योजना आयोग की आपत्तियों के बावजूद बंद नहीं होंगी जनहित योजनाएं : रोशय्या
हैदराबाद। मुख्यमंत्री कोणीजेटी रोशय्या ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसी भी जनहित योजना को रद्द नहीं करेगी तथा योजना आयोग के आपत्तियां जताने के बाद भी इन योजनाआें को आगे ब़ढाने का अधिकार राज्य सरकार को होता है। उन्होंने आज विधानसभा स्थित अपने कक्ष में संवाददाताआें से बातचीत में कहा कि यदि कुछ योजनाआें के लिए निधि का समायोजन करने में योजना आयोग पीछे भी हटता है, तो भी वह योजनाआें को रद्द करने के लिए राज्य सरकार को निर्देश देने की स्थिति में नहीं होता। दिवंगत नेता वाईएस राजशेखर रेड्डी द्वारा शुरू की गयी योजनाएं लाभान्वितों तक पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाये जा रहे हैं और उनका अच्छी तरह से अमल किया जा रहा है। राजस्व व्यय तथा योजनागत व्यय समान हैं तथा अन्य किसी भी राज्य में ये दोनों व्यय समान नहीं हैं।
कृषि क्षेत्र को दिये जा रहे मुफ्त विद्युत, आरोग्यश्री जैसी योजनाआें पर योजना आयोग के कुछ सदस्यों की आपत्तियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री वाईएसआर के रहते वर्ष २००४०५ में भी योजना आयोग के कुछ सदस्योंं ने व्यक्तिगत रूप से राज्य सरकार की योजनाआें पर आपत्ति व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि योजना आयोग की आपत्तियां कोई ब़डा विषय नहीं है, क्योंकि वह केवल कुछ योजनाआें के चलते आर्थिक समस्याएं ब़ढने के बारे में बताता है। रोशय्या ने कहा कि उनकी सरकार केवल योजना आयोग के उपाध्यक्ष के सुझावों को ही ध्यान में रखेगी और अन्य की बातों को उतना तवज्जो देने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा,‘कई योजनाआें को केंद्र से वित्तीय सहायता नहीं मिलने के बावजूद हम उन्हें सफलतापूर्वक चला रहे हैं।’
उन्होंने बताया कि मार्च के अंत तक राशन काडा] की छंटनी का काम पूरा हो जायेगा और अप्रैल में सभी योग्य लाभान्वितों को राशन कार्ड मुहैया कराने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में फेरबदल या विस्तार के बारे में फिलहाल कोई विचार नहीं है। यह पूछे जाने पर कि क्या ४ अप्रैल को राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार होगा? रोशय्या ने कहा कि मंत्रिमंडल के विस्तार के लिए नक्षत्र, तिथि व दिन के बारे में अभी सोचा नहीं है और वैसे भी जो दिन अच्छा रहेगा, उसी दिन अच्छे काम करेंगे।
उन्होंने युगादि के पंचांग का जिक्र करते हुए कहा कि सही मायने में पंचांग वही है, जो भगवान हमारे माथे पर लिखते हैं। उन्होंने कहा कि फ्री जोन के मामले में वही होगा जो सभी चाहेंगे। उन्होंने कहा,‘मैं नहीं समझता कि विधानसभा में फ्री जोन पर चर्चा करने से अदालती फैसले की अवमानना होगी, क्योंकि अदालत में हमने जो कहा था, वही बात यहां भी कह रहे हैं।
