। साप्ताहिक आधार पर खाद्य वस्तुआें का मूल्य सूचकांक ०३ प्रतिशत ब़ढा है। आलोच्य सप्ताह में फलों और सब्जियों के दामों में दो प्रतिशत की ब़ढोत्तरी हुई, जबकि मछली, मसालों और बाजरा के दाम एकएक प्रतिशत ब़ढे। महंगाई पर काबू के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) में ०७५ फीसदी की ब़ढोत्तरी की थी। इससे बैंकिंग तंत्र से ३६,००० कऱोड रुपये की नकदी कम हो जाएगी। हाल में किरीट पारेख समिति ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रणमुक्त किये जाने का सुझाव देते हुए एलपीजी की कीमतों में १०० रुपये प्रति सिलेंडर तथा केरोसिन के दाम छह रुपये प्रति लीटर ब़ढाने की सिफारिश की है। कीमतों को नियंत्रणमुक्त किए जाने से पेट्रोल के दाम तीन रुपये प्रति लीटर तथा डीजल के ३४ रुपये प्रति लीटर ब़ढ जाएंगे। यदि पारेख समिति की सिफारिशों को मान लिया जाता है, तो इस वित्त वर्ष के अंत तक कुल मुद्रास्फीति १० प्रतिशत के स्तर को पार कर जाएगी।
