तेदेपा विधायक के आरोप पर बिफरे रोशय्या
हैदराबाद)। विधानसभा में आज उस समय माहौल अचानक गरमा गया, जब तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के एक विधायक के आरोप से झल्लाये मुख्यमंत्री डॉकेरोशय्या ने चुनौती दे डाली कि रेत घोटाले में यदि उनकी लिप्तता साबित हो जाती है, तो वे पद और राजनीति से संन्यास ले लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित आरोपों की जांच तेदेपा अध्यक्ष एवं विपक्ष के नेता एनचंद्रबाबू नायुडू से कराने का प्रस्ताव भी रखा।
आज यहां विधानसभा में शून्यकाल के दौरान रोशय्या को ‘घोटाला संबंधी विवाद हल करने में पारंगत’ बताते हुए पांच कऱोड का रेत खुदाई घोटाला उनके पूर्व चुनाव क्षेत्र चिराला में होने संबंधी तेदेपा विधायक रेवंत रेड्डी के आरोप पर मुख्यमंत्री क्रोधित हो उठे और मामले की जांच विपक्ष के नेता से कराये जाने व आरोप सिद्ध होने पर हमेशा के लिए पद व राजनीति छ़ोड देने की बात कह डाला।
उन्होंने रेवंत रेड्डी को उनके (रेड्डी के) खिलाफ लगे आरोपों की जांच भी एक मंत्री से कराने की चुनौतीस्वीकार करने के लिए ललकारा। रोशय्या ने भावुक लहजे में कहा कि उन पर लगाये गये आरोपों की जांच विपक्ष के नेता से कराने के लिए वे तैयार है। उन्होंने कहा, ‘यदि विपक्ष के नेता इस मामले की जांच करने को तैयार हैं, तो मैं खुद उनके सामने हाजिर हो जाऊंगा। अगर मेरे विरुद्ध भ्रष्टाचार का कोई भी आरोप सिद्ध होता है, तो मैं पद से त्यागपत्र देकर राजनीति को अलविदा कह दूंगा।’ उन्होंने रेत घोटाले में उन्हें घसीटने के लिए रेवंत रेड्डी की क़डी आलोचना की।
इस पर रेवंत रेड्डी ने कहा कि वे अपने खिलाफ लगे आरोपों की जांच कराने को तैयार हैं, पर क्या मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के विरुद्ध लगे आरोपों की जांच का आदेश देने के लिए भी तैयार है? उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को रेत घोटाले में नहीं घसीटा, बल्कि सिर्फ यह कहा कि वे रेत घोटाले संबंधी विवाद निपटाने में सिद्धहस्त हैं, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री डॉवाईएस राजशेखर रेड्डी ने उन्हें (रोशय्या को) एक जिले के रेत घोटाले को हल करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि देश को हिलाकर रख देने वाले बहुचर्चित बोफार्स घोटाले को भी संसद में शून्यकाल के दौरान उठाया गया था, इसलिए विधानसभा में शून्यकाल के दौरान रेत घोटाले का मामला उठाने में कुछ भी गलत नहीं है।
