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स्वायत्तता की माग कहीं स्वतंत्रता की मांग न हो जाए

Swatantra Vaartha  Thu, 25 Feb 2010, IST

स्वायत्तता की माग कहीं स्वतंत्रता की मांग न हो जाए

पाकिसतान अपने जीवन के सबसे बडे सकट से गुजर रहा है । 1971 में जब उसका पूर्वी भाग उसे से टूट कर बालादेश बना उस समय भी वहा न तो इतनी अधिक आपाधापी थी आर न ही जनता इस हद तक निराश थी। लगता था बालादेश बन जाने के बाद पाकितान सबक सीखेगा और अपने आपको सगठित एव थिर रखने के लिये अपनी इछा श को यवहारिक प में बदलेगा। लेकिन आज जो कुछ पाकितान में हो रहा ह उससे लगता ह अब पाकितान का अतिव बच पाना कठिन ह। पाकितान अपनी सबसे बडी ताकत सेना को मानता था। उसके राजनीतिज्ञों का यह मत था कि पाकितान मे चाहे जितनी उथलपुथल हो जाए, लेकिन सेना उसके वप को बिगडने नहीं देगी। इसी आधार पर पाकितान में जब कभी राजनीतिक सकट आया वहा की सेना ने आगे आकर साा थाम ली। लेकिन इस समय तो पाकितान की जनता का विवास अपनी सेना पर से भी उठ गया ह। योंकि सेना अब पाकितान की तटथ इकाइ न रहकर एक राजनीतिक दल जसा यवहार करने लगी है।

इसलिये पाकितान के सबसे बडे सूबे लूचितान आर सीमावर्ती इलाके फटियर में सेना पर नागरिकों का विवास नहीं रहा है। ऐसा लगता है कि वहा की जनता यह शका करने लगी है कि पाकितान की सेना का कुछ भाग कहीं तालिबान से तो मिला हआ नहीं ह। वजीरितान आर उसके आसपास के नागरिक यदि सेना को भरपूर समथन देते है तो फिर या कारण ह कि सेना को सफलता हाथ नहीं लगती। लूची तो पाक सेना को अपने लिये तालिबान से भी बदतर मानते है। पाकितान की सेना पर अब मीडिया में जिस तरह से हमला होता ह उससे तो यही लगता ह कि पाकितान की सेना के ति अब सामाय य की राय बदलती जा रही है।

पाकितान में एक तरफ तो पचिमी सीमाआें पर घमासान मचा हआ ह आर दूसरी तरफ पाकितान के राजनीतिक दल जो छोटे हों या बडे अब यह माग करने लगे ह कि उनके रायों को अधिक वायाता मिलनी चाहिये। इसका अथ यह हआ कि वे वतमान थिति से सतु नहीं है। राजनीतिक दलों को अब इस बात की गारटी नहीं ह कि वतमान पाकितान आज की तरह एक रहेगा। इसलिये हर दल आर उसका नेता यह चाहता है कि अब उनका अपना राय ही शशािली बन जाए। इसका दूसरा अथ तो यही होगा कि समय आने पर वे अपने राय को पाकितान सघ से वत घोषित कर देंगे। पाकितान में सामाय हवा यह चल रही है कि अब फटियर आर लूचितान पाकितान के भाग बहुत लबे तक नहीं रह पाएगे। यानी शेष दो राय पजाब आर सिंध पर पाकितान का अतिव रह जाएगा।

