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अलकायदा की धमकी और हमारी सुरक्षा वयवथा

Swatantra Vaartha  Thu, 18 Feb 2010, IST

अलकायदा की धमकी और हमारी सुरक्षा वयवथा

पाक अधिकत कमीर में थित अलकायदा के ३१३ बी बिगेड के कमाडर इलियास कमीरी ने अतराीय खिलाडियों को चेतावनी दी है कि वे भारत में होने वाले खेल आयोजनों में शामिल न हों, नहीं तो उहें इसके बुरे परिणाम भुगतने पडेगे। कमीरी पाकितानी सेना का पूव कमाडो है जो अब अलकायदा की इस बिगेड की कमान सभाल रहा है। पुणे के ‘जमन बेकरी’ विफोट काड के तुरत बाद ‘एशिया टाइस, आनलाइन’ पर जारी इलियास की उपयु चेतावनी में बताया गया है कि भारत में उसके हमले जारी रहेंगे इसलिए अतराीय खिलाडियों को भारत में होने जा रहे हाकी वडकप, आइपीएल किकेट व कामनवेथ गेस में शामिल न हों। जो इस चेतावनी पर यान नहीं देगा उसे इसका खामियाजा भोगना पडेगा।

भारत में इस वष तीन बडे खेल आयोजन होने जा रहे है। हाकी का विवकप तो इसी २८ फरवरी से शु होने जा रहा है। आइपीएल के किकेट मच १२ माच से शु होने वाले है। उसके बाद अटूबर में रामडल के खेलों का आयोजन होने वाला ह। इस हाकी विवकप में ही करीब १० देशों के ४०० से अधिक खिलाडी व खेल अधिकारी शामिल होने वाले है।

इलियास ने पुणे विफोट की कोइ जिमेदारी अपने ऊपर नहीं ली है, कितु इसके आयोजन में उसका भी कहीं न कहीं कोइ हाथ हो सकता है। दरअसल इस उपमहाीप में सकिय सभी जिहादी आतकवादी सगठन परपर किसी न किसी प में सब ह आर आइएसआइ तथा अलकायदा ारा सयु प से नियति होते ह। इसलिए इन सगठनों के अपने नाम कुछ भी हो कितु वे अलकायदा व पाकितान सरकार से ही नियति होते ह। अब इन खेलों व इनमें शामिल होने वाले खिलाडियों पर इस चेतावनी का कितना असर पडेगा बाद की बात है, लेकिन यदि भारत के तिरक्षा मी एटनी की बातों पर यान दें तो लगेगा कि भारतीय सुरक्षाबल इन हमलों को रोकने में असमथ ह। अभी दिली में एक आयोजन में बोलते हुए उहोंने कहा कि सुरक्षाबलों के एलट रहने के बावजूद पुणे का विफोट हो गया। इसके पहले गहमी चिदबरम साहब ने कहा था कि पुणे के विफोट को गुतचर एजेंसियों की विफलता नहीं कहा जा सकता। इसका मतलब ह कि गुतचर एजेंसियों को पुणे में सभावित हमले की जानकारी थी आर सुरक्षाबल भी इस से सतक थे फिर भी विफोट हो गया।

अब यदि हमारे सुरक्षा त की क्षमता का यही आलम ह तो कान उसके सुरक्षा आवासनों पर भरोसा कर सकता ह। वतुत: हमारे सुरक्षा बल इतने नाकारा नहीं ह कि वे ऐसे हमलों को रोक नहीं सकते लेकिन राजनीतिक फसलों ने उहें निकमा बना रखा ह। यह सूचना तो थी कि पुणे में विफोट हो सकता ह, लेकिन शासन ने इसे गभीरता से नहीं लिया। अब शासन इन दोनों बातों को नहीं मान सकता कि गुताचर सूचना नहीं थी या सूचना के बावजूद पुलिस सतक नहीं थी। सूचना तो अमेरिका ने भी भारत को दी थी कि फरवरी में पुणे व मुबइ में आतकी हमले हो सकते है। इसलिए गुतचर विफलता की बात कतइ नहीं की जा सकती। अब इसके बावजूद पुलिस सतक न रहे तो इसका दोषी शासनत को बताया जा सकता ह। इसलिए बीच का राता यही बचा कि हम वीकार करें कि सब कुछ ठीक ठाक था फिर भी विफोट हो गया।

