सम्यक् ल़डाई की आवश्यकता
पाश्चात्य मनोविज्ञान में एक खास तरह का मनोविश्लेषण विकसित हुआ। उसका नाम है ः ‘ट्रांजेक्शनल एनालिसिस’ सरल शब्दों में ः संबंधों का विश्लेषण। मनुष्यों के आपसी संबंध एक जटिल अंतर्जाल है। क्योंकि मनुष्य एक जटिल घटना है। उसके कुछ हिस्से प्ऱौढ हैं और कुछ शिशुवत हैं। ट्रांजेक्शनल एनालिसिस की खोज यह है कि मनुष्य के मन के तीन तल हैंः बच्चा, मांबाप और प्ऱौढ। हर व्यक्ति में एक बच्चा है, एक तल उसके मांबाप का है, और एक प्ऱौढ व्यक्ति का है। जब दो व्यक्ति आपस में संबंधित होते हैं तो ये तीनों तल एकदूसरे के साथ संप्रेषण करते रहते हैं। इसलिए मानवीय संबंध इतने उलझ जाते हैं।
आप जब किसी के साथ बात कर रहे होते हैं तो यह पक्का नहीं है कि आपके भीतर का बच्चा दूसरे के अंतस्थ बच्चे के साथ बात कर रहा है या मांबाप के साथ या प्ऱौढ के साथ। और उस व्यक्ति के साथ भी यही घटता है। इसलिए अक्सर ऐसा होता है कि आप पूछते कुछ हैं, और जवाब कुछ और आता है। हो सकता है उसके भीतर के मांबाप बोल रहे हों, या बच्चा बोल रहा हो, और आपके भीतर प्ऱौढ बोल रहा हो। स्त्री पुरुष संबंध में यह जटिलता और भी ब़ढ जाती है क्योंकि वहां सेक्स बीच में आता है। जरूरी नहीं है कि हर स्त्री पुरुष का आपस में कामुक संबंध हो। वह हो भी नहीं सकता लेकिन दोनों का विपरीत लिंगी होना ही अपने आपमें तनाव पैदा करता है, एक दीवार ख़डी कर देता है, और उसके साथ दीवार को लांघने का आकर्षण भी।
स्त्री पुरुष एकदूसरे पर निर्भर रहते हैंप्रेम के लिए, भावनाआें के लिए। इसके अलावा आर्थिक और सामाजिक निर्भरता भी है। वह ऊपरी है लेकिन मजबूत है क्योंकि अधिकांश लोग ऊपर सतह पर ही जाते हैं। पति पत्नी या प्रेमी और प्रेमी एकदूसरे के करीब रहकर भी सही अथा] में करीब आ नहीं पाते। क्योंकि वे जितना करीब आते हैं उतनी उनमें ल़डाई होने लगती है, मनमुटाव होने लगते हैं। मनोवैज्ञानिक पूछते हैं , क्या ऐसा होना जरूरी है? क्या बगैर ल़डाई के वे साथ रह नहीं सकते?
नहीं अमेरिकी मनोवैज्ञानिक डॉजार्ज बाख कहते हैं, स्त्री पुरुष के स्वस्थ और घनिष्ठ संबंधों के लिए उनका ल़डना अति आवश्यक है। वह संजीवनी है जो उनके संबंधों को ताजगी देती है। ल़डते तो सभी हैं, फिर उनके संबंध सुंदर क्यों नहीं होते? उसकी कुंजी यही है कि उन्हें सम्यक् ल़डाई सीखनी प़डेगी।
यह सम्यक् ल़डाई क्या होती है? चौंकियेगा मत। यही सिखाने के लिए डॉबाख ने कैलिफोर्निया में एक संस्थान खोल रखा है जिसका नाम है, ‘संघर्ष व्यवस्थापन संस्थान।’ आखिर अमेरिका है, और उसमें भी कैलिफोर्निया का रईसी हिस्सा ‘बेवर्ले हिल्स’जहां तमाम फिल्मी सितारे रहते हैं। वहां कोई भी संस्थान फलफूल सकता है।
डॉ बाख कहते हैं, स्त्रीपुरुष में ल़डाई होना बिलकुल स्वाभाविक है, स्वाभाविक ही नहीं , आवश्यक भी। क्योंकि हर स्त्री और पुरुष का मन ईर्ष्या, क्रोध, नफरत वगैरह अंधियारी भावनाआें से आविष्ट रहता है। यदि आप उन्हें बाहर फेंकते नहीं तो वे मन ही मन में घुम़डती रहेगी। ऊपर से आप प्रेम का नाटक करेंगे और भीतर भाप को दबाते रहेंगे। ऐसे पतिपत्नी ब़डे ऊबाऊ हो जाते हैं। उनका संबंध एकदम नकली हो जाता है। फिर उनके भीतर का गुबार किसी और द्वार से निकलता हैया तो वे बीमार रहने लगते हैं या इधरउधर चोरी छुपे प्रेम संबंध बनाने लगते हैं।
डॉ बाख कहते हैं, खूब ल़डो लेकिन कायदे से। आपकी हर ल़डाई प्रेम में बदल जाये। और आप दोनों ही एक साथ क्रोध और प्रेम की धूपछांव से गुजरकर विकसित होते रहें।
प्रेमियों के लिए उन्होंने ब़डा अर्थपूर्ण नाम चुना है ः ‘दि इंटिमेट एनिमी।’ ‘अंतरंग शत्रु’ या ‘प्यारे दुश्मन’ यह हकीकत है कि स्त्री पुरुष एक साथ रहेंगे। और साथ रहेंगे तो उनके व्यक्तित्व टकरायेंगे। इस टकराहट को सृजनात्मक बनाने का प्रशिक्षण डॉ बाख के संस्थान में दिया जाता है।
सृजनात्मक टकराहट कैसी होगी? इस वैज्ञानिक युग में क्या यह आवश्यक नहीं है कि हम संबंधों का विज्ञान समझें? इसके लिए कुछ प्रयोग करके देखें। एक, अगर हम व्यक्तित्व के कुछ बुनियादी भावों को स्वीकार करें, जैसेे प्रेम और क्रोध मन के स्वाभाविक अंग हैं। उन्हें न तो दबाया जा सकता है, न हटाया जा सकता है। दो व्यक्ति जब एकदूसरे के करीब आने लगें तो इसे साफसाफ स्वीकार लें कि उनके बीच ये चीजें उभरेंगी। उनसे निपटने का एक फार्मूला बना लें। उसका उस वक्त अभ्यास कर लें जब दोनों अच्छी भावदशा में हों। जब क्रोध में हो तो क्रोध से निपटना मुश्किल है।
