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जागरण की लहर पर सवार हो जाओ

Swatantra Vaartha  Tue, 9 Feb 2010, IST

जागरण की लहर पर सवार हो जाओ

सुबह का समय ध्यान के लिए सबसे अच्छा है। पूरी तरह के विश्राम के बाद तुम अपने केंद्र के सबसे करीब होते हो। किसी भी और समय की अपेक्षा सुबह चेतन रूप से अपने केंद्र मे प्रवेश कर जाना सबसे सरल होता हैक्योंकि सारी रात तुम केंद्र पर ही थे, बस अभीअभी वहां से वापस लौटे हो। हजारों चीजों का जंजाल अभी शुरू नहीं हुआ है। तुुम ब़ढ रहे हो संसार की ओर, उसके जंजाल की ओर लेकिन तुम्हारा अंतर्केंंद्र अभी पास ही है।

्रबस थ़ोडा सा घूम कर देखो और तुम देख पाओगे उसे जो हैः सत्य, परमात्मा, बुद्धत्व। तुम उसे देख पाओगे जो तब उपस्थित था जब सपने रुक गए थे और तुम गहरी नींद में चले गए थे। लेकिन उस समय तुम अचेतन थे।

गहरी नींद तुम्हें तरोताजा कर जाती है क्योंकि भले ही अचेतन रूप से, लेकिन तुम अपने प्राणों के केंद्र में उतर जाते हो। उस समय बाहरी जगत की सारी थकान विदा हो जाती है, सब घाव भर जाते हैं, सारी धूल मिट जाती है। तुमने एक स्नान कर लिया, अपने प्राणों में गहरा गोता लगा लिया।

तो सुबह जब तुम उठते हो अपने केंद्र के बहुत करीब होते हो। जल्दी ही परिधि तुम पर हावी हो जाएगी, तुम्हें व्यस्तताआ के जगत में प्रवेश करना होगा। इसके पहले कि तुम बाहर की यात्रा पर निकलो, अपनी दृष्टि को भीतर ले जाओ ताकि चेतन रूप से तुम देख सको कि तुम कौन हो। ध्यान का इतना ही प्रयोजन है।

इसलिए सदियों से भोर का उपयोग किया गया है। जब पूरी पृथ्वी जाग रही है, पक्षी जाग रहे हैं, सूर्य जाग रहा है और पूरा वातावरण जागरण से भरा हुआ है, तुम उस अवसर का उपयोग कर सकते हो।

तुम जागरण की इस लहर पर सवार होकर अपने प्राणों के केंद्र में प्रवेश कर सकते होसचेत, जागरूक, होश से भरे। और तुम्हारा पूरा जीवन रूपांतरित हो जाएगा। तुम्हारे पूरे दिन की गुणवत्ता बदल जाएगी क्योंकि तुम्हारे पांव एक अलग िदशा में प़डेंगे।

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