पाकितान के मीडिया का विलेषण ह कि पाकितान के दोनों बडे दल पाकितान पिपुस पार्टी आर नवाज शरीफ की मुलिम लीग इस सगीन मसले पर यान न देकर अपने वाथों में खोइ हइ ह। पाकितान जब अपने अतिव की लडाइ लड रहा ह उस समय पी पीपी के अयक्ष आर देश के रापति जरदारी एव विरोधी दल मुलिम लीग के नेता नवाज शरीफ अपनी राजनीति में एक दूसरे को नीचा दिखलाने पर उतरे हए ह। नवाज शरीफ रापति जरदारी के उस अधिकार को जो सविधान के १७ वें सशोधन के तहत उहें धान मी आर ससद को भग करने का अधिकार देता ह उसे छीन लेना चाहते ह। इसमें उतावली का कारण यह ह कि परवेज मुशरफ जब रापति थे उस समय उहोंने इस सशोधन में एक धारा आर भी जोड दी थी जिसके तहत कोइ य पाकितान का धान मी दाेे बार से अधिक नहीं हो सकता। चूकि नवाज शरीफ दो बार धान मी बन चुके ह इसलिये वे चाहते ह कि इसमें भी तुरत सशोधन करवा लिया जाए जिससे भविय में उनके पधान मी बनने का माग खुला रहे।

पिपुस पार्टी का यह कहना ह कि वह १७ वे सशोधन को ही सविधान से समा नहीं करना चाहती ह, बकि सविधान में जो भी रददो बदल करने ह उसे एक साथ कर दिये जाने चाहिये। पी पी पी की सरकार ने उसे काटीटयूशनल पकेज का नाम दिया ह। इस काम के लिये सरकार ने एक समिति रजा रबानी के नेतव में थापित भी कर दी ह। लेकिन इस सबध में जो रपट मिल रही ह उसके अनुसार इस कमेटी में राय तर की पाटियों को अधिक थान दिये गए ह। इन पाटियों का भाव अयत सीमित ह। छोटीपार्टी के इन तिनिधियों को केवल इसमें चि ह कि छोटे रायों को अधिकतम वायाता दे दी जाए। इन पाटियों का कहना ह कि बडे राजनीतिक दल साा में आते ही सारे अधिकार वय हडप लेते ह आर छोटे दलों की अवहेलना करते है। चूकि पिपुस पार्टी इस समय साा में ह आर बहत सारी छोटी पाटिया उसके साथ ह इसलिये नवाज शीफ की लीग के मन में शका पदा होना वभाविक है। नवाज शरीफ को ऐसा महसूस हो रहा हकि इन छोटी पाटियाेें के आधार पर पी पी पी अपना काड खेलेगी आर वही सब कुछ करेगी जिससे उसे अधिक लाभ मिलेगा। पाक ससद में घोषणा की गइ थी कि तीन माह के भीतर रजा रबानी की कमेटी अपनी रपट तुत कर देगी। लेकिन नवाज शरीफ आर उनके साथ जो पाटिया है उहें यह समय निकालना भारी पड रहा ह इसलिये वे चाहते ह कि यह खेल जद समा हो जाए। नवाज शरीफ को जरदारी की नियत पर भरोसा नहीं है। कमेटी की रपट माच के थम साह मे आने की उमीद ह। इसकी सीमा पहले ही सरकार ने तय कर दी ह, लेकिन पाकितान में जो राजनीतिक अथिरता ह उसे देखते हए कोइ विवास नहीं कर सकता है।

पिपुस पार्टी पर इसलिये भरोसा नहीं किया जा सकता है योंकि सुमि कोट के चीफ जटिस के मामले में उसने बहत टाल मटोल किया। जो शद दिये थे उस पर अटल नहीं रहे । यदि नवाज शरीफ ने सती नहीं की होती आर पजाब से आदोलन नहीं उठा होता तो जरदारी इसे कभी कियावित नहीं करते। जरदारी को उनकी पार्टी के भावशाली आर बेनजीर के कटटर हिमायती पसद नहीं करते है। इसलिये समय रहते नवाज शरीफ इन सब मुददों का लाभ उठा लेना चाहते ह। पाकितान के अखबार इस बात को बारबार लिख रहे ह कि यदि जरदारी ने सुमि कोट के फसलों का समान किया होता तो उनकी साख बरकरार रहती। दनिक डान का कहना है कि हकूमत का रिकाड अब तक अछा नहीं रहा है। धान मी रजा गिलानी कहते ह कि हम १९७३ का सविधान फिर से पाकितान में लागू करके रहेंगे। उहोंने इस बात पर भी जोर दिया है कि सविधान को लेकर बहत जद अटकलें समा हो जाएगी। डान का कहना ह कि जरदारी की नियत ठीक नहीं लगती। वे किसी भी थिति में १७ वें सशोधन को सविधान से अलगथलग नहीं करना चाहते है । उनके मन में यह बात बठ गइ ह कि १७ वा सशोधन ही उनके हाथ में सबसे बडा हथियार ह।

