
दर्पण बन जाता है संबंद
प्रेम महवपूण है, सीखने के लिए एक अछी परिथिति , लेकिन केवल सीखने के लिए। एक पाठशाला काफी है, तीन पाठशालाए अधिक हो जाएगी। आर तीन याेिं से तुम अधिक न सीख पाओगे, तुम मुसीबत में फस जाओगे। एक के साथ रहना बेहतर है ताकि तुम समगता से उसके साथ जी सको, ताकि तुम उसे अछी तरह समझ पाओ आर अपनी लालसाआें को भी ताकि तुम कम उलझन में हो, कम पीडा में हो योंकि ारभ में ेम एक मूछा में हइ घटना है, यह मा जविक है, इसका कोइ अधिक मूय नहीं है। केवल जब तुम इसके ति सजग होते हो, अधिक यानपूण होते हो तो यह मूयवान होना शु होता है, इसका महव बढना शु होता है। एक ी या एक पुष से घनिता बेहतर है बजाए बहत से उथले सबधों के।
ेम कोइ मासमी फूल नहीं है, इसे खिलने में वषा] लग जाते ह। आर जब यह खिल जाता है तभी बायोलाजी, देह के पार जाता है आर इसमें अयाम का कुछ रग आता है। कइ याेिं या पुषों के साथ रहने से तुम उथले रह जाते हो। इसमें उथलापन है, तुम यत भी हो जाते हो लेकिन वह यतता आतरिक पाढता में सहायक नहीं होती। लेकिन एक य के साथ लबे समय के लिए रखे गए सबध अयत लाभदायक सि होते ह योंकि तुम एकदूसरे को गहराइ से समझ पाते हो। ऐसा यों है? आर ी या पुष को समझने की आवयकता ही या है?
आवयकता इसलिए है योंकि येक पुष में ण प भी ह आर येक ी में पुष प। इसे समझने का सरलतम सवाधिक ाकतिक ढग एक ही है किसी के साथ गहरे आमीय सबध थापित करना। यदि आप पुष ह तो किसी ी के साथ गहरे आमीय सबध बनाए। विवास को जमने दे ताकि सब बाधाए मिट जाए। एकदूसरे के इतने नजदीक आ जाए कि आप ी के भीतर गहरे झाक सकें आर ी आपके भीतर गहरे झाक सकें । एकदूसरे के साथ बेइमानी न करें। आर यदि आपके अनेक सबध है तो आपको बेइमान होना पडेगा, निरतर झूठ बोलना होगा। आपको झूठ बोलना ही पडेगा, आपको पाखडी होना पडेगा, आपको वो सब कहना पडेगा जो सच नहीं हआर वे सब आप पर सदेह करेंगे।
किसी ी का विवास जीतना बहत मुकिल है यदि आपके अय सबध भी ह। एक पुष को धोखा देना आसान ह योंकि वह बु मे जीता ह, लेकिन ी को धोखा देना कठिन है, लगभग असभव है योंकि वह अतज्ञा से जीती ह। तुम उससेें नजरें न मिला सकोगे, तुहें भय लगने लगेगा कि वह कहीं तुहारा दय न पढ ले जहा बहत झूठफरेब छिपा है। तो यदि तुहारे कइ सबध ह तो तुम ी के मनस में गहरे न जा सकोगे। आर इसी बात की आवयकता हअपने ण प को पहचानना। सबध दपण बन जाता है। ी तुहारे भीतर झाकना ारभ करती ह आर अपने पुष प को पहचानती ह, पुष ी के भीतर देखता ह आर अपना ण प जानने लगता ह। आर जितना तुम ण प के ति जागक होते होविपरीत धुव उतना ही तुम पूण होते हो, उतना ही सगठित। जब तुहारा आतरिक पुष आर आतरिक ी एकदूसरे में खो जाते ह, विलीन हो जाते ह, जब वे अलग नहीं रहते, जब वे एक पूण इकाइ बन जाते ह, तब तुम एक य बनते हो। काल गुताव जुग इसे ‘ाेसेस आफ इडीबीजुएशन’, य होने की किया कहता है। वह ठीक कहता है। आर ऐसा ही ी के साथ भी होता है। लेकिन बहत से लोगों के साथ खेलना तुहें उथला बना देता ह। यह तुहें बहलाता भी है, यत भी रखता है लेकिन ाढ नहीं करता। आर एक ही बात जो अतत काम आती है, वह है ाढता। आर उस ाढता के लिए यह आवयक है कि तुम अपने दूसरे प को पहचानो।
सरलतम उपाय यही है कि पहले तुम बाहर की ी को जानो ताकि अपने भीतर की ी को पहचान पाओ। बिलकुल एक दपण की भातिदपण तुहारे चेहरे को तिबिंबित करता ह, तुहारा चेहरा दिखाता ह। ी तुहारा दपण बन जाती ह, पुष तुहारा दपण बन जाता ह। दूसरा तुहारे चेहरे को तिबिंबित करता है। लेकिन यदि तुम बहत से दपणों से घिरे हो आर एक दपण के ति भमित कर रहे हो तो तुम अतयत हो जाओगे विक्षि हो जाओगे।
