
कंजूस साचचा प्रेमी नही हो सकता
प्रेम बडेसेबडा धन है। जिसने ेम को पा लिया, उसे धन मिल गया। वह अपनी गरीबी में भी हीरेजवाहरातों का मालिक है। लेकिन जिसने प्रेम नहीं पाया,उसके लिए फिर एक ही राता है कि वह धन इका करे, ताकि थोडासा आवासन तो मिले कि मेरे पास भी कुछ है। धन ेम का सटीटयूट है, परिपूरक है। इसलिए कपण आदमी ेमी नहीं होता। कजूस ेमी नहीं होताहो ही नहीं सकता, नहीं तो वह कजूस नहीं हो सकता। ये दोनों बातें एक साथ नहीं घट सकतीं, ये विपरीत ह। जितना तुम धन को इका करते हो, उतना ही तुहारा ेम पर भरोसा कम है। तुम कहते हो कल या होगा? बुढापे में या होगा? आथिक हालत बिगड जाएगी तो परिथिति कसे सहालूगा?
ेमी कहता है या करेंगे, जो ेम आज करता है, वह कल भी करेगा। जिसने आज ेम किया आर भरपूर किया है, वह कल भी फिक लेगा।
अगर तुम किसी को पाते हो, जो तुहें ेम कर रहा है तो बुढापे की चिंता न होगी। लेकिन अगर तुहारा कोइ नहीं ेमी, तुमने किसी को इतना ेम नहीं दिया, न कभी किसी का इतना ेम लिया, तो तिजोडी ही सहारा ह बुढापे में आर फिर तुहे डर है, ेमी तो धोखा दे जाए, तिजोडी कभी धोखा नहीं देती। ेमी का या भरोसा, आज साथ है, कल अलग हो जाए। धन यादा सुरक्षित मालूम पडता है। ेमी मानेनमाने , धन तो सदा तुहारी मानकर चलेगा। धन तो कोइ अडचन खडी नहीं करता, मालकियत पूरी वीकार करता ह। फिर धन का तुम जसा उपयोग करना चाहो, वसे कर सकते हो। ेमी का तुम उपयोग नहीं कर सकते। ेमी ेम में कुछ करे, ठीक, ेमी के साथ जबरदती नहीं की जा सकती।
मनोवज्ञानिक कहते ह, छोटा बा जब पदा होता है तो अगर मा उसको ेम करती हो, तो वह यादा दूध नहीं पीता। आपको अनुभव होगा, अगर मा बे को ठीक ेम करती है तो मा सदा परेशान रहती ह कि उसको जितना दूध पीना चाहिए, वह नहीं पी रहा है। वह नहीं खा रहा ह। वह उसके पीछे लगी ह चाबीस घटे कि आर खा। यों? योंकि बा जानता ह ,जिस तन से दूध अभी बहा ेम से भरा हआ, जब भूख लगेगी फिर बहेगा। भरोसा ह। लेकिन अगर मा बे को ेम न करती हो, नस हो, मा न हो तो बा छोडता ही नहीं तन। योंकि बे को डर ह तीन घटे बाद भूख लगेगी, नस उपलध नहीं रहेगी, इसका कुछ पा नहीं है। भविय अधकारपूण ह। इसलिए तुम देखोगे, जिन बों को प्रेम मिला उनके पेट बडे नहीं पाओगे। जिन बों को प्रेम नहीं मिला, उनके पेट बडे पाओगे। (जारी)