विवास किया जाना चाहिए कि अलकायदा के बिगेड कमाडर इलियास की धमकी से कोइ विदेशी खिलाडी आतकित नहीं होगा आर भारत में आयोजित होने वाले सारे खेल सुचार प में चल सकेंगे फिर भी भारत सरकार को इन आयोजनों की सुरक्षा के ति अभी से गभीर हो जाना चाहिए जिससे ऐन माके में शमिदगी उठाने से बचा जा सके।

सिबल का शिक्षा सुधार अभियान

केीय मानवससाधन विकास मी कपिल सिबल साहब देश की शिक्षा यवथा को सुधारने में पूरी गभीरता से लगे है, लेकिन जो यवथा अपनी जड से ही बिगडी हइ हो उसे सुधारना बहत आसान नहीं है। उहोंने ताजाताजा सुधार के दो ताव किये है। एक तो ाथमिक शिक्षा के सदभ में ह दूसरे नातक तर पर वेश के बारे में ह। ाथमिक शिक्षा के सदभ में सिबल का ताव ह कि बों के नसरी में वेश की आयु ३ वष से बढाकर ४ वष कर दी जाए आर पहली कक्षा में वेश की आयु भी ५ वष से बढाकर ६ वष कर दी जाए। उनके इस ताव का यापक प से वागत किया गया ह। उनका दूसरा ताव ह नातक तर पर वेश के लिए येक विषय में अखिल भारतीय तर पर एक ही वेश परीक्षा णाली का। इसके लिए १०+२ के तर पर यानी ११वीं व १२वीं कक्षा के पाठयकम में एकपता लाने का यास किया जाएगा आर समान वेश परीक्षा णाली २०१३ से लागू की जाएगी। इस पर अभी आम सहमति नहीं बन पाइ ह। यादातर शिक्षा बोडा] ने तो अपनी सहमति दे दी है, कितु कइ बोडा] ने गहरी आपा य की है। शिक्षा विद भी इस बारे में एकमत नहीं है।

शिक्षा विदों की सबसे बडी आपा ह कि जब तक शिक्षा के तर में एकपता नहीं आती तब तक एक टेट णाली लागू करना हितकर नहीं हो सकता। केवल समान पाठयकम लागू करना ही इसके लिए काफी नहीं हो सकता। इस देश में शिक्षा के इतने भि तर ह जिनके बीच कपनातीत भिता ह। गावों, कबों, शहरों आर बडे शहरों के शिक्षा तर की भिता कोइ भी आक सकता ह। एक ही शहर के विभि शिक्षा केाें में शिक्षा का तर बहत अलग होता ह। सरकारी आर गरसरकारी कूल कालेजो के तर में भी उलेखनीय भिता नजर आती है। सिबल साहब की नीयत पर कोइ सदेह नहीं किया जा सकता, कितु उहें इस देश में यदि शिक्षा में समानता का साित लागू करना ह तो उहें शिक्षा के तर में समानता की यवथा करनी होगी। उहें सरकारी व निजी शिक्षा केाें में पाठयकमों, शिक्षकों की नियु तथा शक्षिक वातावरण में समानता कायम करने का यास करना होगा। आथिक तर की भिता के आधार पर यदि देश के शिक्षातर की भिता बनी रहेगी तो समान टेट णाली से निन आथिक वग तथा छोटे शहरों व गावों के छााें के साथ भारी अयाय होगा।

उहोंने अछी शुआत की है, लेकिन उहें देश की शिक्षा समया को समगता में गहण करना चाहिए आर उसे लोकताकि आदशा] के अनुसार सुधारने व यवथित करने का यन करना चाहिए।


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