हर हाल में समय पर हों विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं : राज्यपाल
हैदराबाद। राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन ने राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को परीक्षा कराने एवं परिणाम घोषित करने में विलंब नहीं करने के निर्देश दिये हैं। राज्यपाल ने यह निर्देश तेलंगाना मुद्दे पर छात्रों की ब़ढती भागीदारी के मद्देनजर दिये हैं।
इसके साथ ही राज्यपाल ने तमाम विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को विश्वविद्यालयों के कामकाज को बेहतर नहीं बनाये जाने पर की जाने वाली कार्रवाई के लिए बाध्यकारी बनाने की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि बिना काम के मुफ्त भोजन नहीं मिलता, इसलिए विश्वविद्यालयों के कामकाज में सुधार लाकर उनका स्तर ब़ढाने व घोषित समय पर परीक्षाआें का आयोजन करने के मामले में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी।
महामहिम ने एक बैठक में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को संबोधित करते हुये कहा कि किसी भी परिस्थिति में परीक्षाआें को टाला नहीं जाना चाहिए और परीक्षाएं एवं परिणाम पहले से तय समय पर ही घोषित होने चाहिए। श्री नरसिम्हन ने कहा कि परीक्षा में विलंब किये जाने से छात्रों का करियर प्रभावित हो सकता है। विश्वविद्यालयों में स्वायत्तता की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए समुचित योजना और नियमित निगरानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों के लिये शैक्षणिक कैलेंडर का निर्माण किया जाना चाहिए और इसे प्रभावी तरीके से लागू कराने का प्रयास किया जाना चाहिए।
प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त होने के बाद पहली बार उन्होंने विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में आज जुबली हॉल में आयोजित कुलपतियों की बैठक में विश्वविद्यालयों की कार्यशैली पर अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कुलपतियों को जिम्मेदारी के साथ पेश आने की नसीहत दी और कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल डिग्रियां देने वाले कारखानों जैसा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को समाज के लिए उपयुक्त बनाने वाली संस्थाआें की तरह बनना चाहिये।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में प्रवेश के आवेदन की तारीख से लेकर परीक्षा के परिणाम घोषित होने तक का हर काम शैक्षणिक कैलेंडर बनाकर उसके अनुरूप सब कुछ बिल्कुल ठीकठीक होना चाहिये, वरना विद्यार्थियों को भारी नुकसान हो सकता है। विद्यार्थियों को इस नुकसान से बचाने के लिए संयुक्त कैलेंडर तैयार कर उसके अनुसार ही परीक्षाआें का आयोजन तथा पूर्व घोषित तिथियों पर ही परीक्षा परिणाम घोषित किये जाने को जरूरी बताते हुए उन्होंने कहा कि अभिभावक काफी उम्मीदों से अपने बच्चों का विश्वविद्यालयों में दाखिला कराते हैं। इसलिए विद्यार्थियों की बेहतर काउंसिलिंग कर उन्हें संपूर्ण ज्ञानी बनाने में कुलपतियों को महत्वपूर्ण भूमिका अदा करना चाहिये।
उन्होंने कहा कि कुलपति तो आतेजाते रहते हैं, लेकिन विद्यार्थियों के भविष्य के प्रति कुलपतियों के जरूरी सावधानी नहीं बरतने पर उसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना प़डता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में अनुशासन से लेकर परीक्षाआें के आयोजन व परिणामों की घोषणा तक सभी कार्य पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होना चाहिये।
राज्यपाल ने कुलपतियों से अपनेअपने विश्वविद्यालयों के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए की गयी कार्रवाइयों के बारे में तीन महीने में एक बार सरकार को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश देते हुए कहा कि वे स्वयं भी उन रिपोटा] की जांचप़डताल कर विश्वविद्यालयों के कामकाज में सुधार की दिशा में कदम उठायेंगे। उन्होंने कहा,‘मैं और आप नहीं, बल्कि ‘हमलोग’ की भावना से एकजुट होकर उच्चशिक्षा के विकास के लिए हमें काम करना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि केवल विश्वविद्यालयों के आंक़डे दिखाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें अमल में लाये गये कार्यक्रमों का विवरण देना चाहिये।
उन्होंने कहा कि प्राध्यापकों के अध्यापन के साथसाथ उनके द्वारा सौंपे जाने वाले शोधपत्रों व कामकाज के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिये। यूजीसी की सभी शत] लागू हो रही हैं या नहीं, यह भी देखना चाहिये। सभी नियमों व शता] के मुताबिक कॉलेज चलाये जा रहे हैं या नहीं, इसकी रिपोर्ट बनाकर उन्हें वेबसाइट पर रखना चाहिये, वरना गलती से गैरअनुमतिप्राप्त कॉलेजों में दाखिला ले चुके विद्यार्थियों को साल के अंत में ठीक परीक्षा के समय परीक्षा का प्रवेशपत्र पाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना प़डता है।
राज्यपाल ने हर विश्वविद्यालय से अपनीअपनी आर्थिक प्रणाली तैयार करने का आह्वान किया और कहा,‘सरकार से निधियां प्राप्त होने के बावजूद उन्हें साल के शुरू के बजाय अंत में खर्च करने के लिए रखे रहने की प्रवृत्ति ठीक नहीं, क्योंकि इससे जरूरी कामों में लगने के बजाय निधियां वहीं प़डी स़ड रही होती हैं, जबकि उनका उपयोग आवश्यक कामों के लिए तत्काल किया जाना चाहिए।
इसलिए विश्वविद्यालयों को सुनिश्चित आर्थिक प्रणाली तैयार करनी चाहिये। साथ ही शिक्षा के स्तर पर भी विशेष ध्यान देना चाहिये।’ राज्यपाल ने कहा कि उपयुक्त भवन, प्रयोगशालाएं व सभी बुनियादी सुविधाआें के बगैर कॉलेज शुरू करने से समस्याएं पैदा होंगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का स्तर बेहतर होने का मतलब केवल बेहतर परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का संपूर्ण जानकार बनना है। उन्होंने अब से विश्वविद्यालयों के कामकाज पर विशेष ध्यान देने की जानकारी देते हुए कुलपतियों को कोई लापरवाही नहीं बरतने की चेतावनी दी। उन्होंने कुलपतियों से विश्वविद्यालयों के कामकाज बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने की अपील करते हुए उनसे निर्भय और निष्पक्ष होकर अपना काम करने को कहा।
उच्चशिक्षा मंत्री डी श्रीधर बाबू ने कहा कि सरकार उच्चशिक्षा पर विशेष ध्यान केंद्रित कर इस दिशा में पहल कर रही है। पिछले पांच वषा] में १८ नये विश्वविद्यालय, ७३ डिग्री कॉलेज तथा ९३ जूनियर कॉलेज शुरू किये जाने की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वे प्रत्येक विद्यार्थी के लिए उनकी डिग्री व पीजी की प़ढाई खत्म होने तक कम से कम दस लोगों को साक्षर बनाने एवं दस पौधे लगाने की शर्त रखने जा रहे हैं। उन्होंने कुलपतियों से इस विषय पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।
