िदलों की दूिरया नहीं पढती
‘दोस्त ’ यह शद अपने आप में एक गूढ अथ रखता है, िजसका अभािय ह जीवनभर साथ निभाने वाला य, एक ऐसा य जो आपके िदल के बहत करीब हो, जो आपको बखूबी जानता हो। दोती के बारे में कहा जाता ह िक यह िजतना अिधक मजबूत रिता है, उतना ही नाजुक भी। कभी लाख अपमान व हार सहने पर भी दोत आमविवास बन हमारी हिमत बन जाता ह, तो कभी एक छोटी सी चोट से काच के िखलाने की तरह छन से टूटकर बिखर जाता ह। इस बात का हमें तनिक भी पूवाभास नहीं होता ह। हमारी जरा सी नासमझी कब हमसे हमारा सा दोत छीन लेती ह। इस बात का हमें तब अहसास होता ह, जब हमारा दोत हमसे बहत दूर चला जाता ।
दूरिया थानों की हो, तो कोइ बात नहीं परतु जब दिलों में दूरिया हो जाती ह तथा मन में किसी के ति अविवास व दगाबाजी की भावना आ जाती ह, तब यह सुदर सा रिता पलभर में ही टूटकर बिखर जाता ह आर रह जाते ह केवल पचाताप के आसू।
कहते ह मनुय एक सामाजिक ाणी ह, जो कभी अकेले नहीं रह सकता ह। मनुय की यही आवयकता दोती के चोले में उसे अपनी जिंदगी से मिलवाती ह। तभी तो हमारी हर मुसीबत व हर तकलीफ में बगर कुछ कहे भी दोत हमारी हर बात समझ जाता ह आर हमारी मदद को तयार हो जाता है।
दोत की यह मदद हम भले ही भूल जाते ह, परतु जीवन के उाराթ में जब हम अकेले होते ह व तकलीफ में होते ह तब जर रहरहकर हमें अपने उस मददगार व समझदार दोत की याद आती ह। किसी काेे ‘दोत’ कहने मा से ही इसान में जिमेदारी की भावना जागत हो जाती ह। अब यह हम पर निभर करता ह कि हम बदलते मासम की तरह अपने तेवर बदलकर जिमेदारियों से मुह मोड लेते ह या फिर दुखों की बरसात में भी हिमत की छतरी बन अपने दोत की सुरक्षा करते ह। हर रिते की तरह इस रिते में भी जहा यार, विवास व आमीयता होती ह, वहीं दद, शक व गलती की गुजाइश भी। अब आप ही निणय कर सकते ह आप अपनी दोती के पमाने पर कितना खरा उतरते है ?
जिंदगी की हर मुसीबतों में ढाल बन दोत हमें सुरक्षा दान करता ह। एक हमराज बन वह हमारा हमसाया बनकर साथ चलता ह आर ‘म ह ना’ कहकर हमारी हर गलती को सुधार देता ह। परतु नासमझी व कहीसुनी बातों में आकर यदि हम ऐसे दोत को खो देते ह तथा ऐसा काय करते ह, जिससे हमारे उस अपने का दिल टूट जाता ह, तो सच कह ऐेसे इसान से अधिक दुभायशाली य कोइ आर नहीं होगा।
