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हालबुफ कयों कर रहे है पाकिस्तान का बचाव !

Swatantra Vaartha  Sat, 6 Mar 2010, IST

हालबुफ कयों कर रहे है पाकिस्तान का बचाव !

अमेरिका के पाकअफगान दूत रिचड हालबुक ने काबुल में भारतीयों पर हुए ताजा आतकी हमले के बारे में जो टिपणी की है, उससे भारतीय अधिकारियों का क्षुध होना वाभाविक है। वाशिंगटन रिपोटरों के साथ बातचीत करते हुए हालबुक ने गत बुधवार को कहा कि ‘म यह नहीं मानता कि यह हमला भारतीयों को लय करके किया गया था। वहा बहत से गर भारतीय विदेशी भी थे, जो हमले के शिकार हुए।’ उहोंने आगे कहा कि ‘म यह समझता है कि पाकितान आर भारत का हर यति यों हमेशा एकदूसरे को निशाना बनाता रहता है। लेकिन कपया हमें ऐसी बातों से कोइ इस तरह का निकष नहीं निकालना चाहिए, जिसका कोइ माण न हो।’ हालबुक की इस टिपणी से साफ जाहिर है कि वह पाकितान का बचाव कर रहे है।

काबुल में गत सताह आतकवादियों ने सबसे पहले उस बिडिग को अपना निशाना बनाया, जिसका भारतीय मेडिकल मिशन उपयोग कर रहा था। इस बिडिग के ठीक बाहर पहले एक बम विफोट किया गया, उसके बाद आतकवादी हथगोले फेंकते हए अदर घुसे आर एकएक कमरे को देखकर वहा गोली चलायी। उहें पहले से यह पता था कि बिडिग के किस कमरे में कान ठहरा हआ है। इस बिडिग में आर कोइ विदेशी नहीं था। यहा कारवाइ पूरी करके आतकवादी बगल के उस होटल में गये, जहा भारतीयों के अलावा अय विदेशी भी थे। अब यदि यह हमला भारतीयों को लय करके नहीं किया गया था, तो फिर कान वह दूसरा था, जिसके लिए आतकवादियों ने यह हमला किया।

यह हमला पाकितानी आतकवादियों ारा किया गया आर भारत को लय करके किया गया, यह बात अफगान गुतचर सेवा ने अपनी ारभिक जाच पडताल के बाद कही ह। यह कोइ भारत का आरोप नहीं था। भारत ने तो इस घटना की निंदा करते हए भी इतना सयम बरता था कि उसने पाकितान का नाम नहीं लिया था। अफगान गुतचर एजेंसी एनएसडी (नेशनल डायरेटरेट आफ सियोरिटी) के वता सइद असारी ने गत मगलवार को काबुल में ेस को बताया कि ऐसे माण ह कि इस हमले में उदू बोलने वाले पाकितानी शामिल थे, जो शायद लकरेएतयबा के सदय है।

यह हमला अफगान तालिबान ारा नहीं, बकि पाकितानियों ारा ही किया गया, इसमें सदेह की गुजाइश बहत कम ह। हमलावर निचय ही भारतीयों की ही खोज में थे आर उहें इसकी पकी जानकारी थी कि इस समय वहा कान होगा। अफगान अधिकारी अभी पके तार पर यह कहने की थिति में नहीं ह कि हमले में पाकितान का कानसा आतकवादी गुट शामिल था यह हकानी समूह था या तहरीके तालिबान आफ पाकितान अथवा लकरे झागवी या लकरेएतयबा, लेकिन उहें इस बात में कतइ सदेह नहीं कि हमलावर पाकितानी थे।

इसके पहले काबुल में राटपति भवन तथा उसके पास की बिडिगों पर जब हमला हुआ था, तो हमलावरों ने वहा उपथित अफगान गाडा] व अय कमचारियों को बाहर निकलने दिया था, किंतु इस हमले में उहोंने पहले अफगान गाडा] को ही गोली मारी। वे चिलाते रहे कि वे अफगान है, उहें गोली न मारो, लेकिन हमलावरों ने उनकी एक नहीं सुनी आर उन पर फायर झोंक दिया। इससे यही माणित होता ह कि यह हमला पाकितानी आतकवादियों ारा किया गया, जो भारतीयों की सुरक्षा में लगे अफगानों से भी उतनी ही घणा करते है, जितनी की भारतीयों से।

