ADVERTISEMENT

आपका वोट

क्या तेलंगाना मामला केन्द्र सरकार के गले की हड्‍डी बन गया है?

  • हाँ
  • नहीं
  • पता नहीं
और भी

फोटो दीर्घा

Share

अगले वर्ष महंगाई और तेजी से ब़ढेगी

Swatantra Vaartha  Tue, 9 Mar 2010, IST

अगले वर्ष महंगाई और तेजी से ब़ढेगी

अभी से महंगाई की चिंता से ग्रस्त देशवासियों को अगले वर्ष महंगाई का और बोझ उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए। रेल मंत्री ममता बनर्जी आवश्यक उपभोग वस्तुआें के अलावा अन्य वस्तुआें के माल भ़ाडे पर लगाये गये सेवा कर (सर्विस टैक्स) से ही बेजार हो रही थीं, लेकिन अगले वर्ष यानी २०१११२ के बजट में यात्री किराये व सभी तरह के माल भ़ाडे पर सेवा कर लग सकता है। वास्तव में सेवा क्षेत्र सकल घरेलू अर्थोत्पाद (जीडीपी) का ६० प्रतिशत से अधिक प़डता है, इसलिए राजस्व वृद्धि के लिए इस क्षेत्र पर ही सरकार की नजर ग़डी हुई है। इस वर्ष तो नमूने के तौर पर केवल कुछ क्षेत्रों को ही जैसे घरेलू विमान सेवा, सिनेमा, आईपीएल क्रिकेट, सौंदर्य प्रतियोगिता एवं लॉटरी को इस कर जाल के अंतर्गत लाया गया है, किंतु अगले वित्त वर्ष से प्राथमिक स्वास्थ्य, शिक्षा, सरकारी सेवा, प्रतिरक्षा (डिफेंस) एवं सुरक्षा (सिक्योरिटी) को छ़ोडकर प्राय: सारे सेवा क्षेत्रों पर कर भार लागू हो जाएगा।

केंद्रीय उत्पादन एवं सीमा शुल्क विभाग द्वारा किये गये आकलन के अनुसार इस वर्ष विमान किराये व रेल के माल भ़ाडे को छ़ोडकर बाकी जिन क्षेत्रों पर सेवा कर लगाया गया है, उनमें से प्रत्येक से करीब १०० कऱोड की आमदनी का अनुमान है। विमान किराए से ५०० कऱोड तथा रेल भ़ाडे से ८०० कऱोड की आमदनी का अनुमान है। सेवा कर से कुल आमदनी ३००० कऱोड से अधिक होने का अनुमान लगाया गया है। इस सेवा कर की मार से इस वर्ष साबुन, शैंपू, इलेक्ट्रिक उपकरण आदि भी महंगे हो जाएंगे और अगले वर्ष से तो सेवायोजक जो स्वास्थ्य जांच का व्यय वहन करते हैं वे, बिल्डर जो अतिरिक्त सेवा प्रदान करेंगे तथा कोचिंग सेंटर भी सेवाकर के दायरे में आ जाएंगे। ‘नेशन स्पोर्ट्‌स फेडरेशन’ के खेल आयोजनों को छ़ोडकर अन्य खेल आयोजन भी इस कर दायरे के बाहर नहीं रह पाएंगे।

एक तरफ मालवाहक ट्रकों के भ़ाडे में हुई अप्रत्याशित वृद्धि, दूसरी तरफ सेवा कर भार निश्चय ही मुद्रास्फीति के ग्राफ को तेजी से आगे ब़ढाएगा। अभी बाजार की ताजा खबरों के अनुसार डीजल की महंगाई की ओट में ट्रक मालिकों ने अपना किराया ६ से ८ प्रतिशत तक ब़ढा दिया है। डीजल की दर ब़ढने से भ़ाडे पर अधिकतम ३५ से ४५ प्रतिशत तक भ़ाडा ब़ढना चाहिए था, लेकिन ट्रक मालिकों ने उसे ८ प्रतिशत तक ब़ढा दिया है। अब इसका कोई भी अनुमान लगा सकता है कि इस दोहरेतिहरे बोझ का महंगाई की दर पर क्या प्रभाव प़डेगा।

