सम्पादकीय

रुश्दी के लिए कोई मौका नहीं

रुश्दी के लिए कोई मौका नहीं आखिरकार राजस्थान सरकार ने भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी को वीडियो लिंक के माध्यम से भी जयपुर साहित्य महोत्सव में पहुंचे साहित्यकारों से बातचीत करने की अनुमति नहीं दी।

वैज्ञानिक खोजों से बचना मुश्किल

वैज्ञानिक खोजों से बचना मुश्किल पिछले दिनों ‘स्वतंत्र वार्ता’ में प्रकाशित ‘ईश्वरीय विधान’ संबंधी लेख प़ढने को मिला। परिवर्तन जीवन का नियम है। जीवन/प्रकृति में नित नये बदलाव हो रहे हैं। हम उससे अछूते नहीं रह सकते, क्योंकि बदलाव की धारा को अपने तरीके से बदला नहीं जा सकता है।

असंख्य बीमारियों के केन्द्र आसिफ़ ज़रदारी

असंख्य बीमारियों के केन्द्र आसिफ़ ज़रदारी पाकिस्तान के समाचार पत्रों में इन दिनों राष्ट्रपति आसिफ जरदारी की बीमारियां बहुचर्चित हैं। जरदारी पहली बार बीमार हुए हों ऐसी बात नहीं है, लेकिन जबसे वे मेमो गेट कांड में फंसे हैं तबसे उनकी बीमारियां ब़ढ गई है।

सदन, पतन और निर्वाचन

सदन, पतन और निर्वाचन लोकपाल पर संसद में बहस और निर्णय अधूरा छूटा, जो पूरा हो सकता था। नए साल में एक ब़डा सवाल है कि क्या यूपीए सरकार बकाया चुनौती को बजट अधिवेशन में पार कर पाएगी। पश्चिम बंगाल में बगावत की नौबत है।

राजग पर बेवजह नहीं शरद की चिंता

राजग पर बेवजह नहीं शरद की चिंता शरद यादव हाल के वषा] में ऐसे नेता के तौर पर उभरे हैं जिनके वक्तव्यों में कटु सच्चाई के साथ तार्किकता, व्यावहारिकता और जन सरोकार निहित होता है। अपने वक्तव्यों के कारण वे राजनीतिक जोखिम भी उठाते हैं।