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ध्यान और नींद का अतर

Swatantra Vaartha  Wed, 14 Jul 2010, IST

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ध्यान और नींद का अतर

यान के अतिरि मयु का भय कभी नहीं कटता।तो यान का पहला अथ है अवेयरनेस आफ वनसेफ।

हम सदा, जब भी होश में है, तो हमारा होश जो है वह अवेयरनेस अबाउट, किसी चीज के बाबत ह सदा। वह कभी अपने बाबत नहीं है। इसलिए तो हम अकेले बठे तो हमको नींद आनी शु हो जाती है, योंकि वहा या करें? अखबार पढे, रेडियों खोलें, तो थोडा जागना सा मालूम पडता है।

अगर एक आदमी को हम बिलकुल अकेेले मे छोड दें, अधेरा कर दें कमरे में। अधेरे में इसीलिए नींद आ जाती ह आपको, योंकि कुछ दिखाइ नहीं पडता, तो काशसनेस की कोइ जरत नहीं रह जाती। कुछ चीज दिखाइ पडती नहीं, तो अब या करें, सिवाय सोने के कोइ उपाय नहीं मालूम पडता। अकेले पड जाए, अधेरा हो, कोइ बात करने को न हो, कुछ सोचने को न हो, तो बस आप गए नींद में। आर कोइ उपाय नहीं है।

यान रहे, नींद आर यान एक अथ में समान है, एक अथ में भिޟ। नींद का मतलब है आप अकेले है, लेकिन सो गए है। यान का मतलब ह आप अकेले ह, लेकिन जागे हए है। बस इतना ही फक है । अगर आप अपने अकेलेपन में आर अपने भीतर जाग सकते ह अपने ति

एक आदमी बु के सामने बठा ह कि एक दिन आर अपने पर का अगूठा हिला रहा ह। बु ने कहा कि अगूठा यों हिलाते हो?

उस आदमी ने कहा, छोडिए! ऐसे ही हिलता था , मुझे कुछ पता न था। बु ने कहा, तुहारा अगूठा हिले आर तुहें पता न हो! अगूठा किसका ह यह? तुहारा ही ह?

उसने कहा , मेरा ही ह। लेकिन आप भी कहा की बातें कर रहे ह ! आप जो बात करते थे, जारी रखिए।

बु ने कहा, वह म नहीं कगा अब, योंकि जिस आदमी से म बात कर रहा है, वह बेहोश है। पता नहीं तुम मेरी बातें सुन भी रहे हो कि नहीं

बु ने कहा, तो अपने अगूूठे के हिलने का आगे से होश रखो। तो उससे दोहरा होशजो होश में ह अगूठे के ति, उसका होश भी पदा हो जाएगा।

अवेयरनेस इज आलवेज डबल एरोड। अगर हम उसको योग करें तो उसका एक तीर तो बाहर की तरफ रह जाएगा आर दूसरा तीर भीतर की तरफ हो जाएगा।

तो यान का पहला अथ ह कि हम अपने शरीर आर वय के ति जागना शु करें। यह जागरण अगर बढ सके तो आपका मयुभय क्षीण हो जाता ह। आर जो चिकिसा शा मनुय को मयु के भय से मु नहीं कर सकता, वह चिकिसा शा मनुय नाम की बीमारी को कभी भी वथ नहीं कर सकता। हा, चिकिसाशा कोशिश करता ह। वह कोशिश करता ह उम लबी करके। उम लबी करने से सिफ मयुु की पतीक्षा लबी होती है, आर कोइ फक नहीं पडता। आर लबी तीक्षा से छोटी तीक्षा अछी ह। उम लबी करने से सिफ मात आर भी दुखदायी होती चली जाती ह।

या आपको अदाज ह कि जिन मुकों में चिकिसाशा ने लोगों की उम यादा बढा दी है, वहा एक नया आदोलन चल रहा है, वह है अथनासिया का। वह यह ह कि बूढे कह रहे ह कि हमें मरने का अधिकार होना चाहिए काटिटयूशन में। योंकि आप हमको लटकाए चले जा रहे ह आर हमको अब जिंदा रहना बहत कठिन हो गया ह। आप तो लटक सकते ह।

एक आदमी को आसीजन का सिलेंडर रख कर न मालूम कितनी देर तक लटका सकते है आर उसको जिंदा रख सकते ह। लेकिन उसकी जिंदगी मरने से बदतर हो जाएगी। (जारी)


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