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विपक्ष के हंगामे से विस की कार्यवाही बाधित

Swatantra Vaartha  Thu, 18 Feb 2010, IST

विपक्ष के हंगामे से विस की कार्यवाही बाधित

हैदराबाद। विधानसभा में विपक्षी दलों ने उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों पर पुलिस ज्यादतियों और अन्य ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर आज हंगामा किया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित कर दी गई।

प्रदेश के एजेंसी क्षेत्रों में गिरिजनों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में विफल रहने के खिलाफ विपक्षी सदस्यों ने आज सदन से वाकआउट किया। तेदेपा, वामदल तथा प्रजा राज्यम्‌ पार्टी (पीआरपी) के सदस्यों ने सरकार पर एजेंसी क्षेत्रों में गिरिजनों को समुचित चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के मुद्दे पर संतोषजनक जवाब न देने का आरोप लगाते हुए सदन का बहिष्कार किया। विधानसभा अध्यक्ष एम किरण कुमार रेड्डी ने विभिन्न कारणों से तीन बार सदन को स्थगित कर दिया। गौरतलब है कि गत दो दिनों से विभिन्न कारणों के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गयी थी।

इससे पूर्व, विधानसभा बजट सत्र के तीसरे की आज सदन की बैठक शुरू होते ही अध्यक्ष किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि वह आल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) की निजामाबाद जिले में अल्पसंख्यकों पर हमले के मामले में कार्यस्थगन प्रस्ताव की मांग को खारिज करते हैं। इस बीच, मुख्य विपक्षी दल तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के तेलंगाना क्षेत्र के विधायक विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों पर हुए हमले के मामले में गृहमंत्री पीसबिता इंद्रा रेड्डी से स्पष्टीकरण की मांग करने लगे।

तेदेपा सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष से रविवार व सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस द्वारा छात्रों व मीडियाकर्मियों पर की गयी ज्यादतियों के मुद्दे पर चर्चा करने का आग्रह किया। अध्यक्ष ने तेदेपा सदस्यों को यह कहकर शांत कराया कि वे इस मुद्दे पर प्रश्नकाल के बाद चर्चा करवायेंगे।

जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, तेदेपा तथा वामदलों के सदस्य एजेंसी क्षेत्रों में फैल रही बीमारियों पर नियंत्रण के लिए उठाये गये कदमों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री दानम नागेंद्र से उलझ प़डे। इस मुद्दे पर मंत्री के बयान से असंतुष्ट माकपा सदस्यों ने सदन में जमकर शोरशराबा शुरू कर दिया, जिसके कारण मजबूर होकर अध्यक्ष को दस मिनट के लिए सदन को स्थगित करना प़डा। इसके बाद सदन जब दोबारा एकत्र हुआ, तो विपक्ष के नेता एनचंद्रबाबू नायुडू ने मंत्री से एजेंसी क्षेत्रों में गिरिजनों को चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा उठाये गये कदमों का खुलासा करने को कहा। श्री नायुडू ने आरोप लगाया कि गिरिजनों को पोषक आहार उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है तथा अस्पतालों साफसफाई व डॉक्टरों की कमी के कारण उन्हें तकलीफें उठानी प़ड रही हैं। एजेंसी क्षेत्रों में डेंगू बुखार से गिरिजनों की हो रही मौत पर चिंता व्यक्त करते हुए विपक्ष के नेता ने सरकार से डेंगू बुखार का इलाज राजीव आरोग्यश्री योजना के तहत लाने की मांग की।

सदन प्रकोष्ठ गठित करने की मांग अस्वीकार

इस मांग पर मुख्यमंत्री केरोशय्या ने श्री नायुडू को आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे पर विचार करेंगे। रोशय्या ने सदस्यों को यह आश्वासन भी दिया कि सरकार गिरिजनों को और बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कदम उठायेगी। मुख्यमंत्री के इस उत्तर से असंतुष्ट विपक्ष के नेता ने इस मुद्दे पर सदन में विभिन्न दलों के नेताआें की एक सदन समिति गठित करने की मांग की, लेकिन सरकार ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया। जब भाकपा सदस्य गुंडा मल्लेश ने घोषणा की कि वे आदिलाबाद, करीमनगर तथा वरंगल जिलों में गिरिजन क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में सरकार की विफलता के खिलाफ सदन से वाकआउट कर रहे हैं, तो तेदेपा, भाकपा, माकपा तथा पीआरपी सदस्य भी सदन से बाहर चले गये।

इस बीच, एमआईएम सदस्यों ने सरकार से निजामाबाद जिले के पतंगल गांव में अल्पसंख्यकों पर हमले के मुद्दे पर स्पष्टीकरण की मांग की और वे सदन के बीचोबीच आ गये। इसे देखते हुए अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को १० मिनट के लिए स्थगित कर दिया। सदन की कार्यवाही जब दोबारा शुरू हुई, तब कांग्रेस के तेलंगाना क्षेत्र के विधायक ख़डे हो गये और उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने के लिए नारे लगाने लगे।

श्री रेड्डी ने उनसे सदन की कार्यवाही में सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि गृहमंत्री इस संबंध में स्पष्टीकरण देंगी। एआईएमआईएम भी अल्पसंख्यकों पर हमले के मामले को लेकर स्पष्टीकरण की मांग पर अ़ड गये। इसे देखते हुए सदन की कार्यवाही एक बार फिर १५ मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले श्री रेड्डी ने उस्मानिया छात्रों के खिलाफ मामलो को वापस लेने के मुद्दे पर माकपा की कार्यस्थगन प्रस्ताव की मांग को खारिज कर दिया था।

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