ADVERTISEMENT

आपका वोट

क्या राहुल गांधी भ्रष्टाचार खत्म करेंगे?

  • सही
  • गलत
  • पता नहीं
और भी

फोटो दीर्घा

Share

नकली नोटों की असली तबाही

Swatantra Vaartha  Fri, 26 Feb 2010, IST

नकली नोटों की असली तबाही

संख्या की दृष्टि से वर्ष २००१०२ से लेकर २००७०८ तक देश में ११४१८९२ जाली करेंसी पक़डी गयी। इस बात के सरकारी आंकडें उपलब्ध नहीं है कि वर्तमान में कितने जाली नोट चलन में है। फिर भी अनुमानित तौर पर उपरोक्त पक़डी गयी जाली करेंसी से लगभग २० से २५ गुना अधिक चलन में है।

वर्तमान में पाकिस्तान अरबों रुपये की नकली करेंसी विभिन्न माध्यमों द्वारा भारत भेजने में जुटा हुआ है जिससे देश की आर्थिक मेरूदंड तो प्रभावित होती ही है साथसाथ उस धन का इस्तेमाल आतंकवादी अपनी आतंकी गतिविधियां पूरी करने के लिए करते हैं।

आज हमारा देश पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आर्थिक आतंकवाद की चपेट में आ चुका है। पाक समझता है कि भारत का सामाजिक एवं आर्थिक तानाबाना ध्वस्त करने के लिए आर्थिक रूप से उसकी कमर त़ोडनी होगी। बिना आर्थिक नुकसान पहुंचाए भारत को कमजोर करना उसके बूते की बात नहीं अतः इसी विषय को ध्यान में रखते हुए आतंकवादियों के साथ भी वह नकली करेंसी का भंडार भारत भेजता है। जिससे एक तरफ आतंकियों को आर्थिक सुविधा तथा दूसरी तरफ नकली मुद्रा का भंडार भारत पहुंच जाता है। पाकिस्तानी सरकार अपनी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के माध्यम से पाक वायु सेना की पाकिस्तान इन्टरनेशनल एयर लाइंस के विमानों के माध्यम से नेपाल, बांग्लादेश तथा श्रीलंका में नकली नोटों की खेप भेजने का कार्य करती है। इसके बाद वहां घुसपैठियों के माध्यम से भारत में फर्जी नोटों को फैलाया जाता है। जाली मुद्रा के व्यवस्थित वितरण करने वाले को एक निर्धारित प्रतिशत भी दिया जाता है। पाकिस्तान भली भांति जानता है कि हिंसक गतिविधियों के अतिरिक्त भारतीय अर्थव्यवस्था पर चोट पहुंचायी जाये तो विकासशील भारत के पांव में बेडियां पड जायेगी जिससे उसका विकास रथ की गति का सत्यानाश सुनिश्चित है अतः हमारा प़डोसी मुल्क अपनी पूरी ऊर्जा इस अनैतिक कार्य में लगाये हुए है।

सीबीआई द्वारा पक़डे गये राजेन्द्र कुमार अनादकर ने खुलासा किया जिसके अनुसार आईएसआई के इशारे पर फर्जी मुद्रा की छपायी क्वेटा आदि जगह पर होती है। उसके बाद वह जाली करेंसी डान दाउद को सौंप दी जाती है जिसे वह अपने नेटवर्क के माध्यम से म्यूजिक सिस्टम, क्राकरी, वाशिंग मशीन आदि में डाल हवाई जहाज द्वारा भेज देता है। कम प़ढे, बेरोजगार, महिलाओं तथा मुसलमानों को इस काम में लगाया जाता है। भारतीय संवैधानिक व्यवस्था में नकली नोट, उसका असली के रूप में इस्तेमाल, नकली नोट रखना या नकली नोट बनाना या उसका उपकरण रखने या नकली नोट बनाने के सामान या बैंक नोट से मिलतेजुलते दस्तावेज का इस्तेमाल करना भारतीय दंड संहिता की धारा ४८९अ से ४८९इ के तहत दंडनीय अपराध है। इन मामलो में देश की अदालते जुर्माना या सात साल की कैद से लेकर आजीवन कारावास या संगीन जुर्म को देखते हुए दोनों सजाए एक साथ दे सकती है। वर्ष २००३ के सरकारी आंक़डे के अनुसार देश के विभिन्न भागों में फर्जी करेंसी पकडने के कुल १५२३ मामले पंजीकृत हुए तथा २ कऱोड ८० हजार से ज्यादा नकली नोट बरामद हुए। खुफिया सूत्रों के अनुसार दिल्ली नकली नोटों का केन्द्र है, यहां देश के अन्य भागों में उक्त करेंसी भेजी जाती है। वर्ष २००० में रिजर्व बैंक द्वारा गठित नाइक कमेटी ने कहा था देश में करीब १ लाख ६९ हजार कऱोड फर्जी नोट बाजार में है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु के हालात काफी चिंंतनीय है।

