हाईकोर्ट ने दिए विश्वविद्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल हटाने के निर्देश
हैदराबाद। प्रदेश उच्च न्यायालय ने उस्मानिया विश्वविद्यालय में बीते रविवार के पुलिस व कुछ अधिकारियों के रवैये पर क़डा आक्रोश व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय परिसर में तैनात अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को हटाने के आज निर्देश दिये।
साथ ही अदालत ने पुलिस द्वारा विश्वविद्यालय परिसर व द्वार के पास डाले गये टेंट व बैरिकैड भी सोमवार को ही हटाने, पुलिस महानिदेशक व नगर पुलिस आयुक्त को यह कार्य अपनी देखरेख में कराने तथा संयुक्त पुलिस आयुक्त सीतारामांजनेयलू को उस्मानिया विश्वविद्यालय की ड्यूटी से दूर रखने के निर्देश दिये। गौरतलब है कि पृथक तेलंगाना राज्य के मसले पर गठित श्रीकृष्णा समिति के घोषित कार्यक्षेत्र के विरोध में उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग और लाठीचार्ज से हुए तनाव के बाद यहां अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पुलिस की कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए तथा अकारण लाठीचार्ज तथा फायरिंग की शिकायत करते हुए छात्रों की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश एल नरसिम्हा रेड्डी ने विश्वविद्यालय के छात्रावास में पुलिस द्वारा तलाशी अभियान पर रोक लगाने के निर्देश भी जारी किए।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि विश्वविद्यालय के छात्र शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन इससे शिक्षा और परीक्षा बाधित नहीं होनी चाहिए।
अदालत ने विद्यार्थियों को कक्षाआें व परीक्षाआें के आयोजन में बाधा नहीं बनने और त़ोडफ़ोड व आपराधिक कार्रवाइयों को अंजाम नहीं देने की हिदायद देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अपने स्तर पर सुरक्षा बल तैनात कर सकते हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा कि विश्वविद्यालय पुलिस थाने के लिए पर्याप्त संख्या में सिविल पुलिसकर्मी मुहैया कराये जायें। उसने कहा कि विद्यार्थियों की पहचान तथा बाहरी लोगों के छात्रावासों में रहने की जांचप़डताल सिविल पुलिस ही कर सकती है। अदालत ने पुलिस को विश्वविद्यालयों के अधिकारियों के अनुरोध पर ही अधिकारियों के समक्ष छात्रावासों की तलाशी लेने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विद्यार्थी अगर त़ोडफ़ोड या आपराधिक कार्रवाइयों को अंजाम देते हैं, तो उनके खिलाफ कानून व नियमों के तहत पूछताछ की जा सकती है। बाद में अदालत ने याचिका की सुनवाई २२ फरवरी तक स्थगित कर दी।
इससे पूर्व, याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी दलील में कहा कि विद्यार्थियों के शांतिपूर्वक प्रदर्शन करते समय एकाएक लगभग ३ हजार विशेष व अर्धसैनिक बलों को विश्वविद्यालय के परिसर में तैनात किया गया और पुलिस ने बेरहमी से लाठीचार्ज किया। इसके अलावा पुलिस विधायकों को विश्वविद्यालय के कैंपस में आने की अनुमति नहीं दे रही है। दलील में यह आरोप भी लगाया गया कि पृथक तेलंगाना आंदोलन के विरोधी दो पुलिस अधिकारियों की देखरेख में अर्धसैनिक बलों ने विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज किया तथा पुलिस विद्याथियों के प्रति अपशब्दों का प्रयोग करने के अलावा छात्रों के साथ बदतमीजी से पेश आ रही थी। विद्यार्थियों के बयान व अधिवक्ता की शिकायत की जांचप़डताल करने के बाद उच्च न्यायालय ने पुलिस के रवैये पर क़डा आक्रोश व्यक्त किया। महाधिवक्ता के जवाब से असंतुष्ट उच्च न्यायालय ने उन्हें इस बाबत समग्र रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
