सपूण मानव समाज के िलये यीशु का सदेश
जबजब पवी पर पाप का बोझ बढा। शतानों ने हकूमत करनी चाही तबतब पालनहार मुदािता ने अनेक पों में जम लेकर पवी को सकट से मु कराया। गीता में भगवान श्रीकण ने कहाहै
यदायदा ही धमय लानिभवित भारत।
अयुथानममय तदामान सजायम।।
जब भी आर जहा भी धम का पतन होता ह आर अधम की धानता होने लगती ह, तबतब म अवतार लेता ह।
जब सपूण एशिया आर यूरोप का क्षे रोमन समाटों के अयाचारों से गत था। जनता दुखी थी, अयायी अयाचारी रोमन बलात उन पर अपने कानून लादते थे आर धम परायण फिलीतीनी उहें सहने पर मजबूर थे। पवि धामिक पुतक बाइबिल के यशायाह भवियवा की पुतक में भु यीशु के जम के सबध में भवियवाणी की गयी, िजस यहोह ने कहा हहमारे लिये एक बालक उप हआ, हमें एक पु दिया गया ह आर पभुता उसके कधे पर होगी आर उसका नाम अदभुत यु करने वाला पराकमी परमेवर, अतकाल का पिता आर शाति का राजकुमार रखा जाएगा।
उसकी भुता सवदा बढती रहेगी आर उसकी शाति का अत न होगा। आर फिर वह समय आ गया जब देवदूतों ने सुसमाचार सुनाया कि ‘मुदािता ने जम ले लिया ह आर वह सबका उार करेगा।’ तब भिमित मनुय को समुचित दिशा लय की ओर करने हेतु सवशमािन परमपिता परमेवर पवी पर फिलीतीन देश के बेथलहम नामक गाव में यहदी वश के एक गरीब परिवार में यीशु के प में अवतरित हये। उस समय घटना के सूचनाथ वगदूतों ने यह सदेश उदघोषित किया कि पवी पर उसके कपापााें को शाितिमले। उनका कयाण हो।
२५ दिसबर यानी किसमसडे अपने आप में अनेक खुशिया समेटे हये आपसी सदभाव , साहाद एव जनकयाण की भावना हेतु सदा ेरित करता ह।
रोमन पचाग के अनुसार यह याहार रोम में सन ३३६ में मनाया गया था। रोम सामाय के पूर्वी भाग में ६ जनवरी को एक याहार यीशु के कट होने व नामकरण के उपलय में मनाया गया था, जबकि येशलम में सिफ यीशु का जमदिन मनाया गया था। चाथी शतादी के दारान पूव के गिरजाघरों में भी यीशु का जम २५ दिसबर को ही मनाया जाने लगा था।
येशलम में किसमस को कभी वीकार नहीं किया गया व इसा मसीह का जमदिन ६ जनवरी को ही मनाया जाता था, कि समस के पूव में मायता मिलने के बाद इसे भु काश के प में मनाया जाने लगा।
किसमस के उदगम के साथ कइ कथायें चिलत है । इसा मसीह का जमदिन गर इसाइयों ारा सदियों के मय सूय की थिति देखने की था के साथ मनाया जाता ह। रोम में आनदोसव (२७ दिसबर रोम के वण युग का याहार) शादी याह व उपहारों के आदानदान का उपयु समय माना जाता था। दिसबर २५ को इरान में रहयमय भगवान मिथरा के जमदिवस के प में मनाया जाता है ।
उन दिनों जब यीशु मसीह आये तब यह आशा थी कि परमामा उनके वश में जम लेंगे , किंतु ऐसा न होने पर यहूदियों ने इसा मसीह को भु मानने से इकार कर दिया।
यहा से शुआत होती ह शतानों ारा दी जाने वाली यातनाओ आर भु यीशु के क्षमादान करने की।
भु यीशु ने जगहजगह जाकर लोगों को उपदेश व वचन दिये, रोगियों को आरोय दान िकया एव असहायों के सहारा बने।
उहोंने अनेक उपदेश दिये उनमें से एक का विवरण इस कार है
एक बार एक गाव में भु यीशु ने लोगों को एक बताया कि एक बीज बोने वाला बीज बोने निकला। बोते समय कुछ बीज माग के किनारे गिरे आर पक्षियों ने आकर चुग लिया। कुछ पथरीली भूमि पर गिरे जहा उहें बहत मीि नहीं मिली आर झाडियों ने बढकर उहें दबा डाला पर कुछ अछी भूमि पर गिरे, आर फल लाये, कोइ सा गुना, कोइ साठ गुना कोइ सा गुना।
इस ात का अथ समझाते हये भु यीशु ने कहा कि जो दाने माग पर गिरे आर पक्षियों ने आकर चुग लिया वह उन लोगों के समान ह जो परमामा की बातें सुनते ह लेकिन अमल में नहीं लाते।
पथरीली जमीन पर गिरे हये दाने उन लोगों के समान ह जो परमामा की बातें सुनते ह, अमल में लाते ह लेकिन जदी ही शतान की बातों में आकर सय माग से हट जाते ह। अछी भूमि पर गिरे अ के दाने उन लोगों के समान ह जो परमामा की बातों पर विवास करते ह आर पूरी तरह अमल में लाते ह ऐसे लोगों को समय आने पर आशा से अिधक फल कीा होती ह।
समत उपदेशों का सार यीशु मसीह ने पेम कहा ह। उहोंने मानव मा से ेम करने को कहा। परपर ेम भाव से रहने को कहा एव सेवा भाव से ओतोत हो कम करने को कहा।
‘बज्ञान’ के अनुसार ाणी जब तक ‘परमामा’ का मरण नहीं करता वह मुदा ह आर जसे ही परमामा का मरण व साक्षाकार हो जाता ह। वह जीवित हो जाता ह। ज्ञान वह श ह जिसमें माया पी पर्दे को काटा जाता ह आर ेम वह श ह जिससे परमामा, भ के दय में बदी बनकर आ जाता ह।
इसलिए भु यीशु ने कहा िक
सय आर याय किंतु ेम सर्वोपिर ।
सव धमा] का याग कर एक मा मेरी ही शरण में आओ। म तुहें समत पापों से मुत कर दूगा। तुम डरो मत।
इस कार अपनी शरण में आये भ का पूरा उारदायिव भगवान अपने ऊपर ले लेते ह आर उसके समत पापों को क्षमा कर देते ह।
भु यीशु ने अपने सदेश में ‘क्षमा’ व ाणी मा से ेम करने पर बल दिया ह। तभी तो वे शाति के राजकुमार कहलाये। उनके सदेश किसी एक के लिये नहीं वरन सपूण मानव समाज ह कि लिये जिहें हमें आमापित करना ह।
विनोद कुमार गायेल
