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बिजली संकट पर तेदेपा व वामदलों का सदन से वाकआउट

Swatantra Vaartha  Thu, 11 Mar 2010, IST

बिजली संकट पर तेदेपा व वामदलों का सदन से वाकआउट

हैदराबाद। प्रदेश में जारी बिजली संकट पर संतोषजनक उत्तर न दिये जाने से नाराज तेदेपा, भाकपा तथा माकपा सदस्यों ने आज सदन से वाकआउट किया, जबकि पीआरपी तथा लोकसत्ता पार्टी ने अपना विरोध दर्ज कराया।

विधानसभा में आज बिजली की स्थिति पर जारी बयान पर नाराजगी व्यक्त करते विपक्ष के नेता एनचंद्रबाबू नायुडू ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सदन में १९९४ के बाद पहली बार बिजली की स्थिति पर चर्चा हो रही है। पूर्व तेदेपा सरकार द्वारा विद्युत क्षेत्र में किये गये सुधारों के कारण ही १९९४ से प्रदेश को अधिशेष बिजली मिल रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की नीतियों ने विद्युत क्षेत्र को अस्तव्यस्त कर दिया है।

श्री नायुडू ने कहा कि प्रतिवर्ष बिजली की खपत में औसतन १० प्रतिशत की वृद्धि होती है। प्रदेश सरकार ने विद्युत व विद्युत वितरण क्षेत्र में निवेश घटा दिया है। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि वह सांसदों के माध्यम से केंद्रीय विद्युत योजनाआें से अधिक से अधिक बिजली प्राप्त करने के लिए केंद्र पर दबाव बनाये। उन्होंने कहा कि विद्युत की स्थिति के बारे में सरकार का बयान उसके गैर जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है। उन्होंने इस बात की ओर इशारा भी किया कि विद्युत विभाग में कोई संपूर्ण मंत्री ही नहीं है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार के रवैये के खिलाफ उनकी पार्टी वाकआउट कर रही है।

सदन में भाकपा नेता जीमल्लेश ने कहा कि अघोषित बिजली कटौती के कारण फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कम वोल्टेज की बिजली आपूर्ति के कारण पंपसेट मोटरों को भी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने सरकार से आगामी महीनों में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए अन्य राज्यों से बिजली खरीदने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का उक्त मुद्दे पर जवाब संतोषजनक नहीं है। उन्होंने घोषणा की कि इसके विरोध में भाकपा भी सदन से वाकआउट कर रही है।

इस बीच, माकपा सदस्य जुलाकंटी रंगारेड्डी ने प्रदेश में विद्युत की खराब स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए कदम न उठाने हेतु सरकार की जमकर आलोचना की और सदन से बाहर चले गये।

सदन में पीआरपी नेता केचिरंजीवी ने विद्युत संकट पर सरकार के गंभीर न होने पर नाराजगी जतायी तथा अपनी पार्टी की ओर से विरोध दर्ज कराया। लोकसत्ता पार्टी के अध्यक्ष डॉजयप्रकाश नारायण ने भी सरकार के वक्तव्य पर असंतोष जताया तथा बिजली की कमी को नियंत्रण में लाने के लिए कुछ सुझाव दिये।

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