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जीवन को सहज भाव से जीने का यास करें

Swatantra Vaartha  Wed, 28 Jul 2010, IST

जीवन को सहज भाव से जीने का यास करें

बहत यादा महवकाक्षाए रखोगे तो सब कुछ तो मिलेगा नहीं, मन टूटेगा आर मन का सपना टूट जाये तो य घोर निराशा में आ जाता है, फिर उसी थिति में रोने के सिवाय निराशा के गीत ही गायेगा। मजबूरी में जीवन बिताओगे तो जी नहीं पाओगे। मन सता से भरपूर रहना चाहिये। उन विचारों को कभी मन मे मत आने दो जो जीवन को निराशा से भर दें। विचार श बहत बडा काम करती है।

विचारों में निराशा वाली थिति आ जाय तो निराशा घुन की तरह खोखला कर देती है। निराशा आती है चिंता से, चिंता आती है भविय के भय से। भविय का भय हर किसी को सताता है। अनेक आशकायें मन में रहती है, फिर शोकघणा जागती है। परिणाम यह है कि हम जीवन की बगिया को फूलों की तरह फुता से भरने की बजाय रेगितान बना लेते है। अपने अदर सता को वाहित करते रहें तो समझ लेना आ जाय, घबरा कर निराश नहीं होना, रोना नहीं। यान रखना रोने से दुख कम नहीं होता है, आसू बहाने से कोइ चीज वापस नहीं आती है। उससे तो मुह मोडना ही पडेगा। आज नहीं तो महीने दो महीने बाद, साल दो साल बाद भूलना ही पडेगा बीती बातें याद करने से मन में घोर निराशा आती ह।

बूढा आदमी सदा भूत में जीता है, जवान सदव भविय में जीता हदोनों का मेल नहीं हो पाता है। वतमान में जियो, भूतभविय की चिंता में जीवन का अमूय समय मत बरबाद करो। इसलिये अपने आपको बदलो आर सहज भाव से जीने का यास करो जिससे जीवन खुशियों की बगिया बन जाये आर तुम उसमें सता से अपने जीवन के दिन गुजार सको। हमारे जीवन में खुशिया आर दुख के दिन लाने वाले कुछ हद तक हम भी होते ह आर अगर हमें ही खुशी से जीवन जीना आ जाए तो फिर या कहना। तो आज से ही आप भी जीवन को सही तरह से जीने का तरीका सीख जाइये आर खुशियों के फूल जीवन की बगिया से ति दिन तोडिये।


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