भागने से नहीं, जागने से बात बनती है
जीवन मे कठिनाइयो से भागना नहीं जागना है। कठिनाइया आपके जीवन में बाधा डालने नहीं आती, आपको नापने आती है। बाधाआें को लाघकर आगे बढने वाले ही सच में महान है। कतय के रथ से उतरकर भागने वालेे अजुन को भगवान श्रीकण ने नयी सजीवनी दी कि जागो। अपना उार वय करनेेे के लिए तपर हो, इतजार मत करना कि काली रात के अधेरे को दूर करने के लिए कोइ आर सूय बन कर आयेगा। अपने सूय खुद बनो आर अधकार दूर करो। मत सोचना चुपचाप बठ रहकर कि व बुरा है, अपना कम हर थिति में जारी रखना, उसे किसी भी कीमत पर कभी रोकना मत।
कइ बार य समयाआें से भागना चाहता है। समयायें सामने हो आर आप मुह मोडना चाहते है। जसे बीि को देख कर कबूतर आखें बद कर लेता है। इससे बात नहीं बनती। चिंता की बीि सबके सामने हमेशा बठी है। भागने सेे नहीं, जागने से बात बनती है। कबूतर को बताना पडेगा कि भगवान ने तुहें उडने की ताकत दी है, तूू उड जा। समयाआें से भागने से समया कम नहीं होगी।
मनुय शराब के सहारे समया से भागता हनशा करता है, समया का सामना नहीं करना चाहतापर इससे होता या ह। कुछ नहीं बकि शराब की आदत हो जाती ह आर आगे चलकर यह भी एक नयी समया ही बन जाती है। जसे अगर हमारे पाव में काटा लग जाए आर हम उसे निकाले बिना ऊपर से मरहमपटटी करना चाहते ह तो या होगा? वह ठीक होने की बजाय आर यादा हो जाएगा। इसलिए काटा निकालकर चिंता मु हो जाओ। पहले अपने को देखो कि कहा उलझे हुए है,वहा से सुलझने की कोशिश करें। चिंता, निराशा को जम देती है आर निराश मन लेकर आप कुछ नहीं कर सकोगे। माली भी पाधों को काटता है। समाज के वातावरण को नया प देने के लिए कुछ काटछाट तो करनी ही पडेगी।
जीवन में महवपूण चीज ह कि सघष आर सघष के लिए आपको तयार होना पडता है आर अपने आपको तयार करके ही आप इसका सामना कर सकते है। वसे भी इसान अपने आपसे भाग नहीं सकता। उसे जिंदगी में आने वाली समयाआें का सामना चाहने आर न चाहने, दोनों ही थितियों में करना पडता है तो बजाय भागने के यों न पहले ही इसका हल सोच लिया जाये।
किसी भी समया का हल कायरता से मत करो, बहादुर बन कर करो जिससे कि तुहें अपने आप पर विवास हो कि तुम किसी भी थिति का सामना कर सकते हो। अगर तुम भगवान में भरोसा करते हो तो अपनी चिंतायें भु के हवाले कर दो आर कहो किहे भु ! जब तेरी गाडी में बठ गया ह तो चिंता तेरे हवाले। इस तरह अपने आपको भु को समपित कर दो , निचितता आयेगी। आगे बढने के लिये आवयक है कि पहले हम वय में विवास रखें आर फिर इवर में। जिसे वय में विवास नहीं उसे कभी भी इवर में विवास नहीं हो सकता। इसलिये आमविवास जरी ह। आमज्ञान के बिना परोपकार की बात करना दूसरों को ठगना है। दूसरों से जसा यवहार चाहते हो, वसा दूसरे के साथ करो। दूसरों के पति कयाण की भावना रखो, विन डालने वाले मत बनो। कुछ लोग ऐसे होते ह चलतेचलते टाग अडा कर दूसरे को गिरा दिया, उहे विन डालने में ही सतोष मिलता है। यह पिशाच वाली वा है। बीज बो दिये राक्षस वा केऐसे लोग अपने ही अधेरे में जीते है। एक बार गुनाहों के काटे मेें पर रख दिया तो फिर जीवन में तो काटे ही काटे है। इसलिये गुनाहों से बचते हए अपने को वही बनाओ जिसकी फसल काटने में आनद आये। रावण की नगरी में विभीषण, दुर्योधन की नगरी में विदुर बनकर रहने वाला ही सही अथा] में जीता है। दिखावा करना, घमड में चूर होना, विनम न होना, झुकने की आदत न होना, दूसरे से कठोर वचन कहने से न चूकनाविचार करकेे देखना, यह सब अवगुण हमारे अदर तो नहीं है। ये आसुरी वाया है। ऐसे लोग देखने में चाहे सुदर दिखाइ देते हो, लेकिन वातव में सुदर नहीं होते ह। दुनिया की नजर में सुदर बनने से बात नहीं बनती, परमामा के दरबार में सुदर बनकर जाओे तो उसकी गोदी में बठने के लायक बन सकोगे। जागत य ही परमामा की कपा का पा बनता है।
जीवन उसी का साथक ह जो अपने जीवन का दीपक बुझने से पहले दूसरे के होठों पर मुकराहट आर खुशिया देे सके। जसे किताबों में रखे हए गुलाब महकते रहते ह, वसे ही अपने कार्यो की सुगध बिखेर कर जायें जो लाखों सोये हए लोगों को जागत कर सके। मनुय तेरा जम दुनिया के कीचड में फसने के लिए नहीं हआ।
कमल कीचड को पार कर अपना सादय लेकर खिलता ह। मनुय ! तू भी ससार की आस से ऊपर उठकर अपने को कमल की तरह खिला ताकि परमामा तुहें यार कर सके। जिस पर उसकी कपा बरसती है उसका जीवन पलट जाता ह। सारे ससार का मूल परमामा है, अपने को मूल से जोडो।
परमामा से जुडा य आनदित आर जागत रहता है, नहीं तो य भटकता रहता है। परमामा से जुडा य लाखों को जोड देता ह। महान पुषों के नजदीक बठो, उनके जीवन को धारण करो ऐसा करने से समाज में जागति आयेगी। दुनिया के कितने भी सुखसाधन इके कर लो, जीवन में जागति के बिना यह सब यथ है। ससार में बसने के लिए होश की जरत है आर होश तब आयेगा जब ज्ञान की आख खुलेगी, यह ज्ञान की आख गु देता है ज्ञान का पहला लक्षण है सही गलत का निणय करना। जिसके पास ज्ञान है वह शुभ करेगा, शुभ बोलेगा, शुभ विचारेगा। आखों से भला देखें, हाथों से भला करें, कानों से भला सुनेंभलाइ हमारे अदर इस तरह बठ जाये जिससे हमारा कयाण हो। सबकी मगलकामना करें। अपने दय के ेम को दूसरों तक पहचाओ, ेम बाटने वाले बनो। कोइ आडे व में आपके काम आये तो उसका धयवाद करते जाओ, जिसका फल होगा कि दुनिया में अछाइ बढेगी।