लेकिन यहा मुा यह नहीं है कि कान किससे कितनी घणा करता है, बकि मुा यह है कि हालबुक इस तरह का बयान यों दे रहे ह। वह इस बात को सरासर गलत यों ठहरा रहे है कि आतकियों ने केवल भारतीयों को लय करके यह हमला यों किया। वह अफगान गुतचर इकाइ की रिपोट की भी यों अनदेखी कर रहे है ? वातव में उनका यह वतय अमेरिकी नीति में आए बदलाव का ाेतक ह। अमेरिका काबुल में भारतीयों पर हए हमले में पाकितानी हाथ को इसलिए झुठला रहा है, जिससे कि भारत को पाकितान की आलोचना का एक आर गभीर अवसर न मिले। वह इस तरह दुनिया के भारत समथक अय देशों का भी मुह बद कराना चाहता है। भारत को यह बात अमेरिका के सामने सीधे तार पर उठानी चाहिए।

चाद पर एफराद पानी

चयान१ भारत का पहला यान चतल तक पहचा, लेकिन इसने चमकार कर दिया। इस यान से भेजे गये खोजी उपकरणों ारा एकति आकडों के आधार पर अमेरिकी पेस एजेंसी ‘नासा’ ने चमा पर पानी की उपथिति का पता लगाया था। यह पानी बहत थोडा था, फिर भी इसे अयत उलेखनीय सफलता कहकर सराहा गया था, लेकिन इसी चयान ारा ले जाए गये नासा के एक दूसरे खोजी उपकरण ‘मिनीएसएआर’ से जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार चमा के उारी धुव क्षे में पानी ही पानी है। १० किलो वजन के इस छोटे से उपकरण (ाेब) के आकडों ने वज्ञानिकों को चमकत कर दिया। अब इसके आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि चतल के इस भाग में कम से कम ६० करोड मीटिक टन बफ या पानी है।

चमा के इस इलाके में सूरज की रोशनी कम पहचती ह, इसलिए पहले से ही यह अनुमान लगाया जा रहा था कि चमा पर पानी होगा, तो इसी क्षे में होगा, लेकिन कोइ माण नहीं मिल रहा था। चयान ने ऐसा सयोग पदा किया कि उस सभावित क्षे में ही खोज आगे बढी आर पानी का कपनातीत भडार हाथ लग गया। इस क्षे में करीब ४० बडे गडढें है, जो २ से ५ किमी यास तक के है। इनमें ही यह पानी जमा हआ है।

इतने पानी की उपलधता ने सहज ही यह आशा जगा दी ह कि भविय की कोइ मानव बती चाद पर भी बस सकती ह आर वहा एक विशाल अतरिक्ष टेशन कायम हो सकता ह। जहा से अय गहों के लिए मानवीय यानों को भेजा जा सकेगा। यह मानव के अतरिक्ष अभियान का एक कातिकारी अयाय होगा, जिसके ारभिक पठ चयान१ ारा लिख दिये गये ह। धरती का यारा चाद निचय ही इस खोज के बाद आर यारा हो गया ह, योंकि अब वहा बसने की निचित सभावनाए पदा हो गयी है।

चयान१ को अटूबर २००८ में पीएसएलवी राकेट ारा छोडा गया था। यह अपने साथ ११ पेलोड ले गया था, जिनमें ५ भारत के, तीन यूरोपीय पेस एजेंसी के, २ अमेरिका के तथा एक बुलगारिया का था। यह एक ायोगिक अभियान था, जिसके साथ ायोगिक उपकरण ही गये थे, किंतु इन उपकरणों ने मनुय के लिए चाद के महव को कइ गुना बढा दिया।

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