पाकितान के सविधान में जब फेर बदल होने के वर सुनाइ पड रहे ह उस समय पाकितान के पजाब आर सिध से निकलने वाले अखबार इस बात पर शका य कर रहे ह कि सविधान में सशोधन के बहाने कही पाकितान टुकडों में न बट जाए। यदि लूचितान आर सीमात देश में कबीले आर उनके जिरगों के आधार पर हकूमतें चलती है। वे अपनी इस पहचान को राजनीतिक प दे देना चाहते ह। चूकि इस समय पाकितान आर तालिबान के बीच जो खुला यु चल रहा ह उसका परिणाम ही यह तय करेगा कि पाकितान के यह भाग पाकितान में रहते ह या फिर अपनी आजादी की घोषणा करते है। पाकितान में यह भावना पजाब आर सिंध में न हो ऐसी भी बात नहीं है। पाकितान बनते ही सिंध में दो ताकतें उभरी।

भारत से जब पाकितान मे मुसलमान गए तो वे मुहाजिर कहलाए। चूकि उहोंने भारत से हिजरत की थी इसलिये वय को मुहाजिर का नाम दिया। सिंध के कराची आर आसपास के क्षे में भारत से गए मुसलमान इतनी बडी सया में थे कि उहाेेंने अपनी अलग पार्टी बना ली आर अलताफ हसन के नेतव में इसका नाम कोमी मुहाजिर मूहाजिर मूमेंट रख दिया। इनकी माग थी कि पाकितान तो हम भारतीय मुसलमानों ने बनाया इसलिये पाकितान में हमारा दबदबा रहना चाहिये। इस मानसिकता को भला यहा का रावादी सिंधी किस पकार बदात करता। जी एम सयद के नेतव में सिंधु देश का आदोलन खडा हो गया। जी एम सयद जसे बुजुग नेता का मानना था कि मुहाजिर आर पजाबी हमें गुलाम बना लेगे। इसलिये आज भी यह आदोलन वहा मरा नहीं ह। पजाब में शिया आर सुी के नाम पर कल का बाजार गम हो गया। झग जिले के सुयाेिं ने पहले तो खम नबुवत कानफेंस को सकिय किया आर बाद में वहा सुयाेिं की पार्टी बना कर सीधासीधा यह आदोलन चला कि पाकितान सुी टेट ह। जफरा खान जब पाकितान के विदेश मी थे उसी समय सुयाेिं आर अहमदियों में सघष शु हो गया।

रबवा में अहमदियों को घेर कर उनका कले आम किया। बाद में शियाआें ने तेहरीके जाफरिया आदोलन छेड दिया। मजिदों में नमाज के समय पीछे से गोलिया चलने लगी आर हजारों मुसलमान हताहत होने लगे। आज भी यह भावना यों की यों ह। इसलिये पाकितान में आज भी राीयता का अभाव ह। सारा देश कबीले, जिरगे, पथ आर सदायों में बटा है। पाकितान के सथापक ने अपनी आखों से इस थिति को देख लिया था। उनके एक साथी राजा मेहमूदाबाद ने तो १९७१ के बालादेश के यु के परिणाम को देख कर मयु शया पर कहा था धम के नाम पर देश बन तो सकता ह, लेकिन टिक नहीं सकता।

सपक : 09819186866


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