नरिसहा राव ने राम मंिदर बनाने के िलए की थी काफी तयारी
हदराबाद। पूव धानमी पीवी नरसिहा राव ने अयोया में राम मंिदर के िनमाण के लिये काफी तयारी की थी, लेिकन १९९६ में कागेस के साा खोने के कारण वह अपने अभियान को आगे नहीं बढा सके। राव के विवत रहे अवकाश ात आइएएस अधिकारी पीवीआरके साद ने तेलुग में लिखी अपनी पुतक ‘एमी जरीगिंदते (वातव में जो घटा) में यह तय उजागर िकयाहै ।
उहोंने लिखा ह कि राव ने अपने करीबी सहयोगियों के साथ अयोया में राम मदिर के निमाण के लिये एक गरराजनीतिक ‘टट’ बनाने की योजना बनायी थी, लेकिन वह उसे सिरे नहीं चढा पाए थे। १९६६ बच के आइएएस अधिकारी साद धानमी कायालय में तब अतिरित सचिव आर राव के सूचना सलाहकार थे। सन १९७१ में राव के आध देश के मुयमी बनने के बाद से साद के उनके साथ सबध थे। साद के अनुसार पूव धानमी महसूस करते थे कि राम मदिर का निमाण तभी हो सकता ह, जब उतम यायालय में लबित मामला निपट जाय अथवा हिदू आर मुलिम चचा के बाद किसी साहादपूण नतीजे पर पहचे।
साद के अनुसार विभि हिदू मठों तथा देशभर के धामिक सगठनों को मिलाकर एक गरराजनीतिक टट बनाने की योजना राव के सबसे बडे राजनीतिक दावों में एक थी, जिससे वह अयोया मुे पर कागेस के सबसे बडे तिۧी भाजपा को मात देना चाहते थे। राव ‘अपारा चाणय’ के नाम से भी जाने जाते थे। उहोंने कहा कि वह (भाजपा) कहती थी कि वह मदिर खुद बनायेगी, इस पर राव ने सवाल किया था ‘या भगवान राम उनके ही ह।’ पुतक के अनुसार मदिर मुे पर भाजपा को चुनाती देने के लिये उहोंने एक ‘चकित करने वाली रणनीति’ बनायी। उहोंने कहा कि तकालीन धानमी चाहते थे कि राममदिर कोइ गरराजनीतिक टट बनाये, जिसे भारत सरकार का पूण समथन हो आर जिसमें विव हिदू परिषद शामिल न हो। साद ने पीवी के हवाले से कहा, ‘एक ही समाधान ह कि हम विभि हिदू मठों तथा धामिक सथाआें के नेताआें के तिनिधिव वाली एक गरराजनीतिक समिति बनायें आर उसे मदिर निमाण का जिमा सापें।’ इसका मुय मकसद उार भारत के चार रायों (हिमाचल श, उार देश, मय देश आर राजथान में चुनाव से पहले भाजपा के ‘राम मदिर एजेंडे’ को चुनाती देना आर राजनीतिक लाभ उठाना था। साद ने लिखा ह कि राव को ये सवाल परेशान कर रहे थे कि ‘राम हिदू के सवाधिक आराय भगवान ह, या वह केवल भाजपा के ह, हम भाजपा से मुकाबला कर सकते ह,
