धर्मं-दर्शन-अध्यात्म

भगवान्‌ को जानना ही वास्तविक उन्नति है

भगवान्‌ को जानना ही वास्तविक उन्नति है भगवान्‌ का कोई विशेष नाम नहीं है। यह कहने का हमारा अभिप्राय यह है कि कोई नहीं जानता कि उनके कितने नाम हैं। भगवान्‌ अनन्त हैं, अतः उनके नाम भी अनन्त होने चाहिए । इसीलिए हमारा प्रयोजन एक नाम से सिद्ध नहीं हो सकता।

द़ृढ प्रतिज्ञा से देवव्रत बने भीष्म

द़ृढ प्रतिज्ञा से देवव्रत बने भीष्म भीष्म प्रसिद्ध कुरुवंशी महाराज शांतनु के पुत्र थे। भगवती गंगा उनकी माता थी। उनके जन्म के पीछे एक कथा है। गंगा जी ने शांतनु से विवाह के लिए यह वचन लिया कि वे कभी भी उनके किसी कार्यव्यवहार पर कोई रोकटोक नहीं करेंगे।

धर्म भौतिकवाद है ही नहीं

धर्म भौतिकवाद है ही नहीं धर्म बहुत दूसरी बात है। वह भौतिकवाद है ही नहीं, वह सुख की खोज ही नहीं है। वह तो तभी शुरू होती है धर्म की बुनियाद, धर्म की दिशा, वह जो वास्तविक धर्म है, उसकी दिशा तभी शुरू होती है जब कोई व्यक्ति सुख की द़ौड के भ्रम से जाग जाता है।

अंतिम सत्य है ईश्वर की अनुभूति

अंतिम सत्य है ईश्वर की अनुभूति संसार में प्राकृतिक शक्तियों का खेल हो रहा है। पृथ्वी, चंद्र आदि ग्रहों की गति खेल या नृत्य के समान है। वस्तुतः मनुष्य जन्म लेकर अभिनय करने के लिए ही इस संसार रूपी रंग मंच पर आता है। मृत्यु के साथ उसका अभिनय पूरा हो जाता है।