जिहादी नेताआें को पाक का पूर्ण संरक्षण

जिहादी आतंकवादी समूहों के ब़डे नेताआें को पाकिस्तान में कोई खतरा नहीं है। अभी पिछले दिनों पाकिस्तान सरकार द्वारा जारी सर्वाधिक वांक्षित (मोस्ट वांटेड) आतंकवादियों की सूची में लश्करएतैयबा के संस्थापक हाफिज मुहम्मद सईद तथा जैशएमोहम्मद के अध्यक्ष मौलाना मसूद अजहर का नाम नहीं है। ११९ नामों की इस सूची में या तो छुटभैये आतंकवादियों के नाम हैं या फिर उन संगठनों के नेताआें के नाम हैं, जो स्वयं पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विद्रोह का झंडा उठाये हुए हैं। मुंबई हमले के संबंध में आरोपित २० सदस्यों के नाम इस सूची में जरूर हैं, लेकिन ये केवल वे लोग हैं, जिन पर आतंकवादियों की सहायता करने का आरोप है। आश्चर्य की बात यह है कि गत वर्ष अक्टूबर में गुप्तचर एजेंसी एफआईए की जो सूची जारी हुई थी, उसमें सईद और अजहर दोनों के नाम थे, लेकिन इस ताजा सूची में उन्हें शामिल नहीं किया गया है।

इस सूची के नामों पर यदि नजर डालें, तो पता चलेगा कि पाकिस्तान के गृहमंत्रालय ने ब़डी चतुराई से यह सूची तैयार की है। कहने को इसमें हरकतुल जिहादी अल इस्लाम, सिपाहे सहाबा, लश्करे झांगवी, आदि के साथ जैशएमोहम्मद व लश्करएतैयबा के सदस्य भी शामिल हैं, किंतु उन्हें दिखावे के लिए ही शामिल किया गया है। मुख्य जोर वजीरिस्तान के कारी सैफुल्लाह अख्तर गुट तथा जुदल्लाह एंड बलोच लिबरेशन आर्मी के सदस्यों पर है। सूची इस तरह से तैयार की गयी है कि अमेरिका तथा अन्य पश्चिमी देशों को इस बात से संतुष्ट किया जा सके कि पाकिस्तान सरकार आतंकवादियों के खिलाफ बेहद सख्त है, किंतु वह छुटभैयों को आगे करके ब़डे नेताआें को बचाने की कोशिश में लगी रही है। हाफिज सईद व मसूद अजहर जैसे नेताआें को तो वह हजार झूठ बोलकर बचाने की कोशिश में रही है।

हाफिज सईद को तो उसने भारत के बारबार आग्रह करने के बावजूद गिरफ्तार करने से इनकार कर दिया है। इतना ही नहीं, अभी पाकिस्तान की तरफ से बयान आया कि भारत ने कभी उनकी गिरफ्तारी की मांग नहीं की। २५ फरवरी को दिल्ली में हुई सचिव स्तर की बातचीत में भी उनकी गिरफ्तारी का मुद्‌दा नहीं उठाया गया। भारत की तरफ से तत्काल इसका खंडन किया गया और कहा गया कि २५ फरवरी की बातचीत का तो मुख्य मुद्‌दा ही मुंबई हमले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का है। भारत सईद के खिलाफ प्रमाणों के कई पुलिंदे अब तक पाकिस्तान को दे चुका है, किन्तु वह उन पर कोई कार्रवाई करने के लिए तैयार नहीं है। जाहिर है कि पाकिस्तान लगातार आतंकवादी नेताआें के बचाव की नीति पर चल रहा है और कार्रवाई के नाम पर केवल छुटभैयों के नाम दर्ज करा रहा है और उन पर भी ऐसे आरोप लगा रहा है कि अदालत से वे आसानी से छूट जाएं।

आपकी राय