ब्राह्मणी स्टील्स को जलापूर्ति करने के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा
हैदराबाद। प्रदेश सरकार द्वारा मैलवरम जलाशय से जलापूर्ति के मामले में सरकार द्वारा संचालित रायलसीमा ताप विद्युत गृह के मुकाबले निजी प्रतिष्ठान ब्राह्मणी स्टील्स को वरीयता देने पर तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) ने क़डी आपत्ति जताते हुए विधानसभा में जमकर नारेबाजी की। इस मुद्दे पर कांग्रेस व तेदेपा सदस्यों के बीच बहस भी हुई। करीब चार घंटे तक सदन में भारी शोरशराबा हुआ, जिसके बाद अध्यक्ष एनकिरण कुमार रेड्डी ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
इससे पूर्व भी अध्यक्ष को दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी प़डी थी, क्योंकि नारे लगा रहे तेदेपा सदस्यों ने इस मुद्दे को लेकर सदन की कार्यवाही चलने नहीं दी थी। अध्यक्ष ने इस समस्या का हल निकालने के लिए विभिन्न पार्टियों के सदन में नेताआें से चर्चा की तथा आश्वासन दिया कि सदन में जनहित से ज़ुडे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करायी जायेगी। लेकिन अध्यक्ष द्वारा किये गये प्रयासों के बावजूद भी स्थिति में बदलाव नहीं आया। जब सदन दोबारा एकत्र हुआ, तब भी तेदेपा सदस्यों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री केरोशय्या की सदन की कार्यवाही को ठीक से चलने देने में सहयोग करने की अपील के बावजूद सदन में शांति बनाये रखने के सभी प्रयास विफल हो गये। नारेबाजी कर रहे तेदेपा सदस्य वेल तक पहुंच गये। स्थिति बेकाबू होते देखकर अध्यक्ष ने कहा कि तेदेपा सदस्य जनता का कीमती वक्त तथा राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सार्वजनिक धन की बर्बादी कर रहे हैं।
इस मुद्दे को प्रश्नकाल के दौरान तेदेपा के एरेवंत रेड्डी सहित अन्य सदस्यों ने उठाया था। वे रायलसीमा ताप विद्युत गृह (आरटीपीएस) और मेसर्स ब्राह्मणी स्टील कंपनी (क़डपा जिला) के जलापूर्ति के स्रोत के बारे में जानकारी चाहते थे। भारी सिंचाई मंत्री पीलक्ष्मय्या ने बताया कि सरकार ने आरटीपीएस को मइलावरम जलाशय तथा बैलेंसिंग जलाशय श्री पोटलुरी ब्रह्मेंद्र स्वामी से १३ टीएमसी पानी आवंटित किया था। इसी तरह ब्राह्मणी स्टील्स को गंडीकोटा जलाशय से दो टीएमसी पानी आवंटित किया था, जो ब्राह्मणी स्टील्स के उपयोग के लिए मइलावरम जलाशय में संग्रह किया जायेगा।
मंत्री ने इस बात का खंडन किया कि सरकार ने आरटीपीएस के अतिरिक्त पानी आवंटित करने का अनुरोध ठुकरा दिया है। उन्होंने बताया कि टीपीएस इकाई श्री पोटलूरी वीर ब्रह्मेंद्र स्वामी बैलेंसिंग जलाशय से १६५ कऱोड रुपये की लागत से एक पाइपलाइन बिछा रही है। मंत्री के उत्तर से तेदेपा सदस्य संतुष्ट नहीं हुए। तेदेपा विधायक रेवंत रेड्डी, लिंगा रेड्डी, डी नरेंदर कुमार व अन्य ने दलील दी कि ८०० से १००० मेगावाट तक अतिरिक्त बिजली पैदा करने के लिए विद्युत गृह ने अतिरिक्त पानी की मांग की थी और यह पानी निकट स्थित मइलावरम जलाशय से उपलब्ध कराया जा सकता था। इसकी बजाय विद्युत गृह को १६५ कऱोड रुपये की नई पाइपलाइन बिछाने को मजबूर होना प़डा, ताकि गंडीकोटा जलाशय से पानी लाया जा सके। उन्होंने प्रश्न किया कि मइलावरम से जलापूर्ति के मामले में एक निजी स्टील कंपनी का पक्ष क्यों लिया जा रहा है। उन्होंने यह खुलासा भी किया कि स्टील कंपनी के पक्ष में एक सप्ताह में दो शासनादेश जारी किये गये हैं।
