फ्लाईयाश ब्रिक्स व ब्लॉक्स पर सरकार द्वारा कर वसूला जाना अनुचित : बंडारू
हैदराबाद। पूर्व केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय और उमारेड्डी वेंकटेश्वरुलु ने पर्यवरण को लाभ पहुंचाने वाली फाल्जी टेक्नोलाजी द्वारा तैयार किये जाने वाले फ्लाईयाश ब्रिक्स व ब्लॉक्स पर सरकार द्वारा चार प्रतिशत कर वसूले जाने को अनुचित बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग की।
इंस्टीट्यूट फॉर सालिड वेस्ट रिसर्च एकोलाजिकल बैलेन्स (आईएनएनडब्ल्यूएआरबी) ने आज नगर में क्लीन डेवलपमेंट मेकानिजम (सीडीएम) पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में भाग लेने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि फाल्जी टेक्नोलाजी से पर्यावरण को काफी लाभ पहुंच रहा है और इसी को ध्यान में रखकर हमने इस उद्योग को काफी प्रोत्साहन दिया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण के कारण सूखा, तूफान, ब़ाढ आदि आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर उद्योग के पीछे प्रबंधन का लाभ होता है और फ्लाईयाश ब्रिक्स तथा ब्लॉक्स उद्योग से प्रबंधन के साथसाथ समाज का भी कल्याण होता है। बेहतर पर्यावरण के लिए अपनी सेवाएं दे रहे इन उद्योगों को प्रोत्साहित करना छ़ोडकर सरकार मानी वैट के नाम पर उनसे ४ फीसदी कर वसूल रही है। उन्होंने कहा कि सरकारों को लोगों का कल्याण करना चाहिये, लेकिन आय के लिए कर के द्वारा उन्हें लूटना ठीक नहीं है।
तेदेपा के उमारेड्डी वेंकटेश्वरुलु ने कहा कि जब वे केंद्रीय मंत्री थे, तब फाल्जी टेक्नोलाजी को सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डेवलपमेंट में अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि इस उद्योग से लाखों युवाआें को रोजगार के साथ पर्यावरण के संरक्षण में मदद मिलेगी।
उपलोकायुक्त एमवीएस कृष्णार्जुन राव ने कहा कि मिट्टी की ईंट जलाने से हरे प़ेडों को नुकसान पहुंचता है और मिट्टी की गुणवत्ता कम हो जाती है। उन्होंने कहा कि फ्लाईयाश ब्रिक्स और ब्लॉक्स के इस्तेमाल से निर्माण के क्षेत्र में गुणवत्ता के साथ खर्च भी कम होगा तथा पर्यावरण को भी फायदा पहुंचेगा। पूर्व आईएफएस अधिकारी व आईएनएनडब्ल्यूएआरबी के चेयरमैन डॉ सीएन राव ने कहा कि देशभर में १२०० से अधिक फाल्जी ईर्टं उद्योगों की वजह से एक लाख ५० हजार लोगों को रोजगार मिल रहा है। उन्होंने बताया कि इन उद्योगों के फलस्वरूप ६ लाख टन कार्बनडाईआक्साइड का निवारण हो रहा है। उन्होंने कहा कि फाल्जी उद्योगों के निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप जब उनकी संख्या ५० हजार तक पहुंचेेगी, तो पर्यावरण और इस समाज को होने वाले लाभ का अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने सरकार से पर्यवरण का कल्याण करने वाले इन उद्योगों को प्रोत्साहित करने की अपील की। ईपीटीआरआई के पूर्व महानिदेशक गायत्री रामचंद्रन ने कहा कि जब वह दिल्ली में संयुक्त सचिव के रूप में कार्यरत थीं, तब उन्होंने फ्लाईयाश के संबंध में कुछ कार्रवाई की थी। कार्यक्रम में आईएनएनडब्लूयएआरबी के महानिदेशक एन भानुमति दास, निदेशक कालीदास आदि उपस्थित थे।