२६/११ के मुम्बई हमले की जांच से यह बात सामने आयी आतंकी अपने साथ भारी मात्रा में भारतीय जाली करेंसी लाये थे। वर्ष २००५ में बेंगलूर के भारतीय विज्ञान संस्थान पर हुए बम हमले में भी ५० लाख में से ३० लाख नकली नोट खर्च किए गये थे। उक्त घटनाएं प्रमाणित करती हैं, किस प्रकार नकली करेंसी आतंकी गतिविधियों में प्रवेश की हुई है। आज भारत उक्त विषय में बहुत विषम परिस्थितियों से गुजर रहा है नकली नोटों का विषय अर्थव्यवस्था के साथसाथ सीधेसीधे आतंकी हिंसक गतिविधियों से ज़ुडा है। जिसका इलाज समय रहते न किया गया तो आने वाला समय भारत के लिए मुश्किलो भरा होगा। आज से ६३ वषा] पहले पाकिस्तान भारत के हाथ काट कर अस्तित्व में आया था। आज पुनः हाथ काटने पर आमादा है।

स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो चुका है पाकिस्तान की गुप्तचर संस्था आईएसआई भारत को नकली नोटों के माध्यम से आतंकवाद एवं अर्थव्यवस्था सहित अनेक कोनों पर तबाह करना चाहती है, लेकिन हम अभी तक इसकी व्यवस्थित सुरक्षा कर पाने में पूरी तरह असमर्थ रहे हैं। हमारे देश तथा नेपाल सीमा पर वीजा प्रावधान न होने के कारण जाली करेंसी रोक की समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है। बांग्लादेश सीमा पर एक दूसरे की जमीन होने के कारण भी सुरक्षा व्यवस्था में असुविधा होती है। हालांकि जाली नोटों के प्रसार को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने कुछ प्रयास किये है। जिसके अंतर्गत जाली नोट धारकों को रसीद जारी करना है, जिसके तहत जाली नोट पाये जाने पर धारक से नोट जब्त कर एक रसीद जारी होगी। नोटों की पहचान के लिए बैंक के सभी कर्मचारियों का प्रशिक्षण, पक़डे गये जाली नोटों की एफआईआर तथा सभी बैंक में करेंसी रीडर उपकरणों को स्थापित करने की योजना सहित विभिन्न बिन्दुआंे पर कार्य योजना तैयार की गयी है। परंतु उपरोक्त सभी व्यवस्थाए अधकचरी सी प्रतीत होती है। जो जाली करेंसी रोक से ज्यादा रक्षात्मक है। बेहतर हो सरकार जल्द से जल्द भारतीय मुद्रा की डिजाइन एवं आकार परिवर्तित करती रहे तथा साथसाथ वैश्विक स्तर पर ऐसी नयी तकनीके आ गयी है जिससे करेंसी का प्रतिरूप बनाना मुश्किल है। यदि बन भी जाती है तो आसानी से पक़ड में आ जाती है। प्लास्टिक की मुद्रा जो विश्व के कई देशों में व्यवस्थित रूप से चलन में है भारत में भी लागू हो सकती है। इसी प्रकार के कुछ प्रयास कर जाली करेंसी को चलन में आने से पहले ही रोका जाये तो बेहतर होगा अन्यथा उपयोग में आने के बाद पक़डे जाने पर वह अपना लगभग पूरा नुकसान कर चुकी होती है।

आपकी राय