ADVERTISEMENT

आपका वोट

क्या राहुल गांधी भ्रष्टाचार खत्म करेंगे?

  • सही
  • गलत
  • पता नहीं
और भी

फोटो दीर्घा

Share

सरकार का खाद्य सुरक्षा का आश्वासन

Swatantra Vaartha  Tue, 23 Feb 2010, IST

सरकार का खाद्य सुरक्षा का आश्वासन

संसद के बजट अधिवेशन का उद्‌घाटन करते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने अपने अभिभाषण में अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार का ब्यौरा देते हुए खाद्यान्नों की ब़ढती कीमतों से गरीब जनता की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार खाद्य सुरक्षा कानून बनाने के लिए एक विधेयक सदन में पेश करेगी। उन्होंने इस बात का विशेष रूप से जिक्र किया कि चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक विकास दर ७५ प्रतिशत रहेगी।

इसके आगे वह लगातार ब़ढती ही जाएगी। आगामी वित्त वर्ष में उसके ८ प्रतिशत तथा वर्ष २०१११२ में ९ प्रतिशत पहुंच जाने की संभावना व्यक्त की। औद्योगिक उत्पादन तथा सेवा क्षेत्र में अर्थव्यवस्था फिर पटरी पर आ गयी है। गत दिसंबर में औद्योगिक उत्पादन में १६८ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। चिंता का क्षेत्र केवल खाद्यान्न का है, जिसकी महंगाई दर १६ वषा] में सबसे ऊंचे दर पर पहुंच गयी है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा कानून कितना कारगर होगा तथा आम उपभोक्ता को उससे कितनी या क्या राहत मिलेगी, इसके बारे में तो अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, किंतु राष्ट्रपति ने यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि खाद्य वस्तुआें की महंगाई से आम आदमी को हाेेने वाली तकलीफों से वह परिचित हैं, इसलिए वह राहत के कुछ उपाय अवश्य करेंगी।

राष्ट्रपति के सामने इसके अतिरिक्त दो और मुद्दे थे, एक तो पाकिस्तानी आतंकवाद और दूसरी नक्सल समस्या। उन्होंने नक्सलियों से भी बातचीत के लिए आगे आने की बात की और पाकिस्तान से भी कहा कि अगर वह भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए प्रभावशाली कदम उठाता है, तो भारत उसके साथ सार्थक संबंधों की संभावनाएं तलाशने के लिए तैयार है। भारतपाकिस्तान दोनों ही दो दिन बाद २५ फरवरी को विदेश सचिव स्तर की बातचीत शुरू करने जा रहे हैं। यद्यपि इस बात में सार्थक कुछ भी हो पाने की कोई उम्मीद किसी पक्ष को नहीं है, फिर भी वे बातचीत के लिए तैयार हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसे ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि भारत व पाकिस्तान फिर से बातचीत करने के लिए राजी हो गये हैं। २६/११ के मुंबई हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ चल रही बातचीत रोक दी थी। यद्यपि भारत अभी भी उस वार्ता श्रृंखला को पुन: शुरू करने के लिए तैयार नहीं है, फिर भी उसने अलग से बातचीत का एक बहाना ढ़ूंढ लिया है। क्योंकि शायद दोनों ही पक्षों ने यह महसूस किया कि कुछ न करने की अपेक्षा निरर्थक बातचीत करना भी अच्छा है। एक वरिष्ठ पत्रकार ने अभी अपने एक कॉलम में लिखा था कि देश निष्क्रिय या चुप नहीं रह सकते। बीच में कोई समस्या हो और वह सुलझ न रही हो, तो या तो वे युद्ध करेंगे या बातचीत करेंगे। भारत और पाकिस्तान दोनों ही युद्ध करने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए उनके सामने एक ही विकल्प बचता है कि वे बातचीत करें, चाहे यह बातचीत सार्थक हो या निरर्थक। केवल बातचीत होना ही कम से कम यह तो प्रमाणित करता रहेगा कि दोनों ही देश अपनी समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के इच्छुक हैं और फिलहाल कोई युद्ध नहीं करेंगे। अब यदि पाकिस्तान के साथ इस तरह की बातचीत हो सकती है, तो नक्सलियों के साथ भी बातचीत का कोई बहाना तलाश किया जा सकता है।

