अपने भीतर बैठे हुए परमतमा से संबाद सथापित करो
श्रीमदभागवत महापुराण में भु की सता ा करने के लिए कुछ उपाय बताए गए है। वसे आप यह अवय समझ लेना कि भगवान कभी किसी पर अस नहीं होते। वे तो सदासवदा आनदवप है, कणाकर है, दयालु ह आर परमकपालु है। पर यहा की सता से तापय है उनकी विशेष कपा ा करना। भागवत महापुराण में यही बताया गया है कि जो य सहनशील रहता है, ेम वाला बनकर जीवन यापन कर रहा ह, कणा आर सहानुभूति जिसके अदर समायी रहती ह ाणीमा के ति जिसके मन में पेम है, पक्षपात भेदभाव जिसके अदर किंचित मा नहीं है उसके ऊपर भु की रहमत जर बरसती है। उसका बेडा पार जर होगा आर उसके लिए कयाण का माग जर शत होगा। तीथ यााआें पर, पूजाअचना के लिए देव थानों पर जाना अछी बात है।
वसे भगवान की राह पर बढाए हए हर कदम की कीमत होती है। परतु जब तक आपके यवहार में मधुरता नहीं होगी, ेम नहीं होगा, साहाद सदभाव नहीं होगा, आपके कमा] में दक्षता नहीं होगी, तब तक पभु की विशेष कपा ा करना बडा मुकिल ह। इसलिए ाणीमा के ति मिता का भाव बनाए रखें, सब जीवों को दयाभाव से देखें, किसी के ति भेदभाव न बरतें। हर व अपने आपसे बाहर न रहे, दुनिया के यवहार में जानेअनजाने में कभी आपसे आर कभी दूसरों से गलतिया होना भी सभव है। किंतु हर समय बिछू की तरह डक मारने की अपनी आदत पर काबू पाइए। तभी आपको भु का यार मिलेगा।
सासारिक यवहार में अगर कोइ बा गलती करे तो उसे आप क्षमा करते ह, कोइ पागल आदमी गलत हरकत करे तो कहते है ये आपे से बाहर ह, इसीलिए अनजाने में ऐसा कर रहा है। इसी तरह अज्ञानी य भी होश में नहीं रहता, तो ऐसे लोगों को क्षमा करना भी बडपन है। तुरत कायवाही करने की भावुकता से बचिए। अपनी सहन करने की श को बढाइए। आपको आनद का अहसास होने लगेगा।
भारत में जातिवाद के नाम पर, छुआछूत के नाम पर आर रगभेद की समयाआें से कुछ अलगाव रहा। आपस में नफरत रही आर सहनश के अभाव में भेदभाव का यवहार होता रहा। जो आज भी कइ बार उभरकर सामने आ खडा होता ह। लेकिन इन कुरीतियों को मिटाने के लिए पहले भी आर आज भी समाज सुधारक अपना योगदान देते रहे।
माटिन लूथर ने अपने समय में रगभेद खम करने के लिए आदोलन चलाया। एक बार उनकी सभा में किसी ने उनके ऊपर जूता फककर मारा। उहोंने वह जूता हाथ में लेकर उस य को धयवाद देते हए कहा आप धय ह, जो बिना जूतों के याा करता था, उसको जूता देकर बडा उपकार किया ह। कपया इसके साथ वाला दूसरा जूता भी मेरी तरफ फेंक दें, तो मेरा काम चल जाएगा।
आप जरा सोचिए वह जूता फेंकने वाला य कितना शमिदा हआ होगा। लेकिन माटिन लूथर के उदारभाव के लिए वहा सभी उपथित जनों ने खूब जयजयकार आर खूब शसा की। इसलिए परमामा के उपहार को, पुरकार को वही पाता ह, जो सहनशील होता ह।
आपने कइ बार देखा होगा कि अगर कोइ किसी की मुसीबत में, बेबसी में, लाचारी आर मजबूरी में मदद करता ह, तो लोग उसे भगवान कहते ह आर समझते है। उसके लिए ाथना करते है, दुआ मागते ह कि हे भगवान! जिसने मुसीबत में हमारी सहायता की, सेवा की ओर हमें सुख पहचाया, उसे कभी अनजाने में भी दुख मत देना। उसके हिसे के दुखों में हम भी हिसेदार है। इस थान पर आकर इसानियत ऊची उठती ह। ऐसा आदमी से अथा] में भु के यार का अधिकारी बनता है।
इसके विपरीत अगर य वषा] तक मदिर जाता रहे, जल चढाता रहे, धूपदीप लगाता रहे आर दय से नफरत का भाव न मिटे, सेवा, सहयोग का सदभाव न जागे तो ऐसी तीथयााआें का, मदिर में आनेजाने का या लाभ है? इसलिए भगवान के बदों से जब भी ेमयार करने का माका मिले, सेवासहयोग का अवसर आए तो कभी मत चूकना। दुनिया में अगर कोइ घणा का पा हो उससे भी कभी घणा मत करना। सभी जीवों में उस भु के दशन करने की कोशिश करना। तभी उसका दीदार कर पाओगे।
मनुय तो मनुय जीवजतु,कीट पतगे, पशुपक्षी आर यहा तक कि पेडपाधों को भी ेमयार का भाव महसूस होता ह। उहें भी नफरत आर ेमपूण यवहार भावित करता ह। एक रशियन वज्ञानिक था जो पेडपाधों को समय से खादपानी देने के साथसाथ उनसे यार से बातें करता था, अपने हाथों से उहें सहलाता तो उनकी रगत देखने लायक होती ।
लेकिन वज्ञानिकों ने एकबार योग करने के लिए जब किसी कूर इसान को आदेश दिया कि इन गमलों को फेंक दो, तोड दो, या यहा कूडाकरकट लगा रखा ह तो पाधे भयभीत हो गए। हसतेमुकराते, लहलहातेपाधे कुहलाने लगे। फिर माली को बुलाया, माली ने अपने तरीके से यार भरे बोल बोलने शु किए, खाद आर पानी दिया तो फिर पाधों का मिजाज रगीन हो गया, उनका गाफ बदल गया। इससे पता चलता ह कि बेहोशी में जीने वाले,बोलनेचालने, चलनेफिरने से उसी के अनुप पेडपाधे भी ेम आर घणा के भावों को महसूस करते ह।
इसी तरह हिंसक जीवजतु भी ेम की भाषा को समझते है। वामी श्रानद के पास तिदिन एक शेर आकर उनके चरणों को चाटता था। योंकि एक बार उस शेर के पर में कोइ लबा काटा आरपार गड गया था। वामी जी ने देखा तो उनका दय उसके दुख को देखकर पसीज गया आर वे शेर के जानलेवा डर को भी भूल गए। उहोंने यार से उसके पर में चुभे हए काटे को युपूिवक निकाला, उसको दवा लगाइ जिससे उस हिंसक ाणी शेर की पीडा दूर हो गइ।
फिर वह शेर तिदिन वामी जी के पास आने लगा आर जसे वह अपने ऊपर वामीजी ारा किए गए उपकार के तिकज्ञता कट करने आता हो। इसलिए अगर आपके अदर ेम ह, सदभाव ह, कणा ह, दया ह तो आपको आनद ही आनद आएगा। भु का यार, उसकी सता आर विशेष कपा आपको तभी ा होगी जब आप अपने अदर बठे हए भगवान से सबध थापित कर लोगे। बाहर से चाहे आप कितना भी दिखावा करें जब तक अदर का सिटम ठीक नहीं होगा तब तक बाहर का नजारा भी आपको नजर नहीं आएगा।
बसत के मासम में आसमान वछ हो जाता ह, नदियों का जल वछ हो जाता है, सारी धरती श्रगार से सजधज जाती ह, जगली पाधों पर भी फूलखिल जाते ह। सरसों पर पीले फूल, सरकडों पर सफेद फूल, लालबगनी हरेबसती,काले नीले पीले सभी मती के रगों से पेडपाधे महक उठते ह। शहर से बाहर जाकर देखें तो पता चलता है कि खिले हए फूलों की पखुडियों पर ओस की बूदे मोतियों की तरह चमकती ह। पर इन सब ाकतिक यों से आनदित तो वहीं हो पाएगा जिसके अदर ेम होगा। अदर का मासम जब ठीक होगा तभी बाहर की दुनिया सुहानी लगेगी। इसीलिए कहा गया ह कि जब अदर आर बाहर की थिति ठीक होगी, ेम पूण होगी, आनदमय होगी तभी परमामा की रहमतों को आपको एहसास होगा। परमामा की परम भ का एक ही सबसे अछा ढग ह कि इसान ेमपूण हो जाए। तिकूल थितियों में भी उसे भु का शुक मनाना आ जाए, वह हर हाल में शात रहना सीख जाए। बुराइयों में भी वह अछाइया ढूढना सीख जाए, दुगुणोंदुयसनों से जो अपने आपको बचा लेता ह, वह भगवान की कपाआें से मालामाल हो जाता है।
