खुद को दिवालिया घोषित करने वाला कारोबारी धोखाध़डी के आरोप में गिरफ्तार
हैदराबाद। पुलिस ने हर्बल उत्पादों का डीलरशिप देने के नाम पर लोगों से एक कऱोड रुपये से भी अधिक वसूलने के बाद खुद को दिवालिया घोषित कर चुके एक कथित कारोबारी को आज धोखाध़डी के आरोप में गिरफ्तार किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्यामसुंदर गुप्ता (४६) ने वर्ष २००७ में हिमायतनगर में ‘सोम्स हर्बो न्यूटिकल्स’ नामक एक संस्था शुरू की। उसने हर्बल उत्पादों का डीलरशिप लेने वालों को प्रचुर लाभ होने का झांसा देकर नगर के कुछ लोगों से एक कऱोड रुपये से भी अधिक वसूले और इसके ऐवज में डीलर बने लोगों को अपने हर्बल उत्पाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, जम्मूकश्मीर आदि क्षेत्रों में भेजने का प्रस्ताव दिया। साथ ही, डीलरशिप के लिए डिपॉजिट के रूप में ली गयी रकम बाद में लौटने का वायदा भी उसने अपने डीलरों से किया।
बताते हैं कि गुप्ता की बातों पर भरोसा करके ईस्ट मारेडपल्ली के टीचर्स कॉलोनी निवासी विजय ने किश्तों में क्रमश: २५० लाख, ७५० लाख और १० लाख (कुल २० लाख) रुपये उसके खाते में जमा कराये।
इसी प्रकार करीब २० अन्य लोगों ने भी गुप्ता के झांसे में आकर कथित डीलरशिप के लिए लाखों रुपये डिपॉजिट कराये। उधर, गुप्ता ने उपरोक्त कुछ राज्यों में भी खुद ही अपनी नयी शाखाएं खोलीं और यहां से भेजे जाने वाले हर्बल उत्पादों को भेजने के लिए अपनी उन्हीं शाखाआें के पते यहां के डीलरों को दे दिये।
इस तरह उसने अपने कथित डीलरों को हर्बल उत्पादों की आपूर्ति करने व उन डीलरों से उन उत्पादों को अन्य राज्यों में स्थित अपनी अन्य शाखाआें में मंगवाने का सिलसिला कुछ दिनों तक जारी रखा।
आरोप है कि डीलरों से डिपाजिट के तौर पर वसूली जाने वाली राशि जब एक कऱोड रुपये से अधिक हो गई, तो उसने यहां से अपना बोरियाबिस्तर समेट लिया। इसी के साथ गुप्ता ने नामपल्ली क्रीमिनल कोर्ट में खुद को दिवालिया घोषित करते हुए एक कऱोड एक लाख ८३ हजार रुपये का आईपी जमा कराया और तब से वह सबसे बचता फिर रहा था।
इस बीच, विजय ने नारायणग़ुडा थाने में गुप्ता के खिलाफ धोखाध़डी की शिकायत दर्ज करा दी, जिसके बाद से पुलिस गुप्ता की तलाश में थी। इसी क्रम में पुलिस ने आज विश्वस्त सूचना के आधार पर सैदाबाद स्थित एमआईजी से गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में गुप्ता ने अपना अपराध स्वीकार किया है। नारायणग़ुडा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा ४२०, ४०६, ४०९, ५०६, १२०(बी), आर/डब्ल्यू ३४, एपीपीडीएफईए ५ के तहत मामले दर्ज कर उसे रिमांड पर भेज दिया।