विपक्ष के नेता एनचंद्रबाबू नायुडू ने दोनों शासनादेशों के संबद्ध भाग प़ढते हुए बताया कि सरकार ने आंख मूंदकर निजी स्टील उद्योग का पक्ष लेने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हजारों किसानों के लाभ के लिए अतिरिक्त विद्युत उत्पादन करने वाले सरकार द्वारा संचालित विद्युत ताप गृह के बचाव में आगे नहीं आयी। श्री नायुडू व अन्य तेदेपा नेताआें ने मुख्यमंत्री (जो उस समय सदन में नहीं थे) को बुलाने की मांग की, ताकि वे इस मुद्दे पर अपना स्पष्टीकरण दे सकें। इस दौरान कांग्रेस सदस्य भी शोरशराबा करने लगे, क्योंकि उन्हें इन टिप्पणियों पर एतराज था। इस शोरशराबे के बाद सदन को मजबूरन कुछ समय के लिए स्थगित करना प़डा।
जब सदन दोबारा एकत्र हुआ, तब भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। तेदेपा सदस्य मुख्यमंत्री की उपस्थिति की मांग करते रहे। अध्यक्ष ने एक बार फिर से सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया। अध्यक्ष के कक्ष में लगभग एक घंटे चर्चा के बाद सदन दोबारा एकत्र हुआ तथा मुख्यमंत्री भी उपस्थित हुए। तेदेपा सदस्यों ने मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर उत्तर देने का आग्रह किया। रोशय्या ने मंत्रियों के विरुद्ध की गयी टिप्पणी पर नाराजगी जतायी। रोशय्या ने कहा कि तेदेपा सदस्यों को दोनों शासनादेशों में कुछ असामन्यता नजर आ रही है। सरकार निश्चित रूप से इस पर गौर करेगी तथा इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठायेगी कि जलापूर्ति के मामले में आरटीपीएस को प्राथमिकता दी जाये। इस उत्तर से तेदेपा सदस्य संतुष्ट नहीं हुए। वे चाहते थे कि दोनों शासनादेश वापस लिये जायें तथा विद्युत गृह को जलापूर्ति में वरीयता देते हुए एक नया शासनादेश जारी किया जाये। नारे लगाते हुए तेदेपा सदस्य वेल की ओर द़ौड प़डे, जिसके बाद अध्यक्ष को दिनभर के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करनी प़डी।
इससे पूर्व, कांग्रेस की ओर से भी काफी शोरशराबा देखने को मिला। कांग्रेस सदस्य रामचंद्र रेड्डी ने आरोप लगाया कि तेदेपा ने रायलसीमा क्षेत्र में अपने शासनकाल के दौरान एक भी उद्योग लगाने का प्रयास नहीं किया और अब वह एक विकासशील उद्योग को जलापूर्ति के मुद्दे को लेकर अ़डचने डाल रही है और अवांछित आरोप लगा रही है। तेदेपा सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि सदस्य अपने निजी स्वाथा] के कारण ब्राह्मणी स्टील का पक्ष ले रहे हैं।
अध्यक्ष ने इस आरोप पर सदस्य से स्पष्टीकरण मांगा और प्रश्न किया कि क्या वह स्टील उद्योग की सेवा में थे या हैं। जब सदस्य ने बताया कि वह अब भी कंपनी के साथ संबद्ध है, तो अध्यक्ष ने कहा कि वे इस विषय पर उन्हें फिर से बोलने की इजाजत नहीं देंगे। स्थिति उस समय और बिग़ड गयी, जब कृषि मंत्री एनरघुवीरा रेड्डी रायलसीमा क्षेत्र में कोई भी उद्योग न लगाने के मुद्दे पर तेदेपा शासन पर बिफर प़डे। तेदेपा सदस्यों ने उनकी इस टिप्पणी पर क़डी आपत्ति जताई। मंत्री का माइक अचानक काट दिया गया, जिससे सत्तापक्ष की ओर से भी विरोध के स्वर उठने लगे।
