
संबंद एक पहेली है
यह उस कोआन से भी बडी पहेली है जो जेन गु अपने शियों को देते है, योंकि उनकी पहेलिया यान के लिए होती है य अकेला होता है। जब म तुहें सबध की कोआन देता है तो यह आर भी अधिक जटिल ह योंकि तुम दो होअलगअलग ढग से पले, अलगअलग सकारों से पोषित, एकदूसरे के लिए विपरीत धुवों की तरह, विभि दिशाआें में खींचते हए एकदूसरे को नियति करते, मालकियत जमाते, अपना भुव जमातेहजारों समयाए है।
यान करते हए तो एक ही समया है कि शात कसे हआ जाए, कसे विचारों में न उलझा जाए। सबधों में हजारों समयाए है। यदि तुम मान हो तो समया है। जरा अपनी पनी के पास चुपचाप बठकर देखो तो तुहें पता लग जाएगावह एक दम तुम पर बरस पडेगी ‘तुम चुप यों हो? तुहारा मतलब या है?’ या फिर बोलो, तब मुसीबत में पडोगेतुम जो भी कहो तुहें हमेशा गलत समझा जायेगा।
कोइ भी सबध कभी भी ऐसे बिंदु पर नहीं आ सकता जहा समया न हो। आर यदि कभी तुम यह पाते हो तो सबध ऐेसे पडाव पर आ पहचे ह जहा कोइ समया नहीं तो इसका केवल इतना अथ है कि अब सबध रहे ही नहीं। सबध समा हो गए है याेा हार गए है आर उहें चीजों को वसे ही वीकारना पारभ कर दिया है जसी वे है। वे ऊब गए है वे अब आर नहीं लडना चाहते। उहोंने सब वीकार लिया ह आर कोइ सुधार नहीं करना चाहते।
या फिर अतीत में लोगों ने जबरदती एक तरह की सगीतमयता पदा करने की कोशिश की। यही कारण है कि सदियों से ी को ताडित किया गया हयह एक ढग था सबधों को सुयवथित करने का। बस ी को पुष को अनुसरण करने के लिए बाय कर दो फिर कोइ समया नहीं है। लेकिन यह भी सबध तो न हए। जब ी एक वत य नहीं ह तो समया तिरोहित हो जाती है। लेकिन साथ ही ी भी तिरोहित हो जाती है।
फिर वह मा उपयोग की वतु है। तब कोइ आनद न रहा आर पुष दूसरी ी की खोज करने लग पडता ह। यदि तुहें कभी कोइ सफल विवाह दिखाइ पडे तो बाहर से ही उस पर विवास मत कर लेना,थोडा गहरे भीतर जाना आर चकित हो जाओगे।
यह एक ढग है चीजों को सुलझाने का, अतीत में ऐसा ही होता रहा है। भविय में इसके विपरीत होने वाला हपति, पनी की आज्ञा का पालन करेगा। लेकिन बात वही है। सबध एक कोआन है। आर जब तक तुमने इससे भी अधिक मालिक बात को नहीं सुलझाया तो इस कोआन का समाधान कभी न खोज पाओगे।
ेम की समया तभी सुलझाइ जा सकती है जब यान की समया का समाधान मिल गया हो, उससे पहले नहीं। योंकि सच तो यह है कि समया यान न करने वाले दो य पदा कर रहे है।
दो य जो वय उलझन में है, जो यह नहीं जानते कि वे कान है वभावत वे एकदूसरे का उलझाव दुगुना करेंगे, उसे बढाएगे। जब तक तुम यान को उपलध न हो जाओ ेम पीडा बना रहेगा। एक बार तुमने जान लिया कि अकेले कसे रहा जाए, एक बार तुमने जान लिया कि अपने साधारण जीवन को कसे आनदपूवक जीया जाए, अकारण, तब सभावना ह दूसरी, दो ययाेिं के इके रहने की अधिक जटिल समया को सुलझाने की। केवल दो यान करने वाले य ेम से रह सकते हआर तब ेम पहेली न होगा। (जारी)
