सज्जन कुमार व टाइटलर के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो : जरनैल सिंह
हैदराबाद। केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम पर १९८४ के सिख विरोधी दंगों के सिलसिले में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान जूता फेंकने की घटना से सुर्खियों में आये वरिष्ठ पत्रकार जरनैल सिंह ने सिख विरोधी दंगों के लिए जिम्मेदार लोगों खासकर कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार व जगदीश टाइटलर के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सिख समुदाय के साथ न्याय करने की मांग की है।
उन्होंने प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह से दिल्ली स्थित सिख विरोधी दंगों के पी़डतों की बस्ती विडो कॉलोनी का दौरा कर सिख समुदाय को न्याय दिलाने का आश्वासन देने की भी मांग की।
आज यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए जरनैल सिंह ने कहा कि वे १९८४ के सिख विरोधी दंगों के बारे में लोगों को जागरूक करने हेतु देश के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। इस कार्यक्रम के तहत वह आज हैदराबाद आये। उन्होंने बताया कि इन दंगों में सिर्फ दिल्ली में ही ३००० से अधिक सिख समुदाय के लोग मारे गये थे और २५ वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक एक भी दोषी को सजा नहीं दी गई, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि १९८४ के दंगों के समय ज्ञानी जैल सिंह राष्ट्रपति थे, फिर भी उन्होंने दोषियों को सजा दिलवाने का प्रयास तक नहीं किया। उन्होंने कहा कि दंगों की जांच करने हेतु गठित सभी आयोगों ने सज्जन कुमार व जगदीश टाइटलर को दोषी पाया, लेकिन आज तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही नहीं, सज्जन कुमार के खिलाफ तो घटना के ११ वर्ष के बाद मामला दर्ज किया गया, जिससे पता चलता है कि ये लोग किस तरह से न्यायालय व पुलिस पर अपना प्रभाव बनाये हुए थे।
उन्होंने कहा कि ये दोनों नेता कांग्रेस आलाकमान को १९८४ सिख विरोधी दंगों के असल जिम्मेदार लोगों का पर्दाफाश करने की धमकी देकर ब्लैकमेल कर रहे हैं, इसलिए अभी तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इन दोनों नेताआें को पार्टी से निकाल देना चाहिए, ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई हो सके।
उन्होंने कहा कि उनका गृहमंत्री चिदंबरम पर जूता फेंकने का कारण सिर्फ सिख समुदाय के साथ हुए अन्याय के बारे में सरकार को जागरूक करना था। उन्होंने कहा कि वे मानते हैं कि एक पत्रकार की हैसियत से उन्होंने जो किया, वह गलत है, लेकिन २५ वषा] के बाद भी सिख विरोधी दंगों के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं किये जाने के विरोध में उन्हें यह कदम उठाना प़डा।
उन्होंने कहा कि उन्हें इसके लिए कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक १९८४ के दंगों पी़डतों के साथ न्याय नहीं किया जायेगा, तब तक देश के सिर से यह कलंक दूर नहीं होगा। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है।