बजट सत्र संसद का सबसे अधिक महत्वपूर्ण सत्र होता है। इसमें कामकाज भी होना है और हंगामा भी। प्रधानमंत्री ने विपक्ष से अपील की है कि वे संसद की कार्रवाई में बाधा न डालें, लेकिन विपक्ष यदि ऐसी अपीलों पर अमल करने लगा, तो वह विपक्ष ही न रह जाए। महंगाई, आतंकवाद, नक्सलवाद व आंतरिक सुरक्षा के अन्य मुद्दे हंगामा जरूर ख़डा करेंगे। वैसे इस बार प्रणव मुखर्जी के बजट पर भी गहरी नजर है, क्योंकि उसमें वित्तीय संयम के कुछ कठोर निर्णय भी सामने आ सकते हैं।

पाक में पतंगबाजों की गिरफ्तारियां

पंजाब में बसंत के उत्सव में पतंगबाजी का शौक बहुत पुराना है। विभाजन के पूर्व क्या हिन्दू हो क्या मुस्लिम, पतंगों की पेंच ल़डाना दोनों का पसंदीदा खेल था। विभाजन के बाद भी यद्यपि पाकिस्तानी पंजाब से हिन्दुआंें को मार भगाया गया, लेकिन वहां के आम नागरिक बसंतोत्सव मनाने की यह परंपरा नहीं छ़ोड सके। कई बार कट्‌टरपंथी नेताआें ने इसे बंद करवाने की कोशिश की, लेकिन लोग नहीं माने। तीन साल पहले २००७ में पाकिस्तान की सरकार ने एक अध्यादेश जारी करके बसंतोत्सव की पतंगबाजी पर कानूनी रोक लगा दी। बहाना यह बनाया गया कि इसके मांझे से लोग घायल हो जाते हैं और कई की तो जान ही चली गयी। फिर भी लोग पतंग उ़डाने से बाज नहीं आये।

पतंगबाजों की तरफ से उपर्युक्त कानूनी रोक को हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी, किंतु हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इधर लाहौर काइट फ्लाइंग एसोसिएशन ने आगामी ६७ मार्च को बसंत मनाए जाने की घोषणा कर दी।

किंतु प्रशासन भी इस बात पर आमादा है कि वह पतंग नहीं उ़डाने देगी। उसने पतंग व मांझा (उ़डाने के लिए इस्तेमाल होने वाली डोर) बनाने, लाने ले जाने व उ़डाने के आरोप में एक हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। ७ मार्च तक और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। प्रशासन की घोषणा के अनुसार प्रांतीय राजधानी लाहौर तथा कुछ और शहरों में जगहजगह पुलिस की पिकेट्‌स तैनात की गयी है और उनके साथ स्पेशल मजिस्ट्रेट को नियुक्त किया गया है। इनका काम है पतंग के निर्माण, वितरण व आवागमन को पूरी तरह रोकना, जिससे लोगों को न पतंग मिल सके और न वे उ़डा सकें। पतंगप्रेमियों का कहना है कि इसमें तो धर्म जैसा कुछ नहीं है और न यह किसी मुस्लिम के खिलाफ है। केवल इसके नाम ‘बसंतोत्सव’ के अतिरिक्त इसमें ऐसा कुछ नहीं है, जिससे इसे हिन्दुत्व से ज़ोडा जा सके। लेकिन पंजाब के पुलिस प्रमुख तारिक सलीम डागर इस पर आमादा हैं कि वे ६७ मार्च को बसंत आयोजन में किसी को पतंग नहीं उ़डाने देंगे।

अब इससे पाकिस्तानी कट्‌टरपंथ का अच्छी तरह अनुमान लगाया जा सकता है, जिसे पतंगबाजी जैसे आह्लादकारी खेल भी बर्दाश्त नहीं हैं, क्योंकि यह भारतीय परंपरा का अंग रहा है।

आपकी राय