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बिन बताए सब कुछ जान जाता है प्रेम

Swatantra Vaartha  Wed, 8 Sep 2010, IST

बिन बताए सब कुछ जान जाता है प्रेम

वागसु कहता है कि यदि एक य भीड भरे बाजार में एक अजनबी के पर पर अपना पर रखकर उसे कुचल देता ह तो विनमता से क्षमा याचना करता है, आर अपनी सफाइ देते हए कहता है इस जगह भीड कितनी है !

जहा दूसरा अजनबी हो आर उससे कोइ रिता न हो तो क्षमा मागने की आवयकता होती है। पीकरण देने की वहीं जरत होती है, जहा ेम न हो। यदि ेम है तो पीकरण देने की वह जरत ही नहीं है, दूसरा वय समझ जाएगा। यदि ेम है तो क्षमा मागने की भी कोइ आवयकता नहीं, दूसरा वय समझ जाएगोम हमेशा कुछ बिना बताये जान जाता है।

इसलिए ेम से ऊची कोइ भी नतिकता नहीं होती, हो भी नहीं सकती। ेम ही सर्वो नियम है, लेकिन यदि ेम नहीं है तो उसके थान पर तिथापन की आवयकता होती ह।

बाजार में किसी अजनबी का पर कुचल देने पर क्षमा मागने की जरत होती ह आर सफाइ देना भी आवयक हो जाता है।

इस सदभ में यह बात समझने जसी है। पचिम में एक पति भी क्षमायाचना करता है, एक पनी पीकरण या अपनी सफाइ देती हुइ ‘क्षमा करें, ‘कहती है। इसका अथ है कि उनके बीच ेम तिरोहित हो गया है। इसका अथ है कि येक य अजनबी बन गया ह आर घर जसी कोइ चीज रह ही नहीं गइ। हर थान एक भीड भरा बाजार बन गया है।

पूरब में इस बात का विचार करना भी असभव है। लेकिन पचिम के लोग सोचते ह कि पूरब के लोग कठोर आर खे ह। एक पति अपनी पनी को कभी कोइ पीकरण देगा ही नहीं कोइ आवयकता ही नहीं ह योंकि अजनबी नहीं ह, आर दूसरा भलीभाति समझ सकता ह।

जब दूसरा तुहें नहीं समझ सकता, तभी क्षमा मागने की जरत होती है। आर यदि ेम नहीं समझ सकता तो क्षमा मागने से भला या हो सकता है?

यदि पूरा ससार ही घर बन जाए तो सभी क्षमायाचनाए लु हो जायेंगी आर सभी पीकरण यथ हो जाएगे। तुम पीकरण इसीलिए देते हो योंकि दूसरे के बारे में तुम निचित प से कुछ नहीं जानते। सघष बचाने के लिए सफाइ देना एक चाल ह। सघष टालने के लिए क्षमायाचना करना एक उपाय ह। लेकिन वहा सघष तो ह ही आर तुम उससे डरे हए हो।(जारी